
500 tariff on india : अमेरिका और भारत के व्यापारिक रिश्तों में एक बार फिर तनाव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस के खिलाफ कड़े आर्थिक प्रतिबंधों से जुड़े एक अहम विधेयक को मंजूरी दे दी है। इस बिल में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक भारी टैरिफ (Tariff) लगाने का प्रावधान शामिल है, जिसमें भारत, चीन और ब्राजील जैसे बड़े देश सीधे तौर पर निशाने पर आ सकते हैं।
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह बिल रूस के साथ कारोबार करने वाले देशों पर दबाव बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। माना जा रहा है कि अगर यह विधेयक संसद से पास हो जाता है, तो भारत के लिए अमेरिका के साथ व्यापार करना और भी महंगा और चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
📜 अगले हफ्ते संसद में पेश हो सकता है बिल
Trump Russia Sanctions Bill : रिपब्लिकन पार्टी के वरिष्ठ सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने बताया कि बुधवार को उन्होंने व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति ट्रम्प से मुलाकात की थी। इस बैठक के दौरान ट्रम्प ने इस बिल को संसद में पेश करने की औपचारिक अनुमति दे दी। ग्राहम के मुताबिक, यह विधेयक पिछले कई महीनों से तैयार किया जा रहा था और अब इसे अगले सप्ताह अमेरिकी संसद में वोटिंग के लिए लाया जा सकता है।

क्या है “Sanctioning of Russia Act 2025”?
Sanctioning of Russia Act 2025 : इस प्रस्तावित कानून का नाम “Sanctioning of Russia Act 2025” रखा गया है। इसका मुख्य उद्देश्य यूक्रेन युद्ध के बीच रूस की आर्थिक ताकत को कमजोर करना है। अमेरिका का मानना है कि रूस को मिलने वाली तेल और गैस से होने वाली कमाई से उसे युद्ध जारी रखने में मदद मिल रही है।
इस एक्ट के तहत रूस के कई अहम सेक्टर्स को निशाना बनाया गया है, जिनमें शामिल हैं—
- Energy Sector (तेल और गैस कंपनियां)
- Banking Sector (बड़े रूसी बैंक)
- Defence Industry (डिफेंस और हथियार निर्माण से जुड़ी कंपनियां)
इसके अलावा, रूस से जुड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और सहयोगी संस्थाओं पर भी कड़े प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है।
तीसरे देशों पर भी गिरेगी गाज, Secondary Sanctions का प्रावधान
US Tariff on Russian Oil Buyers : इस बिल की सबसे अहम और विवादास्पद बात यह है कि इसमें Secondary Sanctions का प्रावधान भी रखा गया है। इसका मतलब साफ है कि अगर कोई तीसरा देश, कंपनी या बैंक रूस को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में मदद करता है, तो उस पर भी अमेरिका सीधे कार्रवाई कर सकेगा। दूसरे शब्दों में कहें तो जो भी देश रूस के साथ “घुमावदार रास्तों” से व्यापार करेगा, वह भी अमेरिकी आर्थिक कार्रवाई की जद में आ सकता है।
🇺🇦 यूक्रेन के पुनर्निर्माण के लिए रूसी संपत्तियों का इस्तेमाल
India Russia Oil Import Tariff : विधेयक में यह भी कहा गया है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों में फ्रीज की गई रूसी संपत्तियों को यूक्रेन के पुनर्निर्माण (Reconstruction) में इस्तेमाल करने के लिए कानूनी रास्ता तैयार किया जाएगा। युद्ध के कारण हुए नुकसान की भरपाई के लिए यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है।
ट्रम्प के Executive Orders को मिलेगा कानूनी रूप
इस एक्ट के जरिए रूस के खिलाफ लगाए गए ट्रम्प के पुराने Executive Orders को कानून का दर्जा दिया जाएगा। इसका असर यह होगा कि भविष्य में कोई भी अमेरिकी राष्ट्रपति अकेले फैसले से इन प्रतिबंधों को हटा या नरम नहीं कर सकेगा। अगर किसी तरह की छूट या राहत देनी होगी, तो उसके लिए Congress की मंजूरी जरूरी होगी।
सीनेट में 80% से ज्यादा समर्थन
यह बिल पूरी तरह Bipartisan Bill है, यानी इसे रिपब्लिकन और डेमोक्रेट—दोनों पार्टियों का समर्थन मिला हुआ है। इस विधेयक को रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने मिलकर पेश किया है। ग्राहम के अनुसार, फिलहाल इस बिल के 85 Co-Sponsors हैं, जो सीनेट के करीब 80 प्रतिशत सांसदों का प्रतिनिधित्व करते हैं। बिल में राष्ट्रपति को विशेष छूट (Presidential Waiver) देने का विकल्प भी शामिल किया गया है, ताकि ट्रम्प को रणनीतिक फैसले लेने में लचीलापन मिल सके।
भारत पर पहले से लागू है 25% Extra Tariff
रूस से तेल खरीदने को लेकर अमेरिका पहले ही भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगा चुका है। अगर नया बिल पास हो जाता है, तो यह भारत के लिए और बड़ी परेशानी बन सकता है। फिलहाल भारत पर कुल मिलाकर करीब 50% टैरिफ लागू हो चुका है, जिससे अमेरिका को भारतीय निर्यात (Exports) प्रभावित हो रहे हैं। इसी वजह से दोनों देशों के बीच Trade Deal को लेकर बातचीत जारी है।
भारत चाहता है टैरिफ में बड़ी राहत
भारत की कोशिश है कि उस पर लगाए गए कुल 50% टैरिफ को घटाकर 15% किया जाए। साथ ही रूस से कच्चा तेल खरीदने पर लगाए गए Extra 25% Penalty को पूरी तरह हटाने की मांग भी की जा रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि नए साल में दोनों देशों के बीच चल रही इस बातचीत से कोई ठोस और सकारात्मक फैसला सामने आ सकता है।
दावा: भारतीय राजदूत ने की टैरिफ हटाने की अपील
सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने दावा किया है कि 5 जनवरी को उन्होंने खुलासा किया था कि करीब एक महीने पहले वे भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा के घर गए थे। इस मुलाकात में भारत द्वारा रूस से तेल आयात कम करने पर विस्तार से चर्चा हुई थी। ग्राहम के अनुसार, भारतीय राजदूत ने उनसे राष्ट्रपति ट्रम्प तक यह संदेश पहुंचाने का अनुरोध किया था कि भारत पर लगाया गया 25% अतिरिक्त टैरिफ हटाया जाए।
4 साल बाद भारत ने रूस से तेल आयात घटाया
भारत ने चार साल बाद पहली बार रूस से कच्चे तेल के आयात में कटौती की है।
Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक,
- नवंबर में भारत का रूसी तेल आयात करीब 17.7 लाख बैरल प्रतिदिन था
- दिसंबर में यह घटकर लगभग 12 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया
आने वाले महीनों में यह आंकड़ा 10 लाख बैरल प्रतिदिन से भी नीचे जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2021 से रूस की दो बड़ी तेल कंपनियों Rosneft और Lukoil पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू होने के बाद भारत का तेल आयात धीरे-धीरे कम होने लगा है।
