
Rain Alert : राजस्थान के विभिन्न हिस्सों में मानसून की सक्रियता ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। सोमवार को उदयपुर, कोटा और जोधपुर संभागों के कई इलाकों में भारी बारिश ने लोगों की दिनचर्या को प्रभावित किया, जबकि कुछ जिलों में उमस भरी गर्मी ने हालात को और चुनौतीपूर्ण बना दिया। विशेष रूप से झालावाड़ जिले के समराई गांव में एक ट्रैक्टर तेज बहते पानी में फंस गया, जिससे ड्राइवर को काफी मशक्कत का सामना करना पड़ा। काफी प्रयासों के बाद ट्रैक्टर को स्टार्ट किया जा सका और ड्राइवर उसे तेजी से भगाकर सुरक्षित स्थान पर ले गया। यह घटना बारिश की तीव्रता को दर्शाती है, जहां ग्रामीण इलाकों में सड़कें और पुल पानी से लबालब हो गए हैं।
मौसम विभाग के विशेषज्ञों ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में विकसित हुआ low-pressure system अब मजबूत होकर well-marked low-pressure system में तब्दील हो गया है। इस बदलाव के कारण monsoon trough line अपनी सामान्य स्थिति से दक्षिण की ओर शिफ्ट हो गई है, जिससे राज्य के दक्षिणी और दक्षिण-पश्चिमी हिस्सों में आने वाले दिनों में लगातार बारिश की संभावना बनी हुई है। उदयपुर संभाग में सोमवार शाम को अचानक मौसम ने करवट ली और तेज बौछारों ने शहर को तर-बतर कर दिया। स्थानीय निवासियों ने बताया कि ऐसी बारिश ने लंबे समय से सूखे पड़े तालाबों और नदियों में जान फूंक दी है, लेकिन साथ ही बाढ़ जैसे हालात भी पैदा कर दिए हैं।

कोटा संभाग में सुल्तानपुर सबसे ज्यादा प्रभावित
Rajasthan ka Mosam : पिछले 24 घंटों की बात करें तो राज्य में कई स्थानों पर अच्छी-खासी वर्षा दर्ज की गई। कोटा जिले के सुल्तानपुर में 47 मिलीमीटर (MM) बारिश हुई, जो इस इलाके के लिए मौसम की एक बड़ी घटना है। इसी तरह दीगोद में 32 MM, कानावास में 13 MM पानी बरसा। बूंदी जिले का नैनवां सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, जहां 65 MM (लगभग 2.5 इंच) वर्षा ने खेतों को हरा-भरा कर दिया, लेकिन कुछ निचले इलाकों में जलभराव की समस्या भी उत्पन्न हो गई। झुंझुनूं के खेतड़ी में 18 MM, टोंक के दूनी में 54 MM और नगरफोर्ट में 28 MM बारिश ने किसानों के चेहरों पर मुस्कान बिखेर दी, क्योंकि यह फसलों के लिए अमृत समान साबित हो रही है।
प्रतापगढ़ के पीपलखूंट में 23 MM, उदयपुर के सलूंबर में 29 MM वर्षा दर्ज हुई। जैसलमेर जैसे रेगिस्तानी इलाकों में भी बारिश ने दस्तक दी, जहां सम में 24 MM और रामगढ़ में 11 MM पानी गिरा। झालावाड़ के रायपुर में 24 MM, सुनेल में 23 MM, बाड़मेर के गडरा रोड पर 25 MM और सिणधरी में 24 MM बारिश ने स्थानीय लोगों को राहत प्रदान की। बांसवाड़ा में 22 MM और धौलपुर के बाड़ी में 20 MM वर्षा ने आदिवासी बहुल क्षेत्रों में जल संकट को कुछ हद तक कम किया है। इन आंकड़ों से साफ है कि मानसून इस साल राज्य को भरपूर पानी दे रहा है, जो कृषि अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन साथ ही बाढ़ और मिट्टी कटाव जैसी चुनौतियां भी ला रहा है।
उमस और गर्मी ने बढ़ाई परेशानी
Heavy Rain alert : हालांकि, बारिश का दौर कुछ जिलों में धीमा पड़ने से उमस और गर्मी ने लोगों को बेहाल कर दिया। जयपुर, भरतपुर, अलवर, सीकर, बीकानेर, नागौर, गंगानगर, हनुमानगढ़ और चूरू जैसे पूर्वी और उत्तरी राजस्थान के जिलों में humidity level काफी ऊंचा रहा, जिससे दिन भर की गतिविधियां प्रभावित हुईं। सुबह और शाम के समय भी उमस ने लोगों को घरों में कैद रहने पर मजबूर कर दिया। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति monsoon trough line के शिफ्ट होने का परिणाम है, जो राज्य के उत्तरी हिस्सों को कम प्रभावित कर रही है।
