
Exam rule Rajasthan : राजस्थान सरकार ने सिख समुदाय के अभ्यर्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं में एक ऐतिहासिक और सराहनीय फैसला लिया है। अब सिख उम्मीदवार अपने धार्मिक प्रतीकों—कड़ा, पगड़ी और कृपाण के साथ परीक्षा केंद्रों में प्रवेश कर सकेंगे और परीक्षा दे सकेंगे। गृह विभाग द्वारा यह निर्णय उस समय लिया गया है जब हाल ही में एक सिख छात्रा को PJS (राजस्थान न्यायिक सेवा) परीक्षा में प्रवेश से वंचित कर दिया गया था क्योंकि उसने कड़ा और कृपाण पहन रखा था।
राजस्थान सरकार के गृह विभाग ने एक स्पष्ट आदेश जारी करते हुए कहा है कि राज्य के सभी सरकारी विभागों द्वारा आयोजित होने वाली भर्ती परीक्षाओं में सिख धर्म के अनुयायी अभ्यर्थियों को उनके धार्मिक प्रतीकों के साथ परीक्षा में भाग लेने की अनुमति दी जाएगी। आदेश में यह भी निर्देश दिया गया है कि सिख अभ्यर्थियों की धार्मिक भावनाओं और गरिमा का पूरा सम्मान किया जाए। गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव भास्कर ए. सावंत द्वारा जारी किए गए इस निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि परीक्षा केंद्रों पर सिख उम्मीदवारों को पगड़ी, कड़ा और कृपाण के साथ प्रवेश दिया जाए। साथ ही, सुरक्षा जांच के दौरान उनकी धार्मिक मान्यताओं का विशेष ध्यान रखा जाए, ताकि वे किसी भी प्रकार के अपमान या असुविधा का अनुभव न करें।

🛑 क्या हुआ था विवादित मामला?
Rajasthan allows Sikh candidates to wear kirpan in exam यह आदेश उस समय आया जब 28 जुलाई 2025 को जयपुर स्थित एक परीक्षा केंद्र में PJS परीक्षा के दौरान पंजाब से आई एक सिख छात्रा गुरप्रीत कौर को केवल इसलिए परीक्षा में बैठने से रोक दिया गया क्योंकि उसने अपने धर्म के अनुसार कड़ा और कृपाण धारण किए हुए थे।
इस घटना ने राष्ट्रीय स्तर पर आक्रोश पैदा कर दिया था। कई सिख संगठनों और धार्मिक नेताओं ने इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करार दिया। सोशल मीडिया पर यह मुद्दा तेजी से वायरल हुआ और सिख समुदाय ने इसे सख्त धार्मिक असहिष्णुता बताया।
📩 सुखबीर सिंह बादल ने पीएम मोदी को लिखा पत्र
Kirpan exam rules Rajasthan 2025 : इस घटना के बाद शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस मुद्दे में हस्तक्षेप करने की अपील की थी। उन्होंने अपने पत्र में लिखा:
“कड़ा और कृपाण सिख धर्म के पवित्र चिन्ह हैं। इन्हें धारण करना हमारे धर्म का अनिवार्य हिस्सा है, जिसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत संरक्षित किया गया है। ऐसे में सिख छात्रा को परीक्षा से वंचित करना उसके मौलिक अधिकारों का घोर उल्लंघन है।”
🙏 राजस्थान सरकार के निर्णय का स्वागत
Gurpreet Kaur PJS exam controversy राजस्थान सरकार के इस फैसले पर सुखबीर सिंह बादल ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा:
“मैं राजस्थान सरकार द्वारा लिए गए इस निर्णय का स्वागत करता हूं, जिसमें सिख छात्रों को परीक्षा केंद्रों में कड़ा, कृपाण और पगड़ी पहनने की अनुमति दी गई है। मैं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी आभार प्रकट करता हूं, जिन्होंने सिख धर्म के सम्मान और संविधान में प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए संवेदनशीलता दिखाई।”
साथ ही उन्होंने आग्रह किया कि गुरप्रीत कौर सहित उन सभी छात्रों को फिर से परीक्षा देने का अवसर दिया जाए जिन्हें गलत तरीके से परीक्षा में भाग लेने से रोका गया।
⚖️ संवैधानिक और धार्मिक अधिकारों की रक्षा की ओर एक सकारात्मक कदम
Sikh symbols allowed in government exams भारत का संविधान नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता देता है। अनुच्छेद 25 स्पष्ट रूप से सभी नागरिकों को अपने धर्म के पालन, प्रचार और अभ्यास का अधिकार देता है। सिख धर्म में कृपाण, कड़ा, पगड़ी आदि केवल प्रतीक नहीं बल्कि अनिवार्य धार्मिक वस्तुएं हैं, जिन्हें ‘पांच ककार’ के नाम से जाना जाता है। ऐसे में राजस्थान सरकार का यह फैसला धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक समरसता की दिशा में एक मजबूत पहल मानी जा रही है।
🔒 पिछले नियम थे कठोर, अब हुए लचीले
Bhajan Lal Sikh decision अब तक राजस्थान में राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) और कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा आयोजित परीक्षाओं में अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र में कड़ा, मंगलसूत्र, चेन, ईयररिंग्स और मेटल बटन जैसे किसी भी धातु से बने वस्त्र या आभूषण पहनकर एंट्री नहीं दी जाती थी। यह नियम नकल रोकने और सुरक्षा के दृष्टिकोण से बनाया गया था। लेकिन अब सरकार ने इस दिशा में संतुलन बनाते हुए सिखों के धार्मिक प्रतीकों को मान्यता दी है।



