
Court’s decision on murder : राजसमंद जिले के दोवड़ गांव में एक महिला की लूट और हत्या के सनसनीखेज मामले में कोर्ट ने कड़ा फैसला सुनाया है। जिला एवं सेशन कोर्ट के न्यायाधीश राघवेंद्र काछवाल ने इस मामले में दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास (Life Imprisonment) की सजा सुनाई है। इसके साथ ही, कोर्ट ने दोषियों पर 40 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इस निर्मम हत्याकांड ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था, और अब कोर्ट के इस फैसले से पीड़ित परिवार को कुछ हद तक इंसाफ की उम्मीद जगी है।
राजसमंद के दोवड़ गांव में हुई इस जघन्य वारदात के दोषी केसर सिंह पुत्र उदय सिंह राजपूत (निवासी उपला रेट, दोवड़) और किशन सिंह पुत्र सोहन सिंह राजपूत (निवासी दोवड़) को कोर्ट ने सजा सुनाई। जिला एवं सेशन कोर्ट ने दोनों को कई धाराओं के तहत दोषी करार देते हुए सजा दी। धारा 302/34 (IPC) हत्या के मामले में आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। वहीं धारा 394/34 (IPC) लूट के दौरान चोट पहुंचाने के लिए 10 साल का कठोर कारावास और 10 हजार रुपये का जुर्माना। साथ ही धारा 397/34 (IPC) लूट के दौरान जानलेवा हथियारों का इस्तेमाल करने के लिए 10 साल का कठोर कारावास और 10 हजार रुपये का जुर्माना। जुर्माने की राशि न चुकाने पर दोषियों को अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। इस फैसले से यह संदेश साफ है कि कोर्ट ऐसे जघन्य अपराधों को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करेगा।
लूट के इरादे से की गई बेरहम हत्या
Rajsamand News Today : लोक अभियोजक (Public Prosecutor) राम लाल जाट ने बताया कि यह दिल दहला देने वाली घटना 11 जून 2021 को राजनगर थाना क्षेत्र के दोवड़ गांव में हुई थी। बदमाशों ने 55 वर्षीय मोहन बाई के साथ लूटपाट की और उसकी बेरहमी से हत्या कर दी। लालच में अंधे हो चुके बदमाशों ने मोहन बाई के गहने लूटने के लिए बेहद क्रूरता दिखाई। उन्होंने महिला के कानों में पहने सोने के टॉप्स, गले का मंगलसूत्र (Mangalsutra), माथे का बोर (Tikka), और नाक की नथ (Nath) छीन लिए, जो सभी सोने के थे। इतना ही नहीं, गहने छीनने के दौरान बदमाशों ने मोहन बाई के बाएं पैर को पिंडली के ऊपर से आधा काट दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस क्रूरता ने पूरे गांव को हिलाकर रख दिया था।

बेटे ने दर्ज कराई थी FIR
Rajsamand Police : इस घटना की जानकारी मोहन बाई के बेटे उदय सिंह ने राजनगर पुलिस थाने में दी। उदय सिंह ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि 11 जून 2021 को वह सुबह 7 बजे अपनी पत्नी मंगू कुंवर के साथ गांव में गोल विट्टी के एक प्रोग्राम में शामिल होने गया था। उस दिन उनके पिता, जो आंखों की रोशनी खो चुके थे, की देखभाल के लिए उनकी मां मोहन बाई को घर पर छोड़कर गए थे। उदय सिंह ने बताया कि उनकी मां हर दिन सुबह 8-9 बजे के बीच बकरियां चराने के लिए निकलती थीं और दोपहर 12 बजे तक घर लौट आती थीं। उस दिन भी वह सुबह 7 बजे के आसपास घर से निकली थीं, लेकिन दोपहर तक वापस नहीं लौटीं। उदय सिंह ने बताया कि वह प्रोग्राम से घर लौट आए थे, लेकिन मां के देर होने पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया, क्योंकि ऐसा कभी-कभी हो जाया करता था। हालांकि, दोपहर करीब 3 बजे गांव की एक महिला बसंती कुंवर ने उन्हें सूचना दी कि उनकी मां लीमबाड़ा के बीड़े में पड़ी हुई हैं। यह सुनते ही उदय सिंह अपने बड़े भाई देवी सिंह और बेटे विक्रम के साथ मौके पर पहुंचे। वहां का मंजर देखकर उनके होश उड़ गए। उनकी मां लहूलुहान हालत में मृत पड़ी थीं, और उनके शरीर पर गहरे जख्म थे।
जांच में जुटे सबूत और गवाह
Woman Murder Case Rajsamand : पुलिस ने उदय सिंह की रिपोर्ट के आधार पर तुरंत कार्रवाई शुरू की। राजनगर थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी (SHO) प्रवीण टांक ने इस मामले की गहन जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने कई महत्वपूर्ण सबूत जुटाए, जिनमें घटनास्थल से मिली खून से सनी मिट्टी (Blood-Stained Soil), एक कूट (Weapon), मोबाइल फोन, चप्पलें, मृतका की मुट्ठी में पकड़े हुए बाल, गले की माला, और लेन-देन से जुड़ी एक डायरी शामिल थी। इसके अलावा, पुलिस ने ब्लड सैंपल (Blood Sample), डीएनए जांच (DNA Test), और अभियुक्त की शर्ट को भी सबूत के तौर पर जब्त किया।
सबूतों को और पुख्ता करने के लिए मोबाइल फोन को फोरेंसिक यूनिट (Forensic Unit), उदयपुर भेजा गया, जहां से फोरेंसिक जांच (Forensic Examination) की रिपोर्ट प्राप्त हुई। घटनास्थल के फोटोग्राफ्स (Photographs), केमिकल एग्जामिनेशन लेटर (Chemical Examination Letter), और स्पेसमैन हस्ताक्षर (Specimen Signatures) भी जांच का हिस्सा बने। इन सभी सबूतों के आधार पर पुलिस ने चार्जशीट (Chargesheet) तैयार की और इसे कोर्ट में पेश किया।
कोर्ट में चला लंबा ट्रायल
इस मामले में अभियोजन पक्ष (Prosecution) ने कोर्ट में मजबूत दलीलें पेश कीं। लोक अभियोजक राम लाल जाट ने बताया कि ट्रायल (Trial) के दौरान 35 गवाहों (Witnesses) के बयान दर्ज किए गए। इसके साथ ही, 98 दस्तावेज (Documents) और 12 आर्टिकल (Articles) को कोर्ट में सबूत के तौर पर पेश किया गया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने और सभी सबूतों की गहन जांच के बाद जिला एवं सेशन कोर्ट ने अभियुक्तों—केसर सिंह और किशन सिंह—को दोषी करार दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में दोनों को आजीवन कारावास और 40 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। राज्य सरकार की ओर से इस मामले में पैरवी लोक अभियोजक राम लाल जाट ने की।
