
Loan against FD vs personal loan : जीवन में कभी-कभी ऐसी परिस्थितियां आती हैं, जब अचानक धन की आवश्यकता पड़ती है, लेकिन आप अपने दीर्घकालिक निवेश (Long-Term Investments) को तोड़ना नहीं चाहते। ऐसी स्थिति में एक प्रभावी विकल्प यह हो सकता है कि आप अपने निवेश को Collateral के रूप में रखकर लोन ले लें। यह पर्सनल लोन (Personal Loan) की तुलना में कम ब्याज दरों पर उपलब्ध हो सकता है, जो initially आकर्षक लगता है। हालांकि, इस प्रक्रिया में छिपे जोखिमों को समझना बेहद जरूरी है ताकि आप अपने वित्तीय भविष्य को सुरक्षित रख सकें। आइए, इन जोखिमों, लाभों और इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं को विस्तार से जानते हैं ताकि आप एक सूचित और समझदारी भरा निर्णय ले सकें।
अक्सर लोग अपनी तात्कालिक वित्तीय जरूरतों, जैसे चिकित्सा खर्च, घर की मरम्मत, या बच्चों की शिक्षा के लिए, अपने लंबी अवधि के निवेश को Loan के लिए Collateral के रूप में रखने की सोचते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य यह होता है कि उनकी बचत जस की तस बनी रहे और उन्हें नकदी की सुविधा मिल जाए। हालांकि, यह तरीका सतह पर लाभकारी प्रतीत हो सकता है, लेकिन यह हमेशा सही विकल्प नहीं होता। Loan Against Investments (LAI) पर्सनल लोन से सस्ता जरूर हो सकता है, किंतु इसके साथ जुड़े जोखिमों को नजरअंदाज करना भविष्य में भारी पड़ सकता है। यह जानना जरूरी है कि कौन-सी संपत्तियां गिरवी रखी जा सकती हैं, उनकी शर्तें क्या हैं, और इनसे जुड़े नियमों का पालन कैसे करना है।
लोन के लिए कौन-कौन सी संपत्तियां रखी जा सकती हैं Collateral के रूप में?
Loan against fixed deposit disadvantages : बाजार में उपलब्ध विभिन्न वित्तीय उत्पादों को लोन के लिए Collateral के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है, जो ग्राहकों को लचीलापन प्रदान करते हैं। इनमें शामिल हैं:
- शेयर (Shares): आपके पोर्टफोलियो में मौजूद शेयर, बशर्ते वे तरल हों और बाजार में उनकी कीमत स्थिर हो।
- सावधि जमा (Fixed Deposit – FD): बैंकों में जमा की गई FD, जो सुरक्षित और उच्च मूल्य वाली मानी जाती है।
- बीमा पॉलिसियां (Insurance Policies): जिन पॉलिसियों में कैश वैल्यू हो, जैसे एंडोमेंट या मनी-बैक पॉलिसियां।
- पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF): सरकार द्वारा समर्थित यह योजना, हालांकि इसमें सीमित लोन सुविधा उपलब्ध है।
- सोना (Gold): शुद्धता और वजन के आधार पर सोने के आभूषण या सिक्के।
- म्यूचुअल फंड (Mutual Funds): इक्विटी या डेट म्यूचुअल फंड, जो बाजार की स्थिति पर निर्भर करते हैं।
ये सभी विकल्प अपनी-अपनी विशेषताओं और जोखिमों के साथ आते हैं, इसलिए इनका चयन करते समय सावधानी बरतनी चाहिए।
Loan-to-Value Ratio: लोन की सीमा तय करने वाला महत्वपूर्ण कारक
OD against FD interest rate : जो भी संपत्ति आप लोन के लिए गिरवी रखते हैं, उसकी कुल बाजार मूल्य (Market Value) के आधार पर आपको एक निश्चित सीमा तक ही लोन मिलेगा। यह सीमा Loan-to-Value (LTV) Ratio के रूप में जानी जाती है, जो संपत्ति की प्रकृति और बाजार की अस्थिरता पर निर्भर करती है। उदाहरण के लिए:
- सोना: इसकी कीमत के 75% तक राशि लोन के रूप में प्राप्त हो सकती है, जो इसे एक लोकप्रिय विकल्प बनाता है।
- FD: 95% तक लोन उपलब्ध हो सकता है, क्योंकि यह सबसे सुरक्षित माना जाता है।
- शेयर: 60% तक लोन मिलता है, क्योंकि शेयरों की कीमत में उतार-चढ़ाव होता रहता है।
- डेट म्यूचुअल फंड: 80% तक लोन की सुविधा दी जा सकती है, जो इसकी स्थिरता पर निर्भर करता है।
- PPF: केवल 25% तक लोन मिलता है, क्योंकि यह सरकारी योजना है और इसमें सख्त नियम लागू हैं।
यह LTV Ratio समय-समय पर बदल सकता है, इसलिए लोन लेने से पहले बैंक की नवीनतम नीतियों की जांच करना उचित होगा।
