
Putin warns Trump : रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को भारत और चीन पर टैरिफ के जरिए दबाव बनाने की नीति को तत्काल बंद करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि इन दोनों देशों को धमकियों से डराया नहीं जा सकता, और ऐसा करने की कोशिश उनके नेताओं के लिए राजनीतिक रूप से आत्मघाती साबित हो सकती है। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब भारत और चीन, शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट में एकजुटता का प्रदर्शन कर रहे हैं, और अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ ने वैश्विक कूटनीति में तनाव बढ़ा दिया है। पुतिन का यह बयान न केवल ट्रम्प की नीतियों पर तीखा प्रहार है, बल्कि यह भारत, चीन और रूस के बीच बढ़ती नजदीकियों का भी संकेत देता है।
पुतिन का ट्रम्प को कड़ा संदेश
Putin on US tariffs India China : 3 सितंबर 2025 को चीन की विक्ट्री डे परेड (Victory Day Parade) में हिस्सा लेने के बाद, पुतिन ने बीजिंग में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रम्प की टैरिफ नीति की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, “भारत और चीन जैसे देशों को टैरिफ की धमकियों से डराना संभव नहीं है। इन देशों का नेतृत्व ऐसी कमजोरी दिखाने का जोखिम नहीं उठा सकता, क्योंकि यह उनके राजनीतिक भविष्य को खतरे में डाल सकता है।” पुतिन ने अमेरिका की इस रणनीति को “रूढ़िवादी और औपनिवेशिक मानसिकता” (Colonial Mindset) से प्रेरित बताया और कहा कि यह युग अब खत्म हो चुका है।
पुतिन ने आगे कहा, “अमेरिका को यह समझना होगा कि वह अपने साझेदारों (Partners) से ऐसी भाषा में बात नहीं कर सकता। भारत और चीन जैसे विशाल देशों का इतिहास संघर्षों और चुनौतियों से भरा है। उनकी जनता और नेतृत्व बाहरी दबाव के सामने झुकने के बजाय अपनी संप्रभुता (Sovereignty) को प्राथमिकता देंगे।” उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में तनाव कम होगा और सामान्य कूटनीतिक संवाद (Diplomatic Dialogue) फिर से शुरू हो सकेगा।
ट्रम्प की टैरिफ नीति और भारत पर आरोप
Trump 50% tariff on India : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत पर बार-बार आरोप लगाया है कि वह रूसी तेल (Russian Oil) खरीदकर यूक्रेन युद्ध में मॉस्को का समर्थन कर रहा है। ट्रम्प ने अपनी टैरिफ नीति को एक “जादुई हथियार” (Magic Weapon) करार देते हुए दावा किया है कि इसके जरिए उन्होंने सात युद्धों को रोका है। 3 सितंबर को द स्कॉट जेनिंग्स रेडियो शो (The Scott Jennings Radio Show) में ट्रम्प ने कहा, “टैरिफ ने अमेरिका को अभूतपूर्व शक्ति दी है। यह हमारी आर्थिक और कूटनीतिक ताकत का आधार है।”
हालांकि, भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह रूसी तेल की खरीद अपने राष्ट्रीय हितों (National Interests), विशेष रूप से किसानों और आम नागरिकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर करता है, न कि किसी बाहरी दबाव के तहत। भारत ने यह भी कहा कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) के लिए रूस जैसे विश्वसनीय साझेदारों पर निर्भर रहना जारी रखेगा।
SCO समिट में भारत, चीन और रूस की एकजुटता
SCO Summit 2025 news 1 सितंबर 2025 को चीन के तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट ने वैश्विक कूटनीति में एक नया अध्याय जोड़ा। इस समिट के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक साथ मंच साझा किया। समिट के फोटो सेशन में तीनों नेताओं को एक-दूसरे का हाथ पकड़े हुए देखा गया, जो उनकी आपसी दोस्ती और एकजुटता का प्रतीक था। इस दृश्य ने अमेरिका में बेचैनी पैदा की, क्योंकि यह ट्रम्प प्रशासन की टैरिफ नीति के खिलाफ एक मजबूत संदेश था।
