
Mata Pannadhay Smriti Padyatra : मुंबई के थाने से शुरू होकर राजस्थान के पवित्र खाटूश्याम धाम तक आयोजित राष्ट्रधर्मी माता पन्नाधाय स्मृति पर्यावरण चेतना यात्रा का भव्य समापन खाटूश्यामजी में हुआ। इस अवसर पर यात्रा के ध्वज बाबा खाटूश्यामजी के चरणों में श्रद्धापूर्वक समर्पित किए गए। यह यात्रा न केवल पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने का एक अनूठा प्रयास रही, बल्कि माता पन्नाधाय के बलिदान और राष्ट्रधर्म की भावना को भी समाज तक पहुंचाने में सफल रही। खाटूश्याम धाम पहुंचने पर यात्रियों का हार्दिक स्वागत किया गया। पुजारी संघ सीकर के जिला अध्यक्ष शंकरलाल पुजारी, वरिष्ठ नागरिक परिसंघ के प्रदेश अध्यक्ष विद्याधर शर्मा, बी.एम.एस. के प्रदेश अध्यक्ष और राजस्थान गुर्जर महासभा के कार्यकारी अध्यक्ष मोहनलाल वर्मा ने पदयात्रियों का अभिनंदन किया। इस अवसर पर कमल सिंह सोलंकी और सीता नाथू सिंह सोलंकी सहित वरिष्ठ नागरिक परिसंघ राजस्थान, राजस्थान गुर्जर महासभा और प्रदेश पुजारी महासंघ के पदाधिकारियों ने भी यात्रियों की इस पहल की सराहना की और उनका सम्मान किया।
Khatu Shyam Ji environmental awareness yatra : आशापुरा मानव कल्याण ट्रस्ट के संस्थापक अध्यक्ष नानजी भाई गुर्जर ने बताया कि इस पदयात्रा में मुंबई (थाने) से खाटूश्याम धाम तक लगभग 1246 किलोमीटर की दूरी तय की गई। यात्रा में दीपक सोलंकी (कुंभलगढ़, राजसमंद), भैरव सिंह सिसोदिया (सिसोदिया, राजसमंद), और निखिल राठौर (जोधपुर) ने हिस्सा लिया। पदयात्रियों ने अपने इस सफर के दौरान माता पन्नाधाय के बलिदान की गाथा और पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश समाज के हर वर्ग तक पहुंचाया। यह यात्रा मेवाड़ की पवित्र धरती से शुरू होकर बाबा खाटूश्यामजी के चरणों तक पहुंची, जो सामाजिक और पर्यावरणीय जागरूकता का प्रतीक बन गई।कार्यक्रम में वक्ताओं ने माता पन्नाधाय के व्यक्तित्व और उनके कृतित्व को याद किया। उन्होंने मांग की कि माता पन्नाधाय की वीरता और बलिदान की गाथा को राजस्थान और भारत सरकार की पाठ्यपुस्तकों में शामिल किया जाए, ताकि नई पीढ़ी उनके आदर्शों से प्रेरणा ले सके। माता पन्नाधाय, जिन्होंने मेवाड़ के राजकुमार उदय सिंह की रक्षा के लिए अपने पुत्र चंदन का बलिदान दे दिया था, भारतीय इतिहास में मातृ-बलिदान की अनूठी मिसाल हैं। उनकी कहानी न केवल राजस्थान की शौर्य गाथाओं का हिस्सा है, बल्कि यह देशभक्ति और त्याग का प्रतीक भी है।

पर्यावरण संरक्षण का संकल्प

Rajasthan environmental awareness campaign आशापुरा मानव कल्याण ट्रस्ट के इस अभियान का एक प्रमुख उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना है। नानजी भाई गुर्जर ने बताया कि राजसमंद जिले की कुंभलगढ़ तहसील के कालिंजर ग्राम पंचायत में राष्ट्रधर्मी माता पन्नाधाय वनस्थली विकसित की जा रही है। इस वनस्थली में अब तक 35,000 पौधे लगाए जा चुके हैं, और वर्ष 2025 में 1,25,000 पौधे लगाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। यह प्रयास न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि माता पन्नाधाय के बलिदान को एक स्थायी श्रद्धांजलि भी है।

सामाजिक जागरूकता और ट्रस्ट के प्रयास
Mata Pannadhay sacrifice story awareness आशापुरा मानव कल्याण ट्रस्ट की इस पहल की सभी वक्ताओं ने मुक्तकंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह यात्रा सामाजिक एकता, पर्यावरण जागरूकता और राष्ट्रधर्म की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। ट्रस्ट के इस प्रयास ने समाज के विभिन्न वर्गों को एकजुट किया और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना को प्रोत्साहित किया। इस यात्रा ने यह भी साबित किया कि सामाजिक कल्याण और पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास कितने प्रभावी हो सकते हैं।

आभार और भविष्य की योजनाएं
Ashapura Manav Kalyan Trust initiatives कार्यक्रम के समापन पर वरिष्ठ नागरिक परिसंघ राजस्थान के अध्यक्ष विद्याधर शर्मा ने सभी पदयात्रियों, आयोजकों, और उपस्थित अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस यात्रा को एक ऐतिहासिक कदम बताया और आशापुरा मानव कल्याण ट्रस्ट के भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं दीं। यह यात्रा न केवल माता पन्नाधाय के बलिदान को सम्मान देने का माध्यम बनी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता के लिए एक प्रेरणा स्रोत के रूप में भी उभरी।



