
Kanhaiya Lal Murder Case Movie : राजस्थान के उदयपुर में हुए कन्हैयालाल तेली हत्याकांड पर आधारित फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ की रिलीज पर दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने के बाद, कन्हैयालाल की पत्नी जशोदा तेली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक मार्मिक पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई है। जशोदा ने अपने पत्र में लिखा कि यह फिल्म उनके पति की निर्मम हत्या की सच्ची कहानी को दर्शाती है और इसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है। उन्होंने मुस्लिम संगठनों और उनके वकील कपिल सिब्बल पर कोर्ट के जरिए फिल्म को रुकवाने का आरोप लगाया। जशोदा ने कहा कि तीन साल पहले उनके पति को क्रूरता से मार दिया गया, और अब सच्चाई को सामने लाने वाली इस फिल्म को भी रोकने की कोशिश हो रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री से फिल्म की रिलीज की अनुमति देने और उनके दोनों बच्चों के साथ मुलाकात का समय देने की अपील की है।
जशोदा का पत्र: सच्चाई को दुनिया तक पहुंचाने की मांग
Jashoda Teli letter to PM Modi : जशोदा ने अपने पत्र में गहरे दर्द के साथ लिखा, “मेरे पति कन्हैयालाल को तीन साल पहले बेरहमी से मार दिया गया। ‘उदयपुर फाइल्स’ फिल्म उनकी हत्या की सच्ची कहानी को सामने लाती है। मैंने स्वयं यह फिल्म देखी है, और इसमें कुछ भी गलत नहीं है। यह केवल उस अन्याय को दिखाती है, जो हमारे परिवार के साथ हुआ। फिर भी, कुछ मुस्लिम संगठन और उनके वकील कपिल सिब्बल ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इसकी रिलीज पर रोक लगवा दी।”
उन्होंने आगे लिखा, “मेरे बच्चे मुझे बता रहे हैं कि अब इस फिल्म की रिलीज का फैसला मोदी सरकार को करना है। आप तो जानते हैं कि हमारे साथ कितना बड़ा अन्याय हुआ है। जिन लोगों ने मेरे पति की हत्या की, वही अब कोर्ट में जाकर सच्चाई को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। मैं आपसे विनती करती हूं कि इस फिल्म को रिलीज करने की अनुमति दें, ताकि दुनिया को सच्चाई का पता चल सके।” जशोदा ने अपने दोनों बच्चों के साथ प्रधानमंत्री से मिलने का समय मांगते हुए कहा कि वे अपने दुख और इस मामले की पूरी सच्चाई को उनके सामने रखना चाहते हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट ने क्यों लगाई रोक?
Udaipur Files Movie Release Date : दो दिन पहले, 10 जुलाई 2025 को, दिल्ली हाईकोर्ट ने ‘उदयपुर फाइल्स’ की रिलीज पर अंतरिम रोक लगा दी। चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस अनीश दयाल की बेंच ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी और अन्य याचिकाकर्ताओं की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि यह फिल्म मुस्लिम समुदाय को बदनाम करती है और सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने का खतरा पैदा कर सकती है।
कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 की धारा 6 के तहत अपनी पुनरीक्षण शक्तियों का उपयोग करते हुए याचिकाकर्ताओं की शिकायतों पर एक सप्ताह के भीतर फैसला ले। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक केंद्र सरकार इस मामले में अंतिम निर्णय नहीं लेती, तब तक फिल्म की रिलीज पर रोक बरकरार रहेगी। इसके साथ ही, कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को दो दिनों के भीतर केंद्र सरकार के समक्ष अपनी आपत्तियां दर्ज करने का निर्देश दिया। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, जो जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से पैरवी कर रहे हैं, ने कोर्ट में दलील दी कि फिल्म का ट्रेलर और सामग्री नफरत भड़काने वाली है। उन्होंने कहा कि फिल्म में नुपुर शर्मा के विवादित बयानों को शब्दशः शामिल किया गया है, जिसके कारण 2022 में सांप्रदायिक तनाव बढ़ा था। सिब्बल ने इसे “सिनेमाई विनाश” करार देते हुए कहा कि यह फिल्म एक समुदाय को बदनाम करने का प्रयास करती है। दूसरी ओर, केंद्र सरकार और सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने दावा किया कि फिल्म में 55 कट्स किए गए हैं और यह केवल कन्हैयालाल हत्याकांड पर आधारित है, न कि किसी समुदाय को लक्षित करती है।
कन्हैयालाल के बेटे का दर्द: न्याय में देरी क्यों?
Why was Udaipur Files banned? फिल्म पर रोक के बाद, कन्हैयालाल के बड़े बेटे यश तेली ने अपनी निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा, “यह आश्चर्यजनक है कि ‘उदयपुर फाइल्स’ जैसी फिल्म पर रोक लगाने के लिए कोर्ट में इतनी जल्दी सुनवाई हो जाती है, लेकिन मेरे पिता के हत्यारों को सजा देने का मामला तीन साल से पेंडिंग है। आखिर हमें न्याय कब मिलेगा?” यश ने फिल्म को समर्थन देते हुए कहा कि यह उनके पिता के साथ हुए अन्याय को दुनिया के सामने लाने का एक माध्यम है। उन्होंने इसे मुक्त अभिव्यक्ति का हिस्सा बताते हुए रोक को अनुचित ठहराया।
कन्हैयालाल हत्याकांड: क्या थी घटना?
