
Rajasthan panchayat election : राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं। राजस्थान हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने करीब 11,000 ग्राम पंचायतों और 150 से अधिक शहरी निकायों के लिए चुनाव की घोषणा की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अगले 7 से 10 दिनों में इन चुनावों का शेड्यूल जारी होने की संभावना है। यह कदम उन पंचायतों और निकायों के लिए उठाया जा रहा है, जिनका 5 साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है या अगले दो महीनों में पूरा होने वाला है।
हालांकि, ‘वन स्टेट-वन इलेक्शन’ की चर्चा को लेकर राज्य निर्वाचन आयुक्त मधुकर गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि यह अवधारणा वर्तमान में व्यावहारिक नहीं है। इसके लिए संविधान में संशोधन की जरूरत है, जिसके बिना सभी पंचायतों और निकायों के चुनाव एक साथ कराना संभव नहीं होगा।

हाईकोर्ट का सख्त रुख
Rajasthan municipal body elections 2025 : राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में पंचायती राज और शहरी निकायों के चुनाव में देरी को लेकर राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को कड़ी फटकार लगाई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 243E और 243U के तहत पंचायतों और शहरी निकायों का कार्यकाल 5 वर्ष से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि विशेष परिस्थितियों में अधिकतम 6 महीने की देरी की अनुमति है, लेकिन परिसीमन जैसे बहानों से चुनाव को अनिश्चितकाल तक टालना असंवैधानिक है।
इसके जवाब में राज्य निर्वाचन आयुक्त मधुकर गुप्ता ने कहा, “हाईकोर्ट के निर्देश संवैधानिक प्रावधानों पर आधारित हैं। हमने समय-समय पर सरकार को इन नियमों की याद दिलाई है। अब हमारे पास जल्द से जल्द चुनाव कराने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।” उन्होंने यह भी बताया कि यह समस्या केवल राजस्थान तक सीमित नहीं है। हरियाणा, पंजाब, और कर्नाटक जैसे राज्यों में भी चुनाव में देरी के कारण हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप किया है और समान निर्देश जारी किए हैं।
‘वन स्टेट-वन इलेक्शन’ पर क्यों है अड़चन?
One state one election Rajasthan ‘वन स्टेट-वन इलेक्शन’ की अवधारणा, जिसके तहत पंचायती राज और शहरी निकायों के सभी चुनाव एक साथ कराए जाएं, को लेकर भजनलाल सरकार ने पहले जोर-शोर से चर्चा शुरू की थी। सरकार का तर्क था कि इससे प्रशासनिक संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और खर्च में कमी आएगी। हालांकि, मधुकर गुप्ता ने इस प्रस्ताव को अव्यवहारिक करार देते हुए कहा कि संविधान के मौजूदा प्रावधानों के तहत यह संभव नहीं है।
उन्होंने कहा, “संविधान के अनुच्छेद 243 के तहत पंचायती राज और शहरी निकायों का कार्यकाल 5 साल तय है। न तो इसे बढ़ाया जा सकता है और न ही घटाया जा सकता। जिन संस्थाओं का कार्यकाल अभी बाकी है, उनके चुनाव समय से पहले कराने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है।” इसके अलावा, ‘वन स्टेट-वन इलेक्शन’ के लिए EVM (Electronic Voting Machine) और अन्य संसाधनों की भी भारी जरूरत होगी, जिसके लिए अभी पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। गुप्ता ने साफ किया कि जब तक संसद संविधान में संशोधन नहीं करती, तब तक यह नीति लागू नहीं हो सकती।

पंचायती राज मंत्री का जवाब
Rajasthan panchayati raj elections 2025 वन स्टेट-वन इलेक्शन’ को लेकर निर्वाचन आयोग के रुख पर पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने सधी हुई प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “इस मुद्दे पर सामूहिक चर्चा होगी। सभी पक्षों से विचार-विमर्श के बाद जो भी निर्णय लिया जाएगा, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।” दिलावर का यह बयान दर्शाता है कि सरकार इस नीति को लागू करने के लिए अभी और समय ले सकती है।
राज्य निर्वाचन आयोग ने उन पंचायतों और निकायों को प्राथमिकता दी है, जिनका कार्यकाल पूरा हो चुका है या अगले दो महीनों में पूरा होने वाला है। राजस्थान में कुल 11,310 ग्राम पंचायतें हैं, जिनमें से 6,759 पंचायतों का कार्यकाल जनवरी 2025 में और 704 का फरवरी 2025 में समाप्त हो रहा है। इसके अलावा, 150 से अधिक शहरी निकायों, जिनमें 11 नगर निगम, 33 नगर परिषद, और 169 नगर पालिकाएं शामिल हैं, के चुनाव भी जल्द कराए जाएंगे। जिला परिषदों और पंचायत समितियों के चुनाव की घोषणा बाद में होगी, क्योंकि इनमें से कई का कार्यकाल नवंबर-दिसंबर 2025 या अगस्त-सितंबर 2026 में समाप्त होगा। उदाहरण के लिए, 21 जिला परिषदों और 222 पंचायत समितियों का कार्यकाल नवंबर-दिसंबर 2025 में खत्म होगा, जबकि 6 जिला परिषदों और 78 पंचायत समितियों का कार्यकाल 2026 में समाप्त होगा।
परिसीमन का क्या होगा?
Rajasthan gram panchayat elections news राज्य सरकार ने हाल ही में पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के लिए नए वार्डों का परिसीमन और नई पंचायतों के गठन का प्रस्ताव तैयार किया है। मंत्रिस्तरीय समिति ने इसकी रिपोर्ट को अंतिम रूप दे दिया है, जिसे जल्द ही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सौंपा जाएगा।
मधुकर गुप्ता ने इस बारे में कहा, “यदि सरकार परिसीमन और नई पंचायतों के गठन का नोटिफिकेशन जारी कर देती है, तो चुनाव नए परिसीमन के आधार पर होंगे। अगर नोटिफिकेशन जारी नहीं होता, तो पुराने क्षेत्रों के हिसाब से ही मतदान कराया जाएगा।” यह बयान दर्शाता है कि आयोग किसी भी स्थिति में समय पर चुनाव कराने को प्रतिबद्ध है।
संवैधानिक दायित्व और चुनौतियां
संविधान के 73वें और 74वें संशोधन ने पंचायती राज और शहरी निकायों को संवैधानिक दर्जा दिया है, जिसके तहत हर 5 साल में चुनाव कराना अनिवार्य है। इन संस्थाओं का कार्यकाल न तो बढ़ाया जा सकता है और न ही घटाया जा सकता। यही कारण है कि ‘वन स्टेट-वन इलेक्शन’ को लागू करने के लिए सरकार को कानूनी रास्ता तलाशना पड़ रहा है।
कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि इस मुद्दे पर विधि विभाग स्तर पर मंथन चल रहा है। सरकार एक कैबिनेट सब-कमेटी गठन करने की तैयारी में है, जो ‘वन स्टेट-वन इलेक्शन’ की संभावनाओं और कानूनी पहलुओं की जांच करेगी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों, जैसे पंजाब मामले में, ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चुनावों को अनिश्चितकाल तक टालना संवैधानिक रूप से गलत है।