फायदे और जोखिम
Loan against mutual funds benefits and risks : Loan Against Investments का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह कम ब्याज दरों पर उपलब्ध होता है, जो पर्सनल लोन (जो आमतौर पर 10-15% तक ब्याज लेता है) की तुलना में आपकी जेब पर हल्का पड़ता है। साथ ही, आपके निवेश को तोड़ने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे आपकी वित्तीय योजना और ब्याज कमाने की क्षमता बनी रहती है। उदाहरण के लिए, अगर आपकी FD पर 6% ब्याज मिल रहा है और लोन की दर 7% है, तो भी आप निवेश के लाभ को बनाए रख सकते हैं।
हालांकि, इसके जोखिम भी कम नहीं हैं। अगर बाजार में गिरवी रखी गई संपत्ति की कीमत में कमी आती है—जैसे शेयरों में अचानक गिरावट या सोने की कीमत में उतार-चढ़ाव—तो बैंक आपकी सहमति के बिना उस संपत्ति को बेचने का अधिकार रख सकता है। इससे न केवल आपका निवेश खतरे में पड़ सकता है, बल्कि आपको अतिरिक्त राशि चुकानी पड़ सकती है। इसके अलावा, होम लोन की तरह इस लोन पर कोई टैक्स लाभ (Tax Benefit) भी उपलब्ध नहीं होता, जो इसे अपेक्षाकृत महंगा बना सकता है। साथ ही, अगर आप लोन की EMI (Equated Monthly Installment) समय पर नहीं चुका पाते, तो आपकी क्रेडिट स्कोर पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।
शॉर्ट टर्म जरूरतों के लिए लंबे निवेश को न करें जोखिम में
Loan on insurance policy : कई लोग शॉर्ट टर्म खर्चों—जैसे पारिवारिक समारोह, विदेश यात्रा, गैजेट्स की खरीदारी या तात्कालिक चिकित्सा खर्चों—के लिए अपने बड़े और मूल्यवान निवेश को Collateral के रूप में रख देते हैं। यह एक गंभीर वित्तीय गलती हो सकती है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि ऐसी स्थिति में अन्य विकल्पों, जैसे छोटी अवधि के पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड की सुविधा, या आपातकालीन बचत को प्राथमिकता देनी चाहिए। दीर्घकालिक निवेश को जोखिम में डालने से भविष्य की वित्तीय सुरक्षा और रिटायरमेंट प्लानिंग प्रभावित हो सकती है। इसके बजाय, एक बैलेंस्ड दृष्टिकोण अपनाना बेहतर होगा, जिसमें आप अपनी जरूरतों और निवेश की सुरक्षा दोनों को ध्यान में रखें।
सावधानियां और सुझाव
- निवेश की निगरानी: लोन लेने के बाद भी अपनी गिरवी रखी संपत्ति की बाजार में स्थिति पर नियमित नजर रखें। शेयर या म्यूचुअल फंड की कीमतों में बदलाव आपकी देनदारी को प्रभावित कर सकता है।
- ब्याज दर की तुलना: विभिन्न बैंकों, NBFC (नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों) और वित्तीय संस्थानों की ब्याज दरों की तुलना करें और सबसे कम दर वाले विकल्प का चयन करें।
- लोन राशि का आकलन: अपनी वास्तविक जरूरत के अनुसार लोन राशि तय करें। अधिक उधार लेने से भविष्य में EMI का बोझ बढ़ सकता है।
- वैकल्पिक विकल्प: अगर संभव हो, तो परिवार या करीबी दोस्तों से मदद लेने, आपातकालीन कोष का उपयोग करने, या कम ब्याज वाले अन्य ऋण स्रोतों पर विचार करें।
- कागजी कार्रवाई: लोन समझौते की सभी शर्तों, खासकर डिफॉल्ट और संपत्ति बिक्री के नियमों को ध्यान से पढ़ें और समझें।
Loan Against Investments एक उपयोगी और प्रभावी उपकरण हो सकता है, बशर्ते आप इसके फायदे, नुकसान और जोखिमों को अच्छी तरह समझ लें। सही योजना, सतर्कता और विशेषज्ञ सलाह के साथ आप अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा कर सकते हैं, बिना अपनी दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता और रिटायरमेंट लक्ष्यों को खतरे में डाले। इसलिए, निर्णय लेने से पहले सभी पहलुओं—बाजार की अस्थिरता, ब्याज दरें, और आपकी वित्तीय स्थिति—पर गहन विचार करें और एक संतुलित रणनीति अपनाएं।
✅ क्या FD पर OD लेना अच्छा विकल्प है?