Udaipur Files controversy explained : 28 जून 2022 को उदयपुर के मालदास स्ट्रीट पर कन्हैयालाल तेली, एक दर्जी, की उनकी दुकान में मोहम्मद रियाज अत्तारी और गौस मोहम्मद ने गला काटकर निर्मम हत्या कर दी थी। हत्यारों ने इस जघन्य अपराध को कैमरे में रिकॉर्ड किया और वीडियो ऑनलाइन शेयर कर दावा किया कि यह हत्या नुपुर शर्मा के समर्थन में कन्हैयालाल द्वारा किए गए एक सोशल मीडिया पोस्ट के जवाब में की गई। इस घटना ने पूरे देश में सनसनी मचा दी थी और सांप्रदायिक तनाव को बढ़ाने का कारण बनी थी। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ली और पाकिस्तान के कराची निवासी सलमान और अबू इब्राहिम को फरार घोषित करते हुए कुल 11 आरोपियों के खिलाफ अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट (UAPA), आर्म्स एक्ट, और भारतीय दंड संहिता के तहत चार्जशीट दाखिल की। इनमें मोहम्मद रियाज अत्तारी, गौस मोहम्मद, मोहसिन, आसिफ, मोहम्मद मोहसिन, वसीम अली, फरहाद मोहम्मद शेख (उर्फ बबला), मोहम्मद जावेद, और मुस्लिम मोहम्मद शामिल हैं।

दो आरोपियों को मिल चुकी है जमानत
Supreme Court Udaipur Files decision : इस मामले में अब तक दो आरोपियों को जमानत मिल चुकी है:
- फरहाद मोहम्मद शेख (उर्फ बबला): NIA कोर्ट ने 1 सितंबर 2023 को आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज मामले में जमानत दी।
- मोहम्मद जावेद: राजस्थान हाईकोर्ट ने 5 सितंबर 2024 को जमानत दी। जावेद पर मोहम्मद रियाज अत्तारी के साथ मिलकर हत्या की साजिश रचने का आरोप था, लेकिन NIA उनके खिलाफ अपराध स्थल पर उनकी मौजूदगी का ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी।
NIA ने दावा किया कि जावेद ने हत्या से पहले कन्हैयालाल की दुकान की रेकी की थी, लेकिन कोर्ट ने मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल्स के आधार पर सबूतों की कमी को कारण बताते हुए जमानत दे दी।
फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ और विवाद
‘उदयपुर फाइल्स’ एक क्राइम ड्रामा फिल्म है, जिसे अमित जानी ने प्रोड्यूस किया है और भारत एस. श्रीनाते ने डायरेक्ट किया है। फिल्म में विजय राज कन्हैयालाल की भूमिका में हैं, जबकि रजनीश दुग्गल और प्रीति झंगियानी भी अहम किरदारों में हैं। फिल्म का ट्रेलर 4 जुलाई 2025 को रिलीज हुआ था, जिसके बाद जमीयत उलेमा-ए-हिंद और अन्य संगठनों ने इसे सांप्रदायिक रूप से उत्तेजक बताते हुए दिल्ली, महाराष्ट्र, और गुजरात हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर कीं।
याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि ट्रेलर में नुपुर शर्मा के विवादित बयानों और ज्ञानवापी मस्जिद विवाद का जिक्र है, जो सांप्रदायिक तनाव को भड़का सकता है। कपिल सिब्बल ने कोर्ट में कहा कि फिल्म का उद्देश्य एक समुदाय को बदनाम करना है और यह सार्वजनिक शांति के लिए खतरा है। दूसरी ओर, CBFC और फिल्म के निर्माताओं ने दावा किया कि फिल्म में 55 कट्स किए गए हैं और यह केवल कन्हैयालाल हत्याकांड की सच्चाई को दर्शाती है।
सुप्रीम कोर्ट का रुख और स्पष्टीकरण
मोहम्मद जावेद, जो इस मामले में आठवें आरोपी हैं, ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की थी। उन्होंने दावा किया कि फिल्म का कंटेंट निष्पक्ष सुनवाई को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, 9 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए कहा, “फिल्म को रिलीज होने दें।” बाद में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह कोई लिखित आदेश नहीं था, बल्कि केवल तत्काल सुनवाई से इनकार किया गया था। जस्टिस सुधांशु धूलिया और जॉयमाला बागची की बेंच ने जावेद को हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की सलाह दी।
सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
फिल्म पर रोक के बाद कई पक्षों से प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। BJP के सोशल मीडिया हेड अमित मालवीय ने X पर लिखा कि ‘उदयपुर फाइल्स’ एक वास्तविक और भयावह अपराध की कहानी को दर्शाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सच्चाई को क्यों दबाया जा रहा है। दूसरी ओर, कांग्रेस विधायक टीका राम जुली ने जावेद को जमानत मिलने पर BJP पर निशाना साधते हुए कहा कि यह उनकी दोहरी नीति को दर्शाता है। X पर कई यूजर्स ने फिल्म का समर्थन करते हुए कहा कि यह आतंकवाद और सांप्रदायिक हिंसा की सच्चाई को उजागर करती है। वहीं, कुछ यूजर्स ने इसे मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाने का प्रयास बताया।



