jaivardhannews.com

red chilli hawan : 751 किलो मिर्च की आहुतियां, आधी रात तक चलता रहा श्मशान का अनोखा हवन

red chilli hawan भीलवाड़ा शहर के पंचमुखी मोक्षधाम स्थित प्राचीन मसानिया भैरवनाथ मंदिर में एक बार फिर अनोखी और आस्था से जुड़ी परंपरा देखने को मिली। यहां 751 किलो सूखी लाल मिर्च से विशेष हवन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। मां बगलामुखी की पूजा-अर्चना के साथ भक्तों ने सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

यह आयोजन सिर्फ धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि अपनी अनूठी परंपरा के कारण भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। बताया जा रहा है कि यह परंपरा पिछले 10 वर्षों से लगातार निभाई जा रही है। हालांकि इस बार हवन में डाली गई लाल मिर्च की मात्रा ने पिछले सभी वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। मंदिर परिसर में आयोजित इस विशेष हवन को लेकर श्रद्धालुओं में काफी उत्साह देखने को मिला। मंदिर समिति के अनुसार, हर वर्ष इस परंपरा का आयोजन श्रद्धा और विधि-विधान के साथ किया जाता है। पिछले साल जहां 551 किलो सूखी लाल मिर्च से हवन हुआ था, वहीं इस बार इसकी मात्रा बढ़ाकर 751 किलो कर दी गई। इस तरह वर्ष 2026 का यह आयोजन न केवल श्रद्धा का प्रतीक बना, बल्कि मात्रा के लिहाज से भी अब तक का सबसे बड़ा आयोजन माना जा रहा है। लाल मिर्च के हवन को लेकर लोगों में जिज्ञासा भी रही और आस्था भी।

मां बगलामुखी और भैरवनाथ की आराधना से मांगी सुख-समृद्धि

Bhilwara shamshan hawan : इस विशेष अनुष्ठान की शुरुआत मां बगलामुखी की पूजा-अर्चना के साथ हुई। इसके बाद विधिवत हवन किया गया, जिसमें भक्तों ने आहुतियां देकर अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की। मंदिर परिसर में इस दौरान भैरव बाबा का आकर्षक श्रृंगार भी किया गया, जिसने श्रद्धालुओं का ध्यान खींचा। भक्तों ने बाबा के दर्शन कर आशीर्वाद लिया और परिवार की खुशहाली की मनोकामना की।

हवन का उद्देश्य: जीवन से बाधाएं और नकारात्मकता दूर करना

Masaniya Bhairavnath temple : मंदिर के युवा अध्यक्ष रवि कुमार सोलंकी ने बताया कि इस विशेष हवन का मुख्य उद्देश्य भक्तों के जीवन से बाधाओं को दूर करना और मां बगलामुखी का आशीर्वाद प्राप्त करना है। मान्यता है कि इस आयोजन में शामिल होने से घर-परिवार में सुख-शांति का वातावरण बनता है और कई तरह की परेशानियों से राहत मिलती है। उन्होंने बताया कि आमतौर पर श्मशान को लेकर लोगों के मन में भय और नकारात्मक सोच होती है। ऐसे में यह हवन उस डर को खत्म करने का भी प्रतीक है। आयोजन के माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि आस्था, साधना और सकारात्मक ऊर्जा के जरिए बुरी शक्तियों, रोगों और मानसिक भय पर विजय पाई जा सकती है।

तीखे धुएं के बीच भी नहीं डगमगाई श्रद्धालुओं की आस्था

751 किलो लाल मिर्च का हवन होने के कारण वातावरण में तीखापन और धुएं का असर स्वाभाविक था, लेकिन इसके बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह और विश्वास कम नहीं हुआ। पुरुष, महिलाएं और बच्चे बड़ी संख्या में हवन स्थल पर मौजूद रहे और पूरी श्रद्धा से अनुष्ठान में भाग लेते रहे। मंदिर के पुजारी संतोष कुमार खटीक ने बताया कि इस स्थान पर बाबा काल भैरवनाथ, मां आदिशक्ति कालका और बाबा गुप्तेश्वर महादेव की विशेष उपस्थिति मानी जाती है। यही कारण है कि यहां होने वाले हवन और पूजा-पाठ का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।

आधी रात के बाद तक चलती रहीं आहुतियां

Rajasthan unique tradition : यह विशेष हवन देर रात शुरू हुआ और मध्य रात्रि के बाद तक चलता रहा। भक्त लगातार आहुतियां देते रहे और मंत्रोच्चार के बीच पूरा माहौल भक्तिमय बना रहा। श्मशान जैसी गंभीर जगह पर आस्था का इतना विराट स्वरूप देखने के लिए भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। रात्रि का समय, भैरवनाथ मंदिर का वातावरण, लाल मिर्च का धुआं और मंत्रोच्चार—इन सबने मिलकर आयोजन को बेहद अलग और प्रभावशाली बना दिया।

निशुल्क आयोजन, मंदिर समिति ने संभाली पूरी व्यवस्था

midnight havan Rajasthan : इस धार्मिक आयोजन की एक और खास बात यह रही कि इसे मंदिर समिति ने पूरी तरह निशुल्क रखा। श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था, हवन सामग्री और अन्य जरूरी प्रबंध समिति की ओर से किए गए। इससे दूर-दूर से पहुंचे लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। मंदिर समिति की ओर से व्यवस्था इस प्रकार की गई कि अधिक से अधिक श्रद्धालु इस विशेष अनुष्ठान में सम्मिलित होकर लाभ उठा सकें।

भक्तों की मान्यता: दर्शन मात्र से दूर होती हैं बाधाएं

स्थानीय श्रद्धालुओं का मानना है कि इस मंदिर में बाबा के दर्शन मात्र से ही जीवन की कई बाधाएं दूर हो जाती हैं। कुछ लोग इसे गृहक्लेश से मुक्ति का स्थान मानते हैं, तो कुछ इसे शारीरिक और मानसिक कष्टों से राहत देने वाला तीर्थ मानते हैं। यही वजह है कि हर वर्ष इस विशेष हवन में शामिल होने और बाबा के दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। इस बार भी श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने यह साबित कर दिया कि मंदिर के प्रति लोगों की आस्था लगातार बढ़ रही है।

Exit mobile version