
Hindusthan Zinc : वेदांता समूह की प्रमुख कंपनी और विश्व की सबसे बड़ी एकीकृत जिंक उत्पादक हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड (Hindustan Zinc Limited) न केवल मेटल्स के उत्पादन में अपनी पहचान रखती है, बल्कि समावेशी और सस्टेनेबल (Sustainable) विकास पहलों के जरिए समुदायों को सशक्त बनाने में भी अहम भूमिका निभा रही है। कंपनी का मानना है कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और कलात्मक विरासत को संरक्षित करना सामाजिक बदलाव का एक शक्तिशाली माध्यम है। इसी दृष्टिकोण के साथ, हिन्दुस्तान जिंक पारंपरिक कला रूपों को पुनर्जनन और संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। अजरख ब्लॉक प्रिंटिंग (Ajrakh Block Printing) की शिल्पकारी से लेकर आदिवासी गवरी नृत्य (Gawri Dance) और पखावज की मधुर ध्वनियों तक, कंपनी भारत की सदियों पुरानी सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखने में निवेश कर रही है। ये पहल न केवल कला और संस्कृति को संरक्षित करती हैं, बल्कि ग्रामीण समुदायों के लिए आजीविका के नए अवसर भी पैदा करती हैं, जिससे वे अपनी परंपराओं को बनाए रखते हुए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।
पारंपरिक कौशल को नई पहचान
Rajsamand News : हिन्दुस्तान जिंक ने पारंपरिक शिल्प कौशल को बढ़ावा देने और ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाने के लिए कई अनुकरणीय कदम उठाए हैं। कंपनी ने कारीगर नेटवर्क और गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) के साथ मिलकर राजस्थान के अजमेर में एक ब्लॉक प्रिंटिंग यूनिट (Block Printing Unit) की स्थापना की है। इस यूनिट में 18 महिलाओं को रोजगार दिया गया है, जिन्हें पारंपरिक ब्लॉक प्रिंटिंग तकनीकों में कुशल विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा, कंपनी ने हेरिटेज टेक्सटाइल आर्ट (Heritage Textile Art) को और अधिक प्रोत्साहन देने के लिए अजरख प्रिंटिंग पहल शुरू की है, जो गुजरात और राजस्थान की एक प्राचीन कला है। ये दोनों पहल हिन्दुस्तान जिंक के घरेलू कपड़ा ब्रांड ‘उपाया’ (Upaya) का हिस्सा हैं, जो सस्टेनेबल आजीविका (Sustainable Livelihood) को बढ़ावा देता है। इस ब्रांड के जरिए न केवल पारंपरिक शिल्प कौशल को संरक्षित किया जा रहा है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को एक सम्मानजनक और स्वावलंबी जीवन जीने का अवसर भी मिल रहा है।
इस पहल से जुड़ी सखी ब्लॉक प्रिंटिंग यूनिट की प्रशिक्षु शर्मिला अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहती हैं, “अपने हाथों से हमारी पारंपरिक कला को जीवित करना मुझे बहुत गर्व महसूस कराता है। इस पहल का हिस्सा बनने से न केवल मुझे एक नया कौशल सीखने का मौका मिला, बल्कि मैं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी बन सकी हूं। अब मैं अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हूं, और यह मेरे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है।”
प्रदर्शन कलाओं को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना
हिन्दुस्तान जिंक न केवल पारंपरिक शिल्प को बढ़ावा दे रही है, बल्कि प्रदर्शन कलाओं (Performing Arts) को संरक्षित और प्रोत्साहित करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। कंपनी वेदांता उदयपुर वर्ल्ड म्यूजिक फेस्टिवल (Vedanta Udaipur World Music Festival) जैसे बड़े आयोजनों का समर्थन करती है, जो संगीत और कला प्रेमियों के लिए एक अनमोल मंच है। यह फेस्टिवल भारतीय और अंतरराष्ट्रीय संगीतकारों को एक साथ लाता है, जिसमें लोक (Folk), शास्त्रीय (Classical), रॉक (Rock) और फ्यूजन (Fusion) जैसी विभिन्न संगीतमय शैलियों का संगम देखने को मिलता है। यह आयोजन राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करता है और साथ ही उन वाद्ययंत्रों और संगीत परंपराओं को पुनर्जनन करता है, जो समय के साथ लुप्त होने की कगार पर हैं।
इसके अलावा, हिन्दुस्तान जिंक सृजन द स्पार्क (Srujan The Spark) जैसी संस्थाओं के साथ मिलकर भारतीय कला और संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ले जा रही है। यह संस्था भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में मदद करती है। साथ ही, स्मृतियाँ (Smritiyaan) पहल के जरिए तबला वादक पंडित चतुर लाल को श्रद्धांजलि दी जाती है, जो भारत की शास्त्रीय संगीत परंपराओं को नई पीढ़ियों तक पहुंचाने का एक प्रयास है। इस तरह के आयोजन न केवल कला और संगीत को संरक्षित करते हैं, बल्कि युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का भी काम करते हैं।