तापमान की बात करें तो बीकानेर और जैसलमेर में सोमवार को अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिसमें बीकानेर में 40.1 डिग्री का रिकॉर्ड दर्ज हुआ। बाड़मेर में 38.8 डिग्री, अजमेर में 34.1 डिग्री, भीलवाड़ा में 34.8 डिग्री, चूरू में 37.8 डिग्री, जयपुर में 35.4 डिग्री, जोधपुर में 37.7 डिग्री, कोटा में 33.9 डिग्री, फलोदी में 37.4 डिग्री, पिलानी में 35.7 डिग्री, सीकर में 35 डिग्री, गंगानगर में 37.5 डिग्री और उदयपुर में 31.6 डिग्री तापमान रहा। इन आंकड़ों से पता चलता है कि जहां दक्षिणी जिलों में बारिश ने ठंडक प्रदान की, वहीं उत्तरी इलाकों में सूरज की तपिश ने लोगों को पसीने से तर कर दिया। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि ऐसी स्थिति में हाइड्रेशन बनाए रखना जरूरी है, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए।

मानसून ट्रफ लाइन की स्थिति और भविष्यवाणी
Mosam : मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, monsoon trough line वर्तमान में गुजरात के नालिया, महाराष्ट्र के जलगांव, ब्रह्मपुरी, छत्तीसगढ़ के जगलपुर से होकर बंगाल की खाड़ी में स्थित well-marked low-pressure system तक फैली हुई है। इस वजह से राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी और दक्षिण-पश्चिमी जिलों में अगले कुछ दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। यह बदलाव राज्य की जलवायु को प्रभावित कर रहा है, जहां एक ओर कृषि को लाभ मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर बाढ़ और सड़क अवरोध जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।
इस मानसून सीजन में अब तक राज्य में औसत से 41 प्रतिशत अधिक वर्षा हो चुकी है। सामान्यतः 1 जून से 17 अगस्त तक 312.7 MM बारिश होती है, लेकिन इस साल कुल 441.8 MM पानी बरस चुका है। यह अतिरिक्त वर्षा जल संसाधनों को मजबूत कर रही है, लेकिन जलभराव और मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का खतरा भी बढ़ा रही है। सरकार ने जल निकासी और स्वास्थ्य सेवाओं पर ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए हैं।
आने वाले दिनों में अलर्ट
Aaj ka Mosam Rajasthan : मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर ने आज यानी 19 अगस्त को 26 जिलों में हल्की से मध्यम बारिश का yellow alert जारी किया है। इनमें गंगानगर, बीकानेर, जयपुर, अलवर, दौसा, भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, अजमेर, टोंक, भीलवाड़ा, कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, उदयपुर, सिरोही, राजसमंद, पाली, जालोर और बाड़मेर शामिल हैं। इन जिलों में निवासियों को सलाह दी गई है कि वे निचले इलाकों से दूर रहें और यात्रा के दौरान सावधानी बरतें।
20 अगस्त को भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, टोंक, बूंदी, कोटा, बारां, झालावाड़, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, उदयपुर, राजसमंद, पाली, सिरोही, जालोर और बाड़मेर जिलों के लिए yellow alert रहेगा। इन क्षेत्रों में किसान अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए तैयार रहें, क्योंकि भारी बारिश से नुकसान की आशंका है।
Rajasthan me Barish : 21 अगस्त को सिरोही, उदयपुर और डूंगरपुर में भारी बारिश का orange alert जारी किया गया है, जबकि दौसा, भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, अजमेर, टोंक, भीलवाड़ा, बूंदी, कोटा, बारां, झालावाड़, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, राजसमंद, पाली, जोधपुर, जालोर और बाड़मेर में yellow alert रहेगा। orange alert वाले जिलों में आपदा प्रबंधन टीमों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
22 अगस्त को सिरोही में भारी वर्षा का orange alert जारी है, जबकि भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, उदयपुर, राजसमंद, पाली, जालोर और बाड़मेर में yellow alert रहेगा। मौसम विभाग ने सलाह दी है कि लोग मौसम अपडेट्स पर नजर रखें और आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाएं।
