
Acharya Bhikshu 300th birth anniversary : जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के प्रणेता आचार्यश्री भिक्षु के 300वें जन्मदिवस को भिक्षु चेतना वर्ष के रूप में मनाने का भव्य शुभारंभ 11 जुलाई 2025 को अहमदाबाद के कोबा में स्थित प्रेक्षा विश्व भारती में हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर तेरापंथ धर्मसंघ के 11वें आचार्य महाश्रमण की मंगल सन्निधि में एक आध्यात्मिक और उत्साहपूर्ण समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में भारत सरकार के कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने शिरकत की। यह आयोजन न केवल तेरापंथ धर्मसंघ के लिए, बल्कि समस्त जैन समुदाय और आध्यात्मिक अनुयायियों के लिए एक गौरवमयी क्षण था। आचार्यश्री भिक्षु की शिक्षाओं और उनके द्वारा स्थापित अनुशासन को याद करते हुए यह वर्ष आध्यात्मिक विकास और सद्ज्ञान को समर्पित होगा।
प्रेक्षा विश्व भारती परिसर में सुबह 9 बजे जैसे ही आचार्यश्री महाश्रमण वीर भिक्षु समवसरण मंच पर विराजमान हुए, पूरा वातावरण भक्तिमय जयघोष से गूंज उठा। मंच पर एक ओर साधु समाज, दूसरी ओर साध्वी समाज और समणश्रेणी की पवित्र उपस्थिति रही। तेरापंथ धर्मसंघ के कार्यकर्ता राजकुमार दक ने बताया कि यह समारोह आचार्यश्री भिक्षु जन्म त्रिशताब्दी वर्ष के शुभारंभ का प्रतीक था, जिसे भिक्षु चेतना वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इस अवसर पर चतुर्विध धर्मसंघ ने एकजुट होकर आचार्यश्री के नेतृत्व में इस ऐतिहासिक पल को उत्सव के रूप में उत्साहपूर्वक मनाया। आचार्य महाश्रमण ने अपने मंगल महामंत्रोच्चार के साथ समारोह की शुरुआत की। उन्होंने चतुर्विध धर्मसंघ को ऊँ भिक्षु-जय भिक्षु का सामूहिक जाप करवाया। तेरापंथ धर्मसंघ के चतुर्थ आचार्य श्रीमज्जयाचार्यजी द्वारा रचित भक्ति भरे गीत ‘भिक्षु म्हारा प्रकट्या जी’ को मुनि ध्रुव कुमार और मुनि नम्रकुमार ने मधुर स्वर में प्रस्तुत किया, जिसने श्रोताओं के हृदय को भावविभोर कर दिया। तेरापंथ की नवीं साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभा ने अपने उद्बोधन में आचार्य भिक्षु के 300वें जन्मदिवस को बोधि दिवस के रूप में मनाने की प्रेरणा दी और उनके जीवन, गुणों, और योगदान का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि आचार्य भिक्षु की शिक्षाएं आज भी तेरापंथ धर्मसंघ के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
आचार्य महाश्रमण का संबोधन
Bhikshu Chetna Year inauguration 2025 : आचार्य महाश्रमण ने मंच से उतरकर खड़े होकर अपना संबोधन शुरू किया। इस दौरान चतुर्विध धर्मसंघ और मंच पर उपस्थित कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल सहित सभी श्रद्धालु अपने गुरु के सम्मान में खड़े हो गए। आचार्य ने अपनी अमृतवाणी में कहा, “आज तेरापंथ धर्मसंघ के संस्थापक, परम पूजनीय आचार्य भिक्षु का 300वां जन्मदिवस है, जिसे हम बोधि दिवस के रूप में भी मनाते हैं। यह जन्म त्रिशताब्दी वर्ष का शुभारंभ है। मैं इस पावन अवसर पर आचार्यश्री भिक्षु जन्म त्रिशताब्दी वर्ष की औपचारिक घोषणा करता हूं।” उनकी इस घोषणा के साथ ही पूरा परिसर जयघोष और उत्साह से गूंज उठा। आचार्य ने आचार्य भिक्षु के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा, “लगभग 299 वर्ष पहले मारवाड़ की पवित्र भूमि पर, कंटालिया गांव में एक बालक का जन्म हुआ, जो आगे चलकर आचार्य भिक्षु के रूप में विश्वविख्यात हुए। उनके पूर्वजन्म के पुण्य और तपस्या ने उन्हें इस महान कार्य के लिए तैयार किया। गृहस्थ जीवन छोड़कर उन्होंने युवावस्था में साधु दीक्षा स्वीकार की और जैन श्वेताम्बर की अमूर्तिपूजक परंपरा को मजबूत किया। उनकी बुद्धि, ज्ञान, और आचार निष्ठा ने तेरापंथ धर्मसंघ की नींव रखी। उनकी शिक्षाएं आज भी हमें सद्ज्ञान, सदाचार, और अनुशासन की प्रेरणा देती हैं।”
आचार्यश्री ने एक नया उद्घोष दिया: “दृढ़ निष्ठा से करें प्रयास, हो सद्ज्ञान चरित्र विकास।” इस उद्घोष को चतुर्विध धर्मसंघ ने जोर-शोर से दोहराया, जिससे प्रेक्षा विश्व भारती का वातावरण और भी आध्यात्मिक हो गया। आचार्यश्री ने यह भी बताया कि वह स्वयं कंटालिया होकर आए हैं और चतुर्मास के बाद वहां 13 रातों का प्रवास करेंगे। उन्होंने आचार्य भिक्षु की मर्यादाओं और अनुशासनों को अपनाने का आह्वान किया, जो आज भी तेरापंथ धर्मसंघ की रीढ़ हैं।
आचार्य का स्वरचित गीत

