
Udaipur Files : उदयपुर के चर्चित कन्हैयालाल हत्याकांड पर आधारित फिल्म उदयपुर फाइल्स की रिलीज को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने फिल्म पर लगी अंतरिम रोक को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया और इस मामले को दिल्ली हाईकोर्ट को सौंपते हुए 28 जुलाई 2025 (सोमवार) को सुनवाई करने का निर्देश दिया। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले के गुण-दोष (merits) पर कोई टिप्पणी नहीं की है और अंतिम फैसला दिल्ली हाईकोर्ट को करना है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सभी पक्षकारों को दिल्ली हाईकोर्ट में अपनी दलीलें पेश करनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी दोहराया कि वह इस मामले में कोई स्थगन आदेश (stay order) जारी नहीं कर रहा है, बल्कि हाईकोर्ट को इसकी मेरिट पर विचार करने का अधिकार दे रहा है। इससे पहले, दिल्ली हाईकोर्ट ने 10 जुलाई 2025 को फिल्म की रिलीज पर अंतरिम रोक लगा दी थी, जिसके बाद फिल्म निर्माताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सुप्रीम कोर्ट ने अब हाईकोर्ट से आग्रह किया है कि वह सोमवार को इस मामले की सुनवाई करे और यथासंभव शीघ्र निर्णय ले।
फिल्म पर विवाद और पक्ष-विपक्ष की दलीलें
Udaipur Files Supreme Court decision फिल्म उदयपुर फाइल्स को लेकर कई पक्षों ने आपत्तियाँ दर्ज की हैं। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी और कन्हैयालाल हत्याकांड के एक आरोपी मोहम्मद जावेद ने फिल्म की रिलीज का विरोध किया है। उनके वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और मेनका गुरुस्वामी ने दलील दी कि फिल्म में सामाजिक विद्वेष (hatred) को बढ़ावा देने वाली सामग्री है, जो एक समुदाय को बदनाम कर सकती है और जयपुर की विशेष एनआईए अदालत में चल रहे मुकदमे को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म में कन्हैयालाल हत्याकांड और ज्ञानवापी मस्जिद जैसे संवेदनशील मुद्दों को गलत तरीके से चित्रित किया गया है, जिससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ सकता है। वहीं, फिल्म निर्माता जानी फायरफॉक्स मीडिया प्राइवेट लिमिटेड की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने जोरदार पैरवी की। उन्होंने कहा कि फिल्म को सेंसर बोर्ड (CBFC) ने मंजूरी दी थी और केंद्र सरकार ने भी छह संशोधनों के साथ रिलीज की अनुमति दी थी। भाटिया ने तर्क दिया कि दिल्ली हाईकोर्ट का रोक आदेश केवल एक निजी स्क्रीनिंग के आधार पर लिया गया, जिसमें कोई ठोस आधार नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि देश का सामाजिक ताना-बाना इतना कमजोर नहीं है कि एक फिल्म से खराब हो जाए। भाटिया ने कश्मीर फाइल्स जैसी फिल्मों का उदाहरण देते हुए कहा कि अदालतों ने पहले भी ऐसी फिल्मों की रिलीज को बाधित करने से परहेज किया है।
Udaipur Files movie release status जस्टिस सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि इस विवाद ने फिल्म को अप्रत्याशित पब्लिसिटी (publicity) दी है, जो इसके लिए फायदेमंद हो सकती है। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा, “फिल्म इंडस्ट्री में जितना सस्पेंस, उतनी ही सफलता।” हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर फिल्म से सामाजिक तनाव बढ़ता है, तो आरोपियों की प्रतिष्ठा को होने वाली क्षति की भरपाई नहीं हो सकती, जबकि निर्माताओं को आर्थिक नुकसान की भरपाई संभव है।
केंद्र सरकार की समिति और संशोधन
Kanhaiya Lal murder movie ban केंद्र सरकार ने फिल्म की समीक्षा के लिए एक वैधानिक समिति गठित की थी, जिसने छह दृश्यों को हटाने और डिस्क्लेमर में बदलाव की सिफारिश की थी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि ये संशोधन सामाजिक सौहार्द सुनिश्चित करने के लिए जरूरी हैं। समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि फिल्म का विषय किसी समुदाय को टारगेट करने के बजाय अपराध (crime) पर केंद्रित है। नूपुर शर्मा और ज्ञानवापी जैसे संदर्भों को हटाने के निर्देश भी दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षकारों से कहा कि वे केंद्र के इस निर्णय को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दे सकते हैं।

कन्हैयालाल हत्याकांड: पृष्ठभूमि
Udaipur Files movie case update 28 जून 2022 को उदयपुर में दर्जी कन्हैयालाल तेली की मोहम्मद रियाज अत्तारी और गौस मोहम्मद ने दुकान में घुसकर निर्मम तरीके से हत्या कर दी थी। आरोपियों ने हत्या का वीडियो रिकॉर्ड किया और दावा किया कि यह कृत्य पूर्व बीजेपी प्रवक्ता नूपुर शर्मा के समर्थन में कन्हैयालाल की सोशल मीडिया पोस्ट के जवाब में किया गया। इस जघन्य अपराध ने देशभर में सनसनी फैला दी थी। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने इस मामले की जांच की और 11 आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), आर्म्स एक्ट और भारतीय दंड संहिता (IPC) की कठोर धाराओं के तहत चार्जशीट दाखिल की। इनमें मुख्य आरोपी गौस मोहम्मद, मोहम्मद रियाज अत्तारी, मोहसिन, आसिफ, मोहम्मद मोहसिन, वसीम अली, फरहाद मोहम्मद शेख उर्फ बबला, मोहम्मद जावेद, और मुस्लिम मोहम्मद शामिल हैं। इसके अलावा, पाकिस्तान के कराची निवासी सलमान और अबू इब्राहिम को फरार घोषित किया गया है।
9 फरवरी 2023 को जयपुर की विशेष एनआईए अदालत ने हत्या, आतंकी गतिविधियों, आपराधिक षड्यंत्र और अन्य आरोपों में संज्ञान लिया। इस मामले में अब तक दो आरोपियों—मोहम्मद जावेद (5 सितंबर 2024) और फरहाद मोहम्मद उर्फ बबला (1 सितंबर 2023)—को जमानत मिल चुकी है। जावेद पर रियाज अत्तारी के साथ मिलकर हत्या की साजिश रचने का आरोप है, जबकि फरहाद के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था।