Is OD against FD a good option : हां, FD पर Overdraft (OD) लेना एक सस्ता, तेज और सुरक्षित विकल्प है:
🔹 फायदे:
- FD की ब्याज दर + 0.5% से ही लोन
- कोई EMI नहीं, जब चाहें repayment
- CIBIL स्कोर की जरूरत नहीं
- FD को तोड़े बिना फंड मिल जाता है
🔻 नुकसान:
- FD पर लॉक लग जाता है
- समय पर OD नहीं चुकाया तो ब्याज बढ़ेगा
- FD मैच्योर होने पर रकम कट सकती है

✅ SBI OD Against FD Calculator
🧾 1. FD की कुल राशि (Total FD Amount):
उदाहरण: ₹1,00,000
📈 2. ओवरड्राफ्ट लिमिट (OD Limit):
SBI आमतौर पर FD राशि का 90% तक OD देता है।
OD = ₹1,00,000 × 90% = ₹90,000
💸 3. ब्याज दर (Interest Rate):
SBI FD दर + 1% (लगभग)
अगर FD पर 6.50% मिल रहा है, तो
OD Interest Rate = 6.50% + 1% = 7.50% (वार्षिक)
🧮 4. सालाना ब्याज की गणना (Interest Calculation):
ब्याज = ₹90,000 × 7.5% = ₹6,750 प्रति वर्ष
मासिक ब्याज = ₹6,750 ÷ 12 = ₹562.50 प्रति माह
👉 ध्यान दें: OD पर केवल उतने ही अमाउंट पर ब्याज देना होता है जितना आप उपयोग करते हैं।
🧮 OD EMI Calculator (यदि आप किस्तों में चुकाना चाहें):
| 💵 OD Amount | 🗓️ Duration | 📊 Interest Rate | 💳 Approx. EMI |
|---|---|---|---|
| ₹90,000 | 12 months | 7.5% | ₹7,804/month |
| ₹90,000 | 24 months | 7.5% | ₹4,048/month |
👉 यह अनुमानित EMI है, वास्तविक EMI ब्याज व प्रोसेसिंग फीस के अनुसार अलग हो सकती है।
अक्सर पुछे जाने वाले प्रश्न
❓ Which is better, a loan against a FD or a personal loan?
✅ यदि आपके पास एक सक्रिय फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) है, तो उस पर लोन लेना पर्सनल लोन से बेहतर होता है क्योंकि इसकी ब्याज दर कम होती है (आमतौर पर FD दर + 1%) और दस्तावेज़ प्रक्रिया सरल होती है। वहीं, पर्सनल लोन में ब्याज दर ज्यादा (10%–16%) होती है और CIBIL स्कोर की जांच जरूरी होती है।
❓ What are the disadvantages of a loan against FD?
✅ FD पर लोन लेने के नुकसान:
- FD राशि पर लॉक लग जाता है, उसे मैच्योरिटी से पहले भुना नहीं सकते।
- अगर OD या लोन चुकता नहीं किया तो बैंक FD को जब्त कर सकता है।
- इसमें टैक्स छूट (Tax Benefit) नहीं मिलता, जबकि कुछ अन्य लोन जैसे होम लोन में यह सुविधा होती है।
- केवल उतनी ही राशि पर लोन मिलता है जितनी FD में जमा है।
❓ Is it profitable to take a loan against FD?
✅ हां, यह लाभदायक हो सकता है यदि आपको तुरंत पैसों की जरूरत है और आप अपनी FD को तोड़ना नहीं चाहते। FD पर लोन की ब्याज दर पर्सनल लोन की तुलना में काफी कम होती है, जिससे ब्याज का बोझ कम होता है।
❓ कौन सा बेहतर है, FD पर लोन या पर्सनल लोन?
✅ FD पर लोन बेहतर विकल्प है यदि आपके पास पहले से FD है। इसकी ब्याज दर कम होती है और प्रोसेस आसान होता है। वहीं, पर्सनल लोन बिना किसी संपत्ति के भी मिल सकता है, लेकिन उसकी ब्याज दर ज्यादा होती है और प्रोसेस लंबा।
❓ क्या FD पर लोन लेना लाभदायक है?
✅ हां, यह लाभदायक है जब आप अपनी FD को तोड़ना नहीं चाहते और आपको अल्पकालिक जरूरतों के लिए पैसा चाहिए। यह फाइनेंशियली स्मार्ट मूव हो सकता है क्योंकि FD बनी रहती है और ब्याज मिलता रहता है।
❓ कौन सा बेहतर है, FD पर लोन या कार लोन?
✅ यदि आपको कार ही खरीदनी है, तो कार लोन बेहतर है, क्योंकि उसकी ब्याज दर FD लोन से भी कम हो सकती है और वाहन को ही गिरवी रखा जाता है। लेकिन अगर आपको फ्लेक्सिबल उपयोग के लिए लोन चाहिए और FD है, तो FD पर लोन लेना सुविधाजनक और सस्ता विकल्प हो सकता है।
❓ कौन सा बेहतर है, डेट या एफडी?
✅ यह आपकी जोखिम लेने की क्षमता और निवेश उद्देश्य पर निर्भर करता है:
- FD (Fixed Deposit): सुरक्षित, निश्चित रिटर्न, कम जोखिम।
- Debt Mutual Funds: बाजार पर निर्भर, थोड़ा अधिक रिटर्न की संभावना, लेकिन कुछ जोखिम भी।
यदि आप सुरक्षा और स्थिरता चाहते हैं, तो FD बेहतर है। यदि आप थोड़ा जोखिम लेकर बेहतर रिटर्न चाहते हैं, तो Debt Funds अच्छे विकल्प हो सकते हैं।
