
Hindustan Zinc sustainability initiatives हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड (HZL) का राजपुरा दरीबा कॉम्प्लेक्स (RDC) पर्यावरणीय स्थिरता (Sustainability), जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से निपटने, और रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा देने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। यह कॉम्प्लेक्स अपनी नवाचारपूर्ण पहलों के माध्यम से सस्टेनेबल खनन प्रथाओं में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। जल संरक्षण, रिन्यूएबल एनर्जी, सर्कुलर इकोनॉमी, और जैव विविधता संरक्षण (Biodiversity Conservation) जैसे क्षेत्रों में इसकी उपलब्धियां न केवल कंपनी की पर्यावरणीय जिम्मेदारी को दर्शाती हैं, बल्कि खनन उद्योग में एक वैश्विक बेंचमार्क भी स्थापित करती हैं।
हिंदुस्तान जिंक ने राजपुरा दरीबा कॉम्प्लेक्स में रिन्यूएबल एनर्जी के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण निवेश किया है, जो इसके कार्बन फुटप्रिंट (Carbon Footprint) को कम करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। कंपनी ने 200 मेगावाट रिन्यूएबल एनर्जी परियोजना के पहले चरण को सफलतापूर्वक पूरा किया है, जिसके तहत प्रतिदिन 85 मेगावाट रिन्यूएबल एनर्जी प्राप्त हो रही है। इस ऊर्जा का 20 मेगावाट हिस्सा विशेष रूप से सिंदेसर खुर्द खदान (SKM) को आपूर्ति किया जा रहा है, जो खनन कार्यों को अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाता है। इसके अतिरिक्त, कॉम्प्लेक्स में 4.5 मेगावाट का सोलर एनर्जी प्लांट और 100 किलोवाट की सोलर रूफटॉप परियोजना स्थापित की गई है। ये परियोजनाएं स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता बढ़ाने और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (GHG Emissions) को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। राजपुरा दरीबा कॉम्प्लेक्स ने तीन अंडरग्राउंड बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों (BEVs) को भी अपनाया है, जो डीजल-आधारित वाहनों की तुलना में पर्यावरण के लिए अधिक अनुकूल हैं। इसके साथ ही, सामग्री परिवहन (Material Transportation) के लिए लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) और इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग शुरू किया गया है, जो सस्टेनेबल मोबिलिटी को बढ़ावा देता है। इन प्रयासों की मान्यता में, सिंदेसर खुर्द खदान को ग्रीनको असेसमेंट के तहत सिल्वर रेटिंग प्रदान की गई है, जो खनन क्षेत्र में उच्चतम स्कोर है। यह सम्मान कंपनी की रिन्यूएबल एनर्जी और पर्यावरणीय प्रबंधन की दिशा में प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
जल संरक्षण में अग्रणी पहल
Hindustan Zinc renewable energy project 2025 : राजपुरा दरीबा कॉम्प्लेक्स ने जल प्रबंधन (Water Management) के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, जो राजस्थान जैसे जल-कमी वाले क्षेत्र में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। कॉम्प्लेक्स की परिचालन जल मांग का एक बड़ा हिस्सा अब उदयपुर के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से प्राप्त रिसाइकल्ड पानी से पूरा किया जा रहा है, जिससे ताजे जल स्रोतों पर निर्भरता काफी कम हो गई है। कंपनी ने पानी की रिकवरी के लिए नवाचारपूर्ण तकनीकों को अपनाया है, जिसमें टेलिंग डैम और पेस्ट फिल प्लांट से पानी की पुनर्प्राप्ति शामिल है। इसके अतिरिक्त, राजपुरा दरीबा कॉम्प्लेक्स में भारत का पहला ड्राय टेलिंग प्लांट स्थापित किया गया है, जो पानी की खपत को कम करने और रिसाइक्लिंग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। गीले टेलिंग सिस्टम से सूखे टेलिंग सिस्टम में परिवर्तन ने जल संरक्षण को और मजबूत किया है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप, राजपुरा दरीबा कॉम्प्लेक्स को नीति आयोग द्वारा वॉटर पॉजिटिव कंपनी के रूप में स्कोप 1 प्रमाणन प्राप्त हुआ है, जो जल स्थिरता (Water Stewardship) के प्रति इसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। कंपनी ने जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) तकनीक को भी अपनाया है, जिसके तहत 3,800 KLD क्षमता का एक ZLD प्लांट स्थापित किया गया है। यह प्लांट पानी की रिसाइक्लिंग को बढ़ाता है और ताजे पानी की खपत को 25% तक कम करने के लक्ष्य को समर्थन देता है।
सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा
Rajpura Dariba complex water management success : हिंदुस्तान जिंक ने सर्कुलर इकोनॉमी (Circular Economy) के सिद्धांतों को अपनाकर संसाधन दक्षता को बढ़ावा दिया है। राजपुरा दरीबा कॉम्प्लेक्स में स्थापित पेस्ट फिल प्लांट खदान के खाली स्थानों को टेलिंग से भरने के लिए उपयोग किया जाता है, जिससे संसाधनों का पुनरुपयोग सुनिश्चित होता है और अपशिष्ट न्यूनतम होता है। इसके अलावा, फ्लाई ऐश और अपशिष्ट चट्टान को टेलिंग डैम के तटबंधों के निर्माण और बैकफिलिंग के लिए पुनरुपयोग किया जाता है। कंपनी ने जरोसाइट जैसे अपशिष्ट को सीमेंट उद्योग और सड़क निर्माण में उपयोग के लिए भेजकर अपशिष्ट प्रबंधन में नवाचार किया है। उदाहरण के लिए, वित्तीय वर्ष 2021 में 89,031 टन जरोसाइट को सीमेंट उद्योग में भेजा गया, और कंपनी का लक्ष्य 2025 तक इसे 1,50,000 टन तक बढ़ाना है। इन पहलों ने न केवल अपशिष्ट को कम किया, बल्कि स्थानीय उद्योगों को भी समर्थन प्रदान किया है।
जैव विविधता संरक्षण और पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली
Hindustan Zinc circular economy mining practices : राजपुरा दरीबा कॉम्प्लेक्स ने जैव विविधता संरक्षण (Biodiversity Conservation) को अपनी सस्टेनेबिलिटी रणनीति का अभिन्न अंग बनाया है। कंपनी ने इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) के साथ तीन साल की साझेदारी शुरू की है, जिसका उद्देश्य नो नेट लॉस (No Net Loss) और महत्वपूर्ण आवासों में नेट पॉजिटिव गेन (NPG) हासिल करना है। इस साझेदारी के तहत, कॉम्प्लेक्स ने अपनी जैव विविधता प्रबंधन योजना (Biodiversity Management Plan) को संशोधित किया है और साइट-विशिष्ट प्रोटोकॉल विकसित किए हैं। कॉम्प्लेक्स में 10 हेक्टेयर भूमि पर एक बायोडायवर्सिटी पार्क विकसित किया गया है, जिसमें 42 विभिन्न प्रजातियों के 50,000 से अधिक पौधे लगाए गए हैं। इस क्षेत्र को पहले आक्रामक प्रजातियों (Invasive Species) ने प्रभावित किया था, लेकिन मृदा संवर्धन (Soil Enrichment) और कंडीशनिंग के बाद इसे एक हरे-भरे क्षेत्र में बदल दिया गया है। यह पार्क स्थानीय और प्रवासी पक्षियों को आकर्षित करता है, जो पास के सिंचाई तालाब पर निर्भर हैं। इसके अतिरिक्त, कंपनी ने मियावाकी प्लांटेशन तकनीक को अपनाकर 2.4 हेक्टेयर भूमि पर 32,500 पौधों की 65 प्रजातियां लगाई हैं, जो कार्बन अवशोषण (Carbon Sequestration) को बढ़ाती हैं और जैव विविधता को समृद्ध करती हैं। कॉम्प्लेक्स ने स्थानीय वन विभाग के साथ मिलकर एक वन्यजीव संरक्षण योजना शुरू की है, जिसमें मोर संरक्षण पार्क, लुप्तप्राय प्रजातियों की नर्सरी, और बटरफ्लाई गार्डन जैसी पहलें शामिल हैं। ये प्रयास न केवल पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली को बढ़ावा देते हैं, बल्कि स्थानीय समुदायों में पर्यावरणीय जागरूकता भी फैलाते हैं।
सामुदायिक और सामाजिक प्रभाव
Hindustan Zinc biodiversity conservation India : राजपुरा दरीबा कॉम्प्लेक्स ने सस्टेनेबिलिटी के साथ-साथ सामुदायिक कल्याण को भी प्राथमिकता दी है। कंपनी की सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) पहलों ने 3,685 गांवों में 1.91 मिलियन से अधिक लोगों के जीवन को प्रभावित किया है। विशेष रूप से, सखी, नंद घर, और शिक्षा संबल जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से 1.39 मिलियन महिलाओं और बच्चों को लाभ हुआ है। इसके अलावा, समाधान और जिंक कौशल जैसे सस्टेनेबल आजीविका कार्यक्रमों ने 0.13 मिलियन लोगों को कौशल प्रदान किया है। कॉम्प्लेक्स ने स्थानीय स्कूलों में TACO क्लब की शुरुआत की है, जो बच्चों में पशु क्रूरता और जैव विविधता संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाता है। यह पहल 2024-25 तक राजस्थान के 100 सरकारी स्कूलों तक विस्तारित की जाएगी।
पुरस्कार और मान्यता
राजपुरा दरीबा कॉम्प्लेक्स की सस्टेनेबल पहलों को कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है:
- CII नेशनल अवॉर्ड फॉर एनवायरनमेंटल बेस्ट प्रैक्टिसेज 2021: बायोडायवर्सिटी पार्क और जरोफिक्स यार्ड रिस्टोरेशन के लिए।
- ग्रीनको सिल्वर रेटिंग: सिंदेसर खुर्द खदान को खनन क्षेत्र में उच्चतम स्कोर के लिए।
- RoSPA सिल्वर अवॉर्ड: RD मिल रिवैंपिंग प्रोजेक्ट के लिए।
- नीति आयोग वॉटर पॉजिटिव सर्टिफिकेशन: जल संरक्षण प्रयासों के लिए।
भविष्य की योजनाएं
हिंदुस्तान जिंक ने अपनी सस्टेनेबिलिटी यात्रा को और मजबूत करने के लिए कई महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए हैं:
- 2025 तक सस्टेनेबिलिटी लक्ष्य: कार्बन उत्सर्जन में कमी, 5 गुना वॉटर पॉजिटिव स्थिति, और अपशिष्ट का 3 गुना लाभकारी उपयोग।
- नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन: रिन्यूएबल एनर्जी पोर्टफोलियो को बढ़ाकर और ऊर्जा-कुशल तकनीकों को अपनाकर।
- जैव विविधता में नो नेट लॉस: IUCN के सहयोग से सभी साइट्स पर जैव विविधता प्रबंधन योजनाओं को लागू करना।
- सर्कुलर इकोनॉमी: अपशिष्ट से मूल्य सृजन और संसाधन दक्षता को बढ़ावा देना।



