
SI Bharti Rajasthan : राजस्थान हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 2021 की सब इंस्पेक्टर (SI) भर्ती को रद्द करने के एकलपीठ के फैसले पर सोमवार को अंतरिम रोक लगा दी। यह आदेश उन ट्रेनी सब इंस्पेक्टरों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जिन्होंने एकलपीठ के फैसले को चुनौती दी थी। जस्टिस एस.पी. शर्मा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ अब इस मामले में अमर सिंह और अन्य ट्रेनी सब इंस्पेक्टरों की अपील पर विस्तृत सुनवाई करेगी। यह मामला भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाता है, साथ ही उन हजारों उम्मीदवारों के भविष्य को प्रभावित करता है, जिन्होंने इस भर्ती में हिस्सा लिया था।
Rajasthan High Court SI recruitment case पिछले महीने, राजस्थान हाईकोर्ट की एकलपीठ, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस समीर जैन ने की थी, ने 2021 की सब इंस्पेक्टर भर्ती को रद्द करने का महत्वपूर्ण आदेश दिया था। यह भर्ती 859 पदों के लिए आयोजित की गई थी, लेकिन इसमें बड़े पैमाने पर पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोप लगे थे। एकलपीठ ने अपने फैसले में कहा था कि भर्ती प्रक्रिया की अखंडता को गंभीर नुकसान पहुंचा है, और इसमें राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के कुछ सदस्यों की मिलीभगत शामिल थी। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया था कि 2021 की भर्ती के 859 पदों को नई भर्ती में जोड़ा जाए, और प्रभावित उम्मीदवारों को आयु सीमा में छूट के साथ दोबारा आवेदन करने का मौका दिया जाए। एकलपीठ ने यह भी उल्लेख किया था कि RPSC के छह पूर्व सदस्यों की संलिप्तता और पेपर लीक की व्यापकता ने पूरी प्रक्रिया को दूषित कर दिया है। कोर्ट ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए RPSC के कामकाज में सुधार के लिए सुझाव भी दिए थे।
ट्रेनी सब इंस्पेक्टरों की अपील
RPSC SI recruitment 2021 cancellation एकलपीठ के इस फैसले से असहमत ट्रेनी सब इंस्पेक्टरों ने डिवीजन बेंच में अपील दायर की। उनकी अपील में कहा गया कि पूरी भर्ती को रद्द करना उन उम्मीदवारों के साथ अन्याय है, जिन्होंने पूरी ईमानदारी से परीक्षा दी और चयन प्रक्रिया को पूरा किया। अपीलकर्ताओं ने निम्नलिखित प्रमुख तर्क रखे:
- सीमित अनियमितताएं: अपील में दावा किया गया कि विशेष ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की जांच में केवल 68 उम्मीदवारों की संलिप्तता पाई गई, जो कुल चयनित उम्मीदवारों का केवल 6.3% है। ऐसे में, पूरी भर्ती को रद्द करने के बजाय दोषी उम्मीदवारों को अलग करना संभव है।
- पेपर लीक का सीमित दायरा: अपीलकर्ताओं का कहना है कि पेपर लीक का दायरा उतना व्यापक नहीं था, जितना एकलपीठ ने माना। लीक हुआ पेपर केवल RPSC सदस्यों के बच्चों और कुछ रिश्तेदारों तक ही सीमित था।
- कानूनी अधिकार: ट्रेनी सब इंस्पेक्टरों ने तर्क दिया कि भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें नियुक्ति दी जा चुकी थी, जिससे उनके कानूनी अधिकार सृजित हो गए हैं। उनकी नियुक्ति को रद्द करना संवैधानिक रूप से गलत है।
- करियर पर प्रभाव: कई ट्रेनी सब इंस्पेक्टरों ने अपनी पिछली सरकारी या निजी नौकरियां छोड़कर इस भर्ती में हिस्सा लिया था। पूरी भर्ती रद्द होने से उनके करियर और आर्थिक स्थिरता पर गहरा असर पड़ेगा।
अपीलकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर.एन. माथुर, कमलाकर शर्मा, अलंकृता शर्मा और तनवीर अहमद डिवीजन बेंच में उनका पक्ष रखेंगे।

याचिकाकर्ताओं का पक्ष
Rajasthan SI paper leak case 2021 एकलपीठ में जिन याचिकाकर्ताओं ने भर्ती रद्द करने की मांग की थी, उन्होंने डिवीजन बेंच में कैविएट दायर कर रखी है। उनके वकील हरेन्द्र नील ने कहा कि एकलपीठ ने सभी पक्षों को सुनने के बाद गहन जांच के आधार पर फैसला दिया था। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उस निर्णय का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि यदि सही और गलत उम्मीदवारों को अलग करना संभव नहीं है, तो पूरी भर्ती को रद्द करना ही उचित है।
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि 2021 की भर्ती में पेपर लीक और अनियमितताएं इतने बड़े स्तर पर थीं कि पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता खत्म हो गई थी। पेपर WhatsApp और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सर्कुलेट हो रहा था, और इसमें संगठित रैकेट्स, जैसे “Bluetooth गैंग”, शामिल थे। Rajasthan SI trainees High Court appeal
सरकार और SOG की भूमिका
RPSC SI recruitment court case update राजस्थान सरकार ने एकलपीठ में भर्ती रद्द करने का विरोध किया था। सरकार का कहना था कि SOG की जांच में केवल 68 उम्मीदवारों की संलिप्तता पाई गई थी, और पूरी भर्ती को रद्द करने के बजाय दोषी उम्मीदवारों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। SOG ने 122 लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें 55 ट्रेनी सब इंस्पेक्टर और RPSC के दो पूर्व सदस्य शामिल थे। एकलपीठ ने सरकार के इस तर्क को खारिज करते हुए कहा था कि भर्ती प्रक्रिया की अखंडता को इतना नुकसान पहुंचा है कि इसे बचाना संभव नहीं है। कोर्ट ने RPSC के सदस्यों की मिलीभगत को “घर का बेदी लंका ढाए” कहावत से जोड़ा था।



