Gram Panchayat Reorganization : प्रदेश में सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन व नवसृजन की प्रक्रिया में राजसमंद जिले में 74 नई ग्राम पंचायतें बनी है, जबकि 130 ग्राम पंचायतों में गांव इधर उधर हो गए हैं। पहले 206 ग्राम पंचायतें थी, जो अब बढ़कर 280 ग्राम पंचायत हो गई है। इसके अलावा एक ग्राम पंचायत का रेलमगरा से राजसमंद ब्लॉक में जोड़ा गया है, जबकि एक ग्राम पंचायत का नाम बदला गया है। ग्राम पंचायतों के गठन व किए गए बदलाव को लेकर राजनीतिक क्षेत्र में गहमागहमी का माहौल बन गया है। विपक्ष का आरोप है कि भाजपा के वोट ध्रुवीकरण का प्रयास किया है, जिससे आमजन में आक्रोश है, जबकि सत्तारुढ़ भाजपा का कहना है कि ग्राम पंचायतों का गठन आमजन की सुविधा को देखते हुए किया गया हैं। खैर नई ग्राम पंचायतों का गठन तो हो गया है, अब इसका फायदा और नुकसान जनता को कितना मिल पाता है, यह तो चुनाव के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
शासन सचिव डॉ. जाेगाराम द्वारा 20 नवंबर को जारी नोटिफिकेशन के तहत राजसमंद जिले की ग्राम पंचायतों में बड़ा बदलाव हुआ है। इस बदलाव को लेकर राजनीतिक हलके में अलग अलग प्रतिक्रियाएं हो रही है, तो दूसरी तरफ नई पंचायतों के गठन होने से गांवों में अधिकाधिक कार्यकर्ताओं को संतुष्ट कर पाने में दल सफल हो सकेंगे। ज्यादा से ज्यादा कार्यकर्ताओं को पंच, सरपंच बनने का मौका मिलेगा और ग्राम पंचायतें छोटी होने से गांवों के ज्यादा विकास की उम्मीद भी रहेगी। इस तरह कहीं न कहीं नई ग्राम पंचायतों का गठन ग्रामीण क्षेत्र के समग्र विकास के रास्ते जरूर खोलेगी। ग्राम पंचायतों के पुर्नगठन व नवसृजन की प्रक्रिया के बाद अब राजसमंद जिले में कुल 280 ग्राम पंचायतें हो जाएगी, जिससे राजसमंद जिले में पंचायतीराज महकमे का बजट भी बढ़ जाएगा, जो समग्र गांवों के लिए राहतभरा है।
कानादेव का गुड़ा पंचायत का नाम बदला
Newly Formed Gram Panchayats in Rajsamand : राजसमंद ब्लॉक में कानादेव का गुड़ा ग्राम पंचायत का नाम बदलकर काडा का तालाब कर दिया गया है, जो काफी चर्चा का विषय रहा है कि आखिर इस पंचायत का नाम क्यों बदला गया। जबकि कानादेव का गुड़ा गांव में ग्राम पंचायत कार्यालय से लेकर तमाम सरकारी कार्यालय पटवार सर्कल, कृषि केंद्र, उप स्वास्थ्य केंद्र तक खुल चुके हैं। अब भले ही पंचायत का नाम काडा का तालाब रहेगा, मगर ग्राम पंचायत कार्यालय से लेकर सभी कार्यालय तो कानादेव का गुड़ा में ही रहेंगे, जिससे आमजन को क्या सराकोर है। इसको लेकर चर्चा है। गहलोत सरकार में फरारा ग्राम पंचायत से कानादेव का गुड़ा गांव को अलग कर नई ग्राम पंचायत बनाया गया था, मगर अब प्रदेश की भजनलाल सरकार में उसी ग्राम पंचायत के नाम में बदलाव किया गया है।
एक ही नाम तीन गांव बने ग्राम पंचायतें
