
rpower share : एक समय दिवालिया घोषित हो चुके अनिल अंबानी अब एक बार फिर से चर्चा में हैं। उनकी दो प्रमुख कंपनियां, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर (Reliance Infrastructure) और रिलायंस पावर (Reliance Power), शेयर बाजार में शानदार प्रदर्शन कर रही हैं। इसके साथ ही बड़े सरकारी अनुबंध (Government Contracts) और महत्वपूर्ण कानूनी जीत ने उनकी वापसी की राह को आसान बनाया है। रक्षा क्षेत्र (Defence Sector) से लेकर हरित ऊर्जा (Green Energy) तक, अनिल अंबानी की कंपनियां अब नए जोश के साथ मैदान में उतर रही हैं, जिससे रिलायंस समूह (Reliance Group) की साख फिर से मजबूत होने के संकेत मिल रहे हैं।
शेयर बाजार में चमक
reliance infrastructure share : रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने पिछले एक साल में 105% का जबरदस्त रिटर्न दिया है, जिसमें पिछले एक महीने में ही 61% की उछाल देखने को मिली है। इसके अलावा, पिछले पांच कारोबारी सत्रों में भी इसने 11% की बढ़त हासिल की है। निवेशकों का भरोसा बढ़ने की एक बड़ी वजह कानूनी राहत भी रही है। नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के दिवालिया आदेश को निलंबित कर दिया, जिससे कंपनी पर लंबे समय से चला आ रहा दबाव कम हुआ है।
इसके अलावा, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने रक्षा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। कंपनी भारत की पहली निजी कंपनी बन गई है, जिसने एक पूर्ण विमान उन्नयन कार्यक्रम (Aircraft Upgrade Programme) को स्वतंत्र रूप से संभाला है। इस परियोजना का मूल्य 5,000 करोड़ रुपये है और यह अगले 7 से 10 सालों में कंपनी के लिए एक स्थिर आय का स्रोत बनने की उम्मीद है। यह कदम न केवल रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर को रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में एक मजबूत खिलाड़ी बनाता है, बल्कि कंपनी की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता को भी सुनिश्चित करता है।
दूसरी ओर, रिलायंस पावर (RPower) भी पीछे नहीं है। इस कंपनी के शेयर में पिछले एक महीने में 63% से अधिक की वृद्धि हुई है, और यह 2018 के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। इस तेजी का सबसे बड़ा कारण एक बड़ा सौदा है, जिसमें इसकी सहायक कंपनी रिलायंस एनयू सनटेक (Reliance NU Suntech) ने सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) के साथ 25 साल का पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) साइन किया है। यह अनुबंध 930 मेगावाट (MW) सोलर पावर प्रोजेक्ट और 465 मेगावाट/1,860 मेगावाट-घंटा बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) से जुड़ा है। यह एशिया का सबसे बड़ा ऐसा एकीकृत प्रोजेक्ट है, जिसमें अगले दो सालों में 10,000 करोड़ रुपये का निवेश होगा।anil ambani
रिलायंस पावर को एक और कानूनी राहत भी मिली है। दिल्ली हाई कोर्ट ने SECI द्वारा कंपनी और इसकी सहायक कंपनियों पर लगाए गए तीन साल के प्रतिबंध को स्थगित कर दिया, जिसके बाद कंपनी फिर से सरकारी निविदाओं (Government Tenders) में हिस्सा ले सकती है। इसके अलावा, मई 2025 में रिलायंस पावर ने प्रेफरेंशियल शेयर प्लेसमेंट के जरिए 348.15 करोड़ रुपये जुटाए, जिससे इसकी वित्तीय स्थिति और मजबूत हुई है और बाजार में निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।
अरबपति से दिवालिया, और अब वापसी की राह पर?
r power share : अनिल अंबानी, जो कभी दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शुमार थे, ने पिछले एक दशक में भारी उतार-चढ़ाव देखे हैं। बढ़ते कर्ज, कानूनी उलझनें और कारोबारी असफलताओं ने उनके साम्राज्य को हिलाकर रख दिया था। साल 2020 में तो उन्होंने एक यूके कोर्ट में यह तक कह दिया था कि उनकी नेट वर्थ जीरो (Zero Net Worth) हो गई है। लेकिन अब रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस पावर की हालिया सफलताएं उनके लिए एक नई उम्मीद की किरण लेकर आई हैं। anil ambani stocks
इन दोनों कंपनियों की रणनीति में बदलाव साफ दिखाई दे रहा है। जहां रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में अपनी पैठ बना रही है, वहीं रिलायंस पावर हरित ऊर्जा के क्षेत्र में बड़े कदम उठा रही है। इसके साथ ही कानूनी जीत और सरकारी अनुबंधों ने इन कंपनियों को फिर से मजबूत स्थिति में ला दिया है। मई 2025 में रिलायंस पावर ने भूटान में 2,000 करोड़ रुपये की लागत से 500 मेगावाट का सोलर प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए ड्रुक होल्डिंग एंड इन्वेस्टमेंट्स (DHI) के साथ एक संयुक्त उद्यम (Joint Venture) की घोषणा की थी, जो भूटान में निजी क्षेत्र का सबसे बड़ा विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) है।
भविष्य की संभावनाएं और चुनौतियां
reliance power हालांकि यह कहना जल्दबाजी होगी कि अनिल अंबानी पूरी तरह से अपनी पुरानी स्थिति हासिल कर लेंगे, लेकिन बाजार में उनकी कंपनियों के प्रति बढ़ता भरोसा एक सकारात्मक संकेत है। रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस पावर की सफलता न केवल अनिल अंबानी के लिए, बल्कि उनके निवेशकों और रिलायंस समूह से जुड़े हजारों कर्मचारियों के लिए भी राहत की खबर है।
अनिल अंबानी के बेटे जय अनमोल और जय अंशुल भी इस वापसी में अहम भूमिका निभा रहे हैं। उनकी कारोबारी समझ और रणनीतिक दृष्टिकोण ने रिलायंस समूह को नई दिशा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह गति बनी रही, तो अनिल अंबानी एक बार फिर से भारत के बड़े कारोबारी दिग्गजों में अपनी जगह बना सकते हैं। लेकिन चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। रिलायंस समूह की कुछ अन्य कंपनियां अभी भी कर्ज के बोझ तले दबी हैं, और बाजार की अस्थिरता भी एक जोखिम बनी हुई है।
फिलहाल, अनिल अंबानी के लिए यह एक नई शुरुआत का समय है। रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस पावर की सफलता ने उन्हें फिर से सुर्खियों में ला दिया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वह इस मौके का फायदा उठाकर अपने कारोबारी साम्राज्य को फिर से उसी ऊंचाई पर ले जा पाएंगे, जहां वह कभी थे।



