रहस्यमयी कुलधरा

जैसलमेर के रेगिस्तान में बसा कुलधरा गांव करीब 200 सालों से वीरान व रहस्यमयी बना हुआ है।

13वीं सदी 

पालीवाल ब्राह्मणों ने 13वीं शताब्दी में कुलधरा बसाया, जो जल्द ही समृद्ध गांव बन गया।

समृद्ध गांव 

कृषि, व्यापार और वित्तीय गतिविधियों के कारण कुलधरा जैसलमेर के सबसे समृद्ध गांवों में था।

खड़ीन प्रणाली 

पालीवालों की अनोखी जल संरक्षण तकनीक ने रेगिस्तान में खेती को संभव बनाया था।

सलीम सिंह 

लोककथाओं के अनुसार दीवान सलीम सिंह की नजर गांव मुखिया की बेटी पर पड़ी।

सम्मान की रक्षा 

गांव वालों ने बेटी और समाज के सम्मान के लिए गांव छोड़ने का कठिन निर्णय लिया।

एक रात 

कहा जाता है कि एक ही रात में पूरा गांव अचानक खाली हो गया था।

शापित गांव 

मान्यता है कि जाते समय पालीवाल ब्राह्मणों ने गांव को दोबारा न बसने का श्राप दिया।

भूतिया कहानियां 

रात में अजीब आवाजों और अनदेखी गतिविधियों की कहानियां आज भी सुनाई जाती हैं।

पर्यटन आकर्षण 

आज कुलधरा इतिहास, रहस्य और विरासत के कारण प्रमुख पर्यटन स्थल बन चुका है।