Terapanth Acharya Mahashraman speech : आचार्य महाश्रमण ने इस अवसर पर अपना स्वरचित गीत ‘सुगुरु को वंदन बारम्बार’ प्रस्तुत किया, जिसे चतुर्विध धर्मसंघ ने सामूहिक रूप से गाया। इस गीत ने समारोह में भक्ति और श्रद्धा का रंग घोल दिया। आचार्य ने जन्म त्रिशताब्दी वर्ष के लिए योजनाबद्ध कार्यक्रमों की रूपरेखा भी प्रस्तुत की, जिसमें ध्यान साधना, जैन दर्शन का प्रचार, और सामाजिक कल्याण के कार्य शामिल हैं। उन्होंने आह्वान किया कि यह वर्ष सभी के लिए आध्यात्मिक उन्नति और सद्ज्ञान का वर्ष बने।
अर्जुनराम मेघवाल का उद्बोधन

Terapanth Dharma Sangh 300th celebration : भारत सरकार के कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने समारोह में अपने संबोधन में उन्होंने कहा, “मैं परम पूज्य आचार्य महाश्रमण को सादर वंदन करता हूं। आचार्यश्री भिक्षु ने तेरापंथ धर्मसंघ की स्थापना कर एक नया इतिहास रचा। उनके पूर्वजन्म के पुण्य और तपस्या ने उन्हें इस महान कार्य के लिए प्रेरित किया। इस पवित्र अवसर पर मुझे संबोधित करने का मौका देने के लिए मैं आभार व्यक्त करता हूं।”
मेघवाल ने आचार्यश्री के स्वरचित गीत की प्रशंसा करते हुए कहा, “मैं इस गीत को संस्कृति मंत्रालय की पत्रिकाओं में प्रकाशित करवाने का प्रयास करूंगा। साथ ही, बीकानेर में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर इस गीत को सामूहिक रूप से गाने की योजना बनाऊंगा।” उन्होंने जैन विश्व भारती इंस्टीट्यूट के कुलाधिपति के रूप में अपनी भूमिका का उल्लेख करते हुए तेरापंथ धर्मसंघ के प्रति अपनी गहरी निष्ठा जताई। मेघवाल ने अणुव्रत आंदोलन से अपने जुड़ाव को भी रेखांकित किया, जो तेरापंथ की एक महत्वपूर्ण पहल है।
प्रधानमंत्री का शुभकामना संदेश

