
Congress PA spy case : राजस्थान के जैसलमेर जिले में रोजगार कार्यालय के असिस्टेंट ऑडिट ऑफिसर (AAO) शकूर खान की गिरफ्तारी ने सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया है। उन पर पाकिस्तान के लिए जासूसी करने का गंभीर आरोप है। राजस्थान इंटेलिजेंस की गहन पूछताछ में शकूर ने कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं, जिनकी पुष्टि उनके मोबाइल फोन से प्राप्त साक्ष्यों से भी हो चुकी है। जांच में सामने आया है कि शकूर पिछले 15 वर्षों में सात बार पाकिस्तान की यात्रा कर चुका है और वहां कुल 60 दिनों से अधिक समय बिता चुका है। इसके अतिरिक्त, रोजगार कार्यालय से मिली जानकारी ने यह भी खुलासा किया कि शकूर, जो कभी चपरासी के पद पर कार्यरत था, मात्र पांच वर्षों में असिस्टेंट ऑडिट ऑफिसर जैसे महत्वपूर्ण पद तक पहुंच गया। शकूर खान वर्ष 2008 में कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री सालेह मोहम्मद के निजी सहायक (PA) के रूप में भी कार्य कर चुका है। उस समय सालेह मोहम्मद राजस्थान विधानसभा में पोकरण सीट से विधायक थे।
वॉट्सऐप चैट से उजागर हुआ जासूसी का जाल
Shakoor Khan ISI link जांच एजेंसियों को शकूर के मोबाइल फोन से कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। उनके फोन में पाकिस्तानी दूतावास के अधिकारियों के संपर्क नंबर और वॉट्सऐप चैट्स मिले हैं, जो उनकी संदिग्ध गतिविधियों की ओर इशारा करते हैं। इन चैट्स में शकूर ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के संदिग्ध एजेंटों के साथ लगातार बातचीत की थी। कुछ मैसेज में संवेदनशील स्थानों की लोकेशन और महत्वपूर्ण व्यक्तियों के नाम तक साझा किए गए हैं। यह जानकारी भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकती थी। शकूर को 10 जून तक राजस्थान इंटेलिजेंस की रिमांड पर भेजा गया है, ताकि इस मामले की तह तक जाया जा सके।
बार-बार पाकिस्तान यात्रा: पासपोर्ट कार्यालय से मांगी जाएगी जानकारी
Congress aide arrested espionage सूत्रों के अनुसार, शकूर ने अपनी पाकिस्तान यात्राओं के दौरान ISI के एजेंटों से संपर्क स्थापित किया था। इन यात्राओं में वह सामरिक महत्व की सूचनाएं साझा करता था। अब राजस्थान इंटेलिजेंस पासपोर्ट कार्यालय से शकूर की यात्राओं और उनके लिए मिली स्वीकृतियों की जानकारी जुटाएगी। सवाल यह उठता है कि शकूर को बार-बार पाकिस्तान जाने की अनुमति कैसे मिली? क्या इस प्रक्रिया में कोई लापरवाही बरती गई? जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल करेंगी कि शकूर की गतिविधियों पर नजर क्यों नहीं रखी गई।
पाकिस्तानी हाई कमीशन के पूर्व अधिकारी से संपर्क
India Pakistan spy scandal 2025 शकूर का संबंध हरियाणा की एक यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा की तरह भारत में पाकिस्तानी हाई कमीशन के पूर्व अधिकारी एहसान-उर-रहीम उर्फ दानिश से भी सामने आया है। यह खुलासा इस मामले को और जटिल बनाता है, क्योंकि यह संकेत देता है कि शकूर एक बड़े जासूसी नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि शकूर के इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल हो सकते हैं।
जांच के प्रमुख सवाल
Govt officer Congress ISI connection जांच एजेंसियां कई महत्वपूर्ण सवालों पर काम कर रही हैं। शकूर पाकिस्तान में किन लोगों से मिलता था? वहां उसका मूवमेंट किन-किन स्थानों पर था? उसके मोबाइल से प्राप्त नंबरों के आधार पर एजेंसियां संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान करने में जुटी हैं। इसके अलावा, शकूर के बैंक खातों और जैसलमेर में उसकी संपत्तियों की भी गहन जांच की जा रही है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि क्या उसे जासूसी के लिए कोई आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ था।
पांच एजेंसियों ने की गहन पूछताछ
शकूर को 28 मई को हिरासत में लिया गया था और मंगलवार को कोर्ट में पेश करने के बाद उसे 10 जून तक रिमांड पर भेजा गया है। इस अवधि में पांच से अधिक जांच एजेंसियों ने उससे पूछताछ की है। इन पूछताछों में शकूर के परिवार, उसके वित्तीय लेनदेन, और जैसलमेर में उसकी संपत्तियों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। जांच का दायरा बढ़ाते हुए एजेंसियां यह भी जानने की कोशिश कर रही हैं कि शकूर की गतिविधियों को इतने समय तक नजरअंदाज कैसे किया गया।

चपरासी से अफसर तक का सफर: रोजगार कार्यालय से मांगा गया रिकॉर्ड
जांच में यह भी सामने आया है कि शकूर ने अपने करियर की शुरुआत साल 2000 में जैसलमेर रोजगार कार्यालय में चपरासी के रूप में की थी। इसके बाद, मात्र पांच वर्षों में वह असिस्टेंट ऑडिट ऑफिसर जैसे महत्वपूर्ण पद पर पहुंच गया। जांच एजेंसियों ने रोजगार कार्यालय से शकूर की भर्ती, प्रमोशन, और विदेश यात्राओं से संबंधित सभी रिकॉर्ड मांगे हैं। यह भी जांच का विषय है कि शकूर को बार-बार विदेश यात्रा की स्वीकृति किस आधार पर दी गई और उसके रिपोर्टिंग अधिकारी कौन थे। इसके अतिरिक्त, यह भी पूछा जा रहा है कि शकूर कांग्रेस नेता का पर्सनल असिस्टेंट (PA) कैसे बना और इसकी स्वीकृति किसने दी।
आगे की जांच और सुरक्षा पर प्रभाव
शकूर खान का मामला भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती पेश करता है। यह मामला न केवल व्यक्तिगत स्तर पर लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि सरकारी कार्यालयों में नियुक्ति और निगरानी प्रक्रिया पर भी सवाल उठाता है। जांच एजेंसियां इस मामले को गहराई से खंगाल रही हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। शकूर की गतिविधियों से जुड़े सभी तथ्यों को उजागर करने के लिए पासपोर्ट कार्यालय, रोजगार विभाग, और अन्य संबंधित संस्थानों से सहयोग लिया जा रहा है।
यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक चेतावनी है कि संवेदनशील पदों पर नियुक्त व्यक्तियों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने की आवश्यकता है। शकूर के खुलासों ने जांच एजेंसियों को और सतर्क कर दिया है, और आने वाले दिनों में इस मामले में और भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।