हिन्दुस्तान जिंक ने 2025 में जावर, रामपुरा आगुचा, चंदेरिया, दरीबा और पंतनगर जैसे क्षेत्रों में सखी उत्सव (Sakhi Utsav) का आयोजन किया। इन उत्सवों में स्वयं सहायता समूहों (Self-Help Groups) की महिलाओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इन आयोजनों में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, कल्याण सत्र (Wellness Sessions), खेल गतिविधियां, वित्तीय साक्षरता शिविर (Financial Literacy Camps) और नुक्कड़ नाटकों (Street Plays) का आयोजन किया गया। इन गतिविधियों के जरिए 7,000 से अधिक महिलाओं ने अपने सशक्तिकरण और आत्मविश्वास को प्रदर्शित किया, जिससे यह साबित हुआ कि कला और संस्कृति सामाजिक बदलाव का एक प्रभावी माध्यम हो सकती है।
सामाजिक जागरूकता के लिए नुक्कड़ नाटक और ग्राम रोड शो
हिन्दुस्तान जिंक ने सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता फैलाने के लिए भी कला को एक माध्यम बनाया है। कंपनी का ‘उठोरी अभियान’ (Uthori Campaign) इसका एक बेहतरीन उदाहरण है। यह अभियान 2021 से चल रहा है और अब तक 180 स्कूलों में 11,000 से अधिक छात्रों तक पहुंच चुका है। इस अभियान के तहत संवादात्मक प्रदर्शन (Interactive Performances) और कहानी सुनाने (Storytelling) के जरिए मासिक धर्म स्वच्छता (Menstrual Hygiene), घरेलू हिंसा (Domestic Violence) और बाल विवाह (Child Marriage) जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता फैलाई जाती है। यह अभियान न केवल बच्चों को शिक्षित करता है, बल्कि उन्हें इन मुद्दों पर खुलकर बात करने के लिए प्रेरित भी करता है।
इसके अलावा, हिन्दुस्तान जिंक की सखी पहल (Sakhi Initiative) के तहत 200 गांवों में 2,000 से अधिक स्वयं सहायता समूह (SHGs) सक्रिय हैं। इस पहल ने 25,000 से ज्यादा ग्रामीण और आदिवासी महिलाओं को सशक्त बनाया है। इन समूहों के जरिए महिलाओं को नेतृत्व (Leadership), उद्यमिता (Entrepreneurship) और वित्तीय स्वतंत्रता (Financial Independence) के गुण सिखाए जाते हैं, जिससे वे अपने परिवार और समुदाय के लिए एक मजबूत आधार बन सकें। सखी पहल के तहत आयोजित कार्यशालाओं और प्रशिक्षण सत्रों ने इन महिलाओं को न केवल आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है, बल्कि उन्हें अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक भी किया है।

हिन्दुस्तान जिंक का समग्र सामाजिक प्रभाव
हिन्दुस्तान जिंक की ये सभी पहलें कंपनी के समग्र सामाजिक प्रभाव (Holistic Social Impact) का हिस्सा हैं। कंपनी शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा (Healthcare), पोषण (Nutrition), पेयजल (Drinking Water), स्वच्छता (Sanitation), कौशल विकास (Skill Development), खेल (Sports) और संस्कृति (Culture) जैसे क्षेत्रों में काम कर रही है। हिन्दुस्तान जिंक का मानना है कि व्यक्तिगत सशक्तिकरण (Individual Empowerment) से ही सामुदायिक परिवर्तन (Community Transformation) संभव है। इसी विश्वास के साथ, कंपनी ने अपने सामाजिक दायित्वों को बखूबी निभाया है और लगभग 4,000 गांवों में 20 लाख से अधिक लोगों के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है।
इन पहलों के जरिए हिन्दुस्तान जिंक ने न केवल मेटल्स उत्पादन में अपनी अग्रणी स्थिति को बनाए रखा है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत को संरक्षित करने में भी एक मिसाल कायम की है। कंपनी का यह दृष्टिकोण सस्टेनेबल डेवलपमेंट (Sustainable Development) के सिद्धांतों पर आधारित है, जो पर्यावरण, समाज और अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन बनाता है।
सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक बदलाव का प्रतीक
हिन्दुस्तान जिंक ने मेटल्स उत्पादन के क्षेत्र में अपनी वैश्विक पहचान के साथ-साथ कला, संस्कृति और सामाजिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी एक अनमोल योगदान दिया है। अजरख ब्लॉक प्रिंटिंग और आदिवासी नृत्य से लेकर शास्त्रीय संगीत और सामाजिक जागरूकता अभियानों तक, कंपनी ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने और समुदायों को सशक्त बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। सखी पहल और वेदांता उदयपुर वर्ल्ड म्यूजिक फेस्टिवल जैसे आयोजन इस बात का प्रमाण हैं कि कला और संस्कृति सामाजिक बदलाव के शक्तिशाली साधन हो सकते हैं। हिन्दुस्तान जिंक की ये पहलें न केवल ग्रामीण और आदिवासी समुदायों को आजीविका और आत्मनिर्भरता प्रदान कर रही हैं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर एक नई ऊंचाई भी दे रही हैं। यह कंपनी एक ऐसी मिसाल पेश कर रही है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