इस अवसर पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक शुभकामना पत्र प्राप्त हुआ, जिसका वाचन मुख्यमुनि महावीरकुमार ने किया। पत्र में प्रधानमंत्री ने आचार्यश्री भिक्षु के योगदान की सराहना की और उनके 300वें जन्मदिवस पर तेरापंथ धर्मसंघ को बधाई दी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह जन्म त्रिशताब्दी वर्ष समाज में अहिंसा, सत्य, और आध्यात्मिकता के प्रसार को और मजबूत करेगा।

पुस्तकों का लोकार्पण
समारोह में जैन विश्व भारती के पदाधिकारियों द्वारा आचार्य भिक्षु की शिक्षाओं पर आधारित कुछ पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। इन पुस्तकों को अर्जुनराम मेघवाल ने आचार्य महाश्रमण के करकमलों में अर्पित किया। आचार्य ने इस अवसर पर पुस्तकों के महत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि ये रचनाएं आचार्य भिक्षु के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति

समारोह में जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के अध्यक्ष मनसुखलाल सेठिया, अहमदाबाद चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति के स्वागताध्यक्ष गौतम बाफना, अध्यक्ष अरविंद संचेती, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनुज पंकजभाई मोदी, और मनीष बरड़िया ने अपनी आस्थापूर्ण अभिव्यक्ति दी। कंटालिया तेरापंथ समाज की ओर से गौतम सेठिया ने आचार्य भिक्षु के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की और एक भक्ति गीत प्रस्तुत किया। अहमदाबाद तेरापंथ समाज ने भी सामूहिक रूप से गीत गाकर समारोह को और भव्य बनाया।
आचार्यश्री भिक्षु का परिचय
Acharya Bhikshu biography : आचार्यश्री भिक्षु का जन्म 1726 में राजस्थान के कंटालिया गांव में हुआ था। उन्होंने अपने जीवन में जैन धर्म की अमूर्तिपूजक परंपरा को मजबूत करने के लिए तेरापंथ धर्मसंघ की स्थापना की। उनकी आचार निष्ठा, बुद्धि, और ज्ञान ने उन्हें एक क्रांतिकारी संत के रूप में स्थापित किया। उन्होंने सत्य, अहिंसा, और अनुशासन पर आधारित एक ऐसी व्यवस्था बनाई, जो आज भी तेरापंथ धर्मसंघ का आधार है। आचार्यश्री ने गृहस्थ जीवन त्यागकर साधु जीवन अपनाया और अपनी तपस्या और बुद्धिमत्ता के बल पर जैन धर्म में एक नया अध्याय जोड़ा। आचार्यश्री महाश्रमण ने बताया कि आचार्य भिक्षु की द्विशताब्दी का आयोजन भी अहमदाबाद में ही आचार्यश्री महाप्रज्ञ के समय में हुआ था। इस बार त्रिशताब्दी का आयोजन और भी भव्य और प्रेरणादायी होगा। आचार्यश्री ने आह्वान किया कि यह वर्ष सद्ज्ञान, सदाचार, और आध्यात्मिक साधना का वर्ष बने।
भिक्षु चेतना वर्ष: योजनाएं और उद्देश्य
आचार्यश्री भिक्षु जन्म त्रिशताब्दी वर्ष को भिक्षु चेतना वर्ष के रूप में मनाने के लिए कई कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई है। इनमें शामिल हैं:
- ध्यान साधना शिविर: देशभर में प्रेक्षा ध्यान और योग के शिविर आयोजित किए जाएंगे।
- जैन दर्शन का प्रचार: आचार्य भिक्षु के विचारों को पुस्तकों, सेमिनार, और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए जन-जन तक पहुंचाया जाएगा।
- सामाजिक कल्याण: अणुव्रत आंदोलन के तहत नैतिकता और सामाजिक सुधार के कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
- कंटालिया प्रवास: आचार्यश्री महाश्रमण कंटालिया में 13 रातों का प्रवास करेंगे, जहां आचार्य भिक्षु का जन्म हुआ था।



