
Ganga Dussehra : उदयपुर के ढिकली गांव के सामुदायिक भवन में जय राजपूताना संघ ने गंगा दशहरा के पावन अवसर पर शस्त्र, अश्व और शमी पूजन का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में संघ के सदस्यों ने प्राचीन परंपराओं को पुनर्जनन देने के उद्देश्य से इस त्योहार को पूरे उत्साह के साथ मनाया। जय राजपूताना संघ ने इस मौके पर वाल्मीकि रामायण के ज्योतिषीय गणनाओं और ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए बताया कि रावण वध की घटना ज्येष्ठ माह में हुई थी, न कि विजयादशमी के दिन, जैसा कि आमतौर पर माना जाता है।
संघ के सदस्यों ने बताया कि जब मुगलों ने भारत पर आक्रमण किया, उस दौरान संत तुलसीदास ने भाव-विभोर होकर रामचरितमानस की रचना की। इसके बाद नवरात्रि के दौरान रामलीला का आयोजन शुरू हुआ, जिसमें नौ दिनों तक रामायण के विभिन्न प्रसंगों का मंचन किया जाता है और दसवें दिन रावण वध की घटना को दर्शाया जाता है। इस परंपरा के चलते यह मान लिया गया कि रावण का वध विजयादशमी के दिन हुआ था। हालांकि, धार्मिक और ऐतिहासिक ग्रंथों में कहीं भी इस बात का उल्लेख नहीं मिलता कि रावण वध विजयादशमी को हुआ था।
जय राजपूताना संघ के अनुसार, रामलीला के इस स्वरूप ने रावण वध की तिथि को लेकर एक नई परंपरा तो शुरू कर दी, लेकिन इससे असली इतिहास धुंधला पड़ गया। इसके साथ ही कई प्राचीन परंपराएं भी धीरे-धीरे विलुप्त हो गईं। संघ ने इस बात पर जोर दिया कि वाल्मीकि रामायण और अन्य ग्रंथों में गंगा दशहरा के दिन क्षत्रियों द्वारा शस्त्र, अश्व और शमी पूजन की परंपरा का स्पष्ट उल्लेख है।

गंगा दशहरा: क्षत्रियों का प्राचीन त्योहार

Shastra Poojan event संघ ने इस अवसर पर बताया कि गंगा दशहरा प्राचीन काल से ही क्षत्रियों का एक परंपरागत त्योहार रहा है। रामायण में भगवान राम, उनके गुरु और पिता राजा दशरथ द्वारा इस दिन शस्त्र और अश्व पूजन का उल्लेख मिलता है। इसी तरह, महाभारत में भी कई स्थानों पर क्षत्रियों द्वारा इस तिथि पर शस्त्र, अश्व और शमी पूजन की घटनाओं का वर्णन है। जय राजपूताना संघ का मानना है कि यह परंपरा क्षत्रिय समुदाय की शौर्य और साहस की भावना को दर्शाती है, और इसे पुनर्जनन करने की आवश्यकता है।
खोई परंपरा को पुनर्जनन
Traditional weapon worship on Ganga Dussehra जय राजपूताना संघ पिछले पांच वर्षों से गंगा दशहरा के इस प्राचीन त्योहार को अलग-अलग स्थानों पर मनाकर इस विलुप्त हो चुकी परंपरा को फिर से जीवंत करने का प्रयास कर रहा है। संघ के सदस्यों का कहना है कि इस तरह के आयोजनों से न केवल प्राचीन परंपराओं को पुनर्जनन मिलेगा, बल्कि युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से जोड़ने का अवसर भी प्राप्त होगा। इस वर्ष ढिकली गांव में आयोजित यह कार्यक्रम भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
आयोजन में उपस्थित रहे प्रमुख लोग

Ganga Dussehra celebration : इस आयोजन में जय राजपूताना संघ के कई प्रमुख सदस्य शामिल हुए। इनमें राम सिंह (सुंदरपुरा), अमर सिंह (झालो का गुड़ा), शक्ति सिंह राणावत (रावला कुआ), श्याम सिंह राठौड़ (बामनियावेर), भूपेंद्र सिंह देवड़ा (मेड़ता), पुष्पेंद्र सिंह (धनेला), नारायण सिंह (मियारी), भरतपाल सिंह सोनगरा (जीरन), करणपाल सिंह (कुरड़ा), गणपत सिंह (पालवास), भरत सिंह (मेड़ता), देवेंद्र सिंह (लियो का गुड़ा), दशरथ सिंह चुण्डावत (वांगरोड़ा), और ललित सिंह (मादड़ी) उपस्थित रहे।
आयोजन में ढिकली गांव के कई गणमान्य लोग भी शामिल हुए। इनमें भंवर सिंह, वीर सिंह, विशाल सिंह, राम सिंह, प्रताप सिंह, राजनाथ सिंह, हर्षवर्धन सिंह, हिमांशु सिंह, खुशराज सिंह, राजेंद्र सिंह, रेवत सिंह, मदन सिंह, मोहन सिंह, प्रेम सिंह, चंदन सिंह, भूपेंद्र सिंह, गोपाल सिंह, उदय सिंह, जोरावर सिंह, भरत सिंह, राहुल सिंह, वीरेंद्र सिंह, वाग सिंह, शक्ति सिंह, गोविंद सिंह, सूर्यवीर सिंह, अजित सिंह, कृष्ण सिंह, भगवत सिंह, डूंगर सिंह, ललित सिंह, नरेंद्र सिंह, और रणवीर सिंह आदि ने भाग लिया।