प्रधानमंत्री मोदी ने रूस को भारत का “विशेष और विश्वसनीय साझेदार” (Special and Trusted Partner) करार दिया। उन्होंने कहा, “भारत और रूस के बीच दशकों पुराना रिश्ता आपसी विश्वास और सहयोग पर आधारित है।” वहीं, शी जिनपिंग ने कहा, “दुनिया की दो सबसे अधिक आबादी वाले देशों (भारत और चीन) को प्रतिद्वंद्वी (Rivals) के बजाय साझेदार (Partners) के रूप में काम करना चाहिए।” उन्होंने दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास को गहरा करने और एक-दूसरे के विकास को अवसर के रूप में देखने की वकालत की।
मोदी और पुतिन की गोपनीय बातचीत
India Russia China alliance SCO समिट के बाद, मोदी और पुतिन के बीच एक निजी और महत्वपूर्ण मुलाकात हुई। पुतिन ने अपनी लग्जरी कार औरस लिमोजिन (Aurus Limousine) में मोदी को साथ बैठाया और दोनों नेताओं ने लगभग 50 मिनट तक एकांत में बातचीत की। इस दौरान, पुतिन ने मोदी को अलास्का में ट्रम्प के साथ हुई अपनी हालिया मुलाकात की जानकारी दी। हालांकि, उन्होंने इस बातचीत का ब्योरा सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया। मॉस्को के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात दोनों नेताओं के बीच सबसे गोपनीय और महत्वपूर्ण थी, जिसमें वैश्विक कूटनीति और आर्थिक रणनीतियों (Geopolitical and Economic Strategies) से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा हुई।
इस मुलाकात से पहले, समिट के दौरान दोनों नेताओं ने अनौपचारिक रूप से भी बातचीत की और एक-दूसरे को गले लगाकर अपनी दोस्ती का प्रदर्शन किया। यह दृश्य भारत और रूस के बीच गहरे रिश्तों का प्रतीक था, जो ट्रम्प की टैरिफ नीति के बावजूद अडिग बना हुआ है।

ट्रम्प के सलाहकार की आपत्तिजनक टिप्पणी
Modi Putin Xi SCO meeting ट्रम्प के ट्रेड सलाहकार पीटर नवारो ने भारत, रूस और चीन के नेताओं की नजदीकियों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “मोदी का पुतिन और शी जिनपिंग के साथ खड़ा होना शर्मनाक है। भारत को रूस के बजाय अमेरिका के साथ होना चाहिए।” नवारो ने भारत पर रूसी तेल खरीदने और यूक्रेन युद्ध को बढ़ावा देने का आरोप लगाया, जिसे उन्होंने “मोदी का युद्ध” (Modi’s War) करार दिया।
भारत ने नवारो की टिप्पणी को खारिज करते हुए कहा कि वह अपनी रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) को बनाए रखेगा और किसी भी देश के दबाव में नहीं आएगा। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा, “हमारी नीतियां राष्ट्रीय हितों और वैश्विक स्थिरता को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं। रूस के साथ हमारा रिश्ता दशकों पुराना है और इसे किसी तीसरे देश के दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए।”
भारत पर 50% टैरिफ का प्रभाव
ट्रम्प प्रशासन ने भारतीय उत्पादों पर कुल 50% टैरिफ लगाया है, जिसमें 25% आधार टैरिफ (Base Tariff) और 25% अतिरिक्त टैरिफ शामिल है। ट्रम्प का दावा है कि भारत रूसी तेल खरीदकर उसे खुले बाजार में बेच रहा है, जिससे रूस को यूक्रेन युद्ध जारी रखने में मदद मिल रही है।
भारत ने इन आरोपों का खंडन किया है। विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा, “भारत की तेल खरीदारी बाजार की मांग और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर की जाती है। अमेरिका ने ही यूक्रेन युद्ध की शुरुआत में भारत को रूसी तेल आयात करने के लिए प्रोत्साहित किया था ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजार स्थिर रहे।” भारतीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पूरी ने कहा, “हमारी तेल खरीदारी राष्ट्रीय हितों और आर्थिक आवश्यकताओं पर आधारित है। यह वैश्विक तेल कीमतों को नियंत्रित करने में भी मदद करती है।”
उधर, चीन पर वर्तमान में 30% टैरिफ लागू है, जो भारत की तुलना में कम है। इससे भारत में यह धारणा बनी है कि ट्रम्प प्रशासन भारत के साथ दोहरा मापदंड (Double Standards)adopt कर रहा है, क्योंकि चीन भी रूसी तेल का बड़ा खरीदार है, लेकिन उसे समान दंड का सामना नहीं करना पड़ रहा है।