Rajasthan Panchayat Notification 2025 : ग्राम पंचायताें नवसृजन और पुनर्गठन की प्रक्रिया में सोनियाणा गांव का नाम बड़ा ही लक्की रहा। तभी तो कुंभलगढ़, रेलमगरा और राजसमंद पंचायत समिति क्षेत्र के तीनों ही सोनियाणा नामक गांव ग्राम पंचायतें बन गई। हालांकि दोहरे नाम की वजह से विभागीय कामकाज में भ्रम की स्थिति भी बन सकती है। जैसा ही पनोतिया गांव भी दो है, एक रेलमगरा और दूसरा आमेट ब्लॉक में और दोनों ही ग्राम पंचायतें है।
7 पंचायतों को ब्यावर जिले में मिलाया
राजसमंद जिले में पहले कुल 213 पंचायतें थीं। इनमें से भीम विधानसभा क्षेत्र की 7 पंचायतों को नवगठित ब्यावर जिले में शामिल कर दिया गया, जिसके बाद राजसमंद जिले में पंचायतों की संख्या घटकर 206 रह गई। इसके बाद राजस्थान की भाजपा सरकार द्वारा नई पंचायतों का गठन किया गया, जिसमें राजसमंद जिले में 74 नई पंचायतें बनाई गईं। इस प्रकार अब राजसमंद जिले में कुल 280 पंचायतें हो गई हैं।
74 नई पंचायतें और 130 में बदले गांव
Rajsamand New Gram Panchayats List : आमेट ब्लॉक
11 नई ग्राम पंचायत : बांडा, आगरिया का वाड़ा, टीकड़, देवड़ो का गुड़ा, भीलमगरा, बल्लो का खेड़ा, ढेलाणा, सेफटिया, सेंगनवास, साकरोदा, मुरड़ा
नई ग्राम पंचायत का गठन अच्छी बात है, ज्यादा से ज्यादा बजट गांवों को मिलेगा। इससे गांवों के पास ग्राम पंचायत कार्यालय व अन्य तमाम सुविधाएं मिलेगी। साथ ही मॉनिटरिंग भी प्रभावी तरीके से हो सकेगी। इसलिए ज्यादा से ज्यादा ग्राम पंचायत बननी ही चाहिए। गहलोत सरकार द्वारा इसीलिए तो नए जिले भी बनाए और नई पंचायतें और पंचायत समितियों का गठन किया था। हालांकि इस बार भाजपा सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों के गठन के दौरान ग्रामीणों के विरोध को नजरअंदाज कर किया गया, जो अनुचित है। क्योंकि कुछ जगह नई ग्राम पंचायतें बनी है, मगर ग्राम पंचायत कार्यालय पहले से ज्यादा दूर हो गए हैं। इसलिए नई ग्राम पंचायतों का गठन बिना राजनीति से प्रेरित होना चाहिए, तभी आमजन को पूरा फायदा मिल सकता है।
हरिसिंह राठौड़, जिलाध्यक्ष कांग्रेस राजसमंद
नई पंचायतों से आमजन को मिलेगा फायदा
नवसृजित व नवगठित ग्राम पंचायतों का गठन गांव ढाणी के आम भाजपा कार्यकर्ता व आमजन से रायसुमारी करने के बाद किया गया है। छोटी ग्राम पंचायतें होने से ज्यादा बजट आएगा और गांवों का समग्र विकास हो सकेगा। प्रदेश की भजनलाल सरकार द्वारा सबका साथ सबका विकास की भावना से नई ग्राम पंचायतों के गठन के प्रस्ताव भेजे और उसी अनुरुप सरकार द्वारा मंजूरी भी दी गई है। आने वाले दिनों में इसका फायदा भाजपा को मिलेगा, चाहे नगर निकाय चुनाव हो या पंचायत चुनाव, सब जगह भाजपा का परचम लहराएगा।
जगदीश पालीवाल, जिलाध्यक्ष भाजपा राजसमंद
पंचायतों के गठन में वोटो का ध्रुवीकरण
राजसमंद जिले में नई ग्राम पंचायतों के गठन का कदम अच्छा है, मगर ज्यादातर पंचायतों का गठन राजनीति से प्रेरित होकर किया गया है। वोटो को बांटने का प्रयास