
Rolsahabsar passed away : क्षत्रिय युवक संघ के प्रख्यात संरक्षक श्री भगवान सिंह रोलसाहबसर का गुरुवार देर रात जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) हॉस्पिटल में निधन हो गया। लंबे समय से अस्वस्थ होने के कारण वे हॉस्पिटल में भर्ती थे और उनकी किडनी सहित अन्य महत्वपूर्ण अंगों की कमजोरी के चलते उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। आखिरकार, उन्होंने रात के समय अपनी अंतिम सांस ली। इस दुखद समाचार ने न केवल क्षत्रिय समाज, बल्कि पूरे मालानी क्षेत्र और राजस्थान में शोक की लहर फैला दी है। उनकी पार्थिव देह को अंतिम दर्शन के लिए जयपुर के संघ शक्ति भवन में रखा गया है, और आज दोपहर 3 बजे जयपुर में ही उनका अंतिम संस्कार पूरे सम्मान और रीति-रिवाज के साथ संपन्न होगा।
प्रारंभिक जीवन और सामाजिक योगदान
Bhagwan Singh Rolsabsar Biography : भगवान सिंह रोलसाहबसर का जन्म 2 फरवरी, 1944 को सीकर जिले के रोलसाहबसर गांव में हुआ था। वे अपने माता-पिता, मेघ सिंह और गोम कंवर की पांचवीं संतान थे। उनका जीवन समाज सेवा, युवाओं में नैतिकता, अनुशासन, और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना जागृत करने के लिए समर्पित रहा। बाड़मेर के गेहूं रोड पर स्थित ग्राम्य आलोकायन आश्रम उनका निवास और उनके सामाजिक कार्यों का केंद्र रहा। इस आश्रम में नियमित रूप से शिविर आयोजित किए जाते थे, जहां युवाओं को संस्कार, धैर्य, कर्तव्यनिष्ठा, और देशभक्ति जैसे मूल्यों का पाठ पढ़ाया जाता था।
रोलसाहबसर ने 1963 में रतनगढ़ में आयोजित सात दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में भाग लेने के बाद क्षत्रिय युवक संघ के साथ अपने कार्य की शुरुआत की। इस शिविर ने उनके जीवन को एक नई दिशा दी, और वे संगठन के एक समर्पित स्वयंसेवक बन गए। बाद में, उन्होंने राजपूत छात्रावास की शाखा का दायित्व भी संभाला और अक्टूबर 1989 में क्षत्रिय युवक संघ के प्रमुख के रूप में नेतृत्व की बागडोर संभाली। अपने कार्यकाल में उन्होंने लगभग 500 शिविरों में सक्रिय भागीदारी की और संगठन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनके नेतृत्व में आयोजित इन शिविरों ने हजारों युवाओं को नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाया।
उनका विवाह सिवाना के ठाकुर तेज सिंह की पुत्री के साथ हुआ था। उन्होंने हमेशा राजनीति से दूरी बनाए रखी और समाज के उत्थान और विकास के लिए अथक प्रयास किए। उनके आश्रम में आयोजित शिविरों में कई प्रमुख हस्तियां, जैसे केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और कांग्रेस नेता सचिन पायलट, समय-समय पर शामिल हुए, जो उनके कार्यों की व्यापकता और प्रभाव को दर्शाता है।
शोक संदेश और श्रद्धांजलि
भगवान सिंह रोलसाहबसर के निधन की खबर से क्षत्रिय समाज सहित पूरे राजस्थान में गहरा शोक व्याप्त है। राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने संघ शक्ति कार्यालय पहुंचकर उनकी पार्थिव देह के अंतिम दर्शन किए और भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके इस कदम ने रोलसाहबसर के प्रति उनके सम्मान और उनके सामाजिक योगदान की महत्ता को रेखांकित किया।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने शोक संदेश में कहा, “क्षत्रिय युवक संघ के संरक्षक श्री भगवान सिंह जी रोलसाहबसर के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। मेरी संवेदनाएं उनके शोकाकुल परिजनों और अनुयायियों के साथ हैं। ईश्वर उनकी आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें और परिवार को यह अपार दुख सहन करने की शक्ति दें। ॐ शांति।”
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा, “श्री भगवान सिंह जी रोलसाहबसर के निधन से राजस्थान ने एक समर्पित समाजसेवी खो दिया। उनका सादगी भरा जीवन और समाज के प्रति उनका योगदान हमेशा प्रेरणादायी रहेगा। मैं उनके स्नेह और सादगी से व्यक्तिगत रूप से प्रभावित रहा हूं। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें। ॐ शांति।”
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने अपने संदेश में कहा, “क्षत्रिय युवक संघ के संरक्षक भगवान सिंह रोलसाहबसर जी के निधन की खबर अत्यंत दुखद है। उनके परिवार और अनुयायियों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति और परिवार को संबल प्रदान करें।”
कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा, “श्री भगवान सिंह रोलसाहबसर जी के निधन से समाज ने एक महान व्यक्तित्व खो दिया। उनका समाज के प्रति समर्पण और कार्य हमेशा स्मरणीय रहेंगे। मैं प्रभु से प्रार्थना करता हूं कि उनकी आत्मा को शांति मिले और परिवार को इस दुखद घड़ी में हिम्मत मिले। ॐ शांति।”
समाज पर प्रभाव और उनकी विरासत
राजेंद्र सिंह भियाड़ ने बताया कि भगवान सिंह रोलसाहबसर का व्यक्तित्व प्रेरणादायी और अनुकरणीय था। वे न केवल एक संगठनकर्ता थे, बल्कि समाज के लिए एक मार्गदर्शक और प्रेरणा स्रोत भी थे। उनके द्वारा स्थापित ग्राम्य आलोकायन आश्रम और क्षत्रिय युवक संघ के माध्यम से किए गए कार्य समाज में एक अमिट छाप छोड़ गए हैं। उनके द्वारा रोपे गए संस्कार और मूल्य आज भी युवाओं को दिशा दिखा रहे हैं। उनके निधन से उत्पन्न शून्य को भरना असंभव है, लेकिन उनकी शिक्षाएं और कार्य हमेशा जीवित रहेंगे।
भगवान सिंह रोलसाहबसर का निधन क्षत्रिय युवक संघ और पूरे राजस्थान के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनके सामाजिक योगदान, विशेष रूप से युवाओं में नैतिकता और देशप्रेम की भावना जागृत करने के उनके प्रयास, समाज में हमेशा याद किए जाएंगे। उनके अनुयायी और शुभचिंतक उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि उनकी विरासत जीवित रहे।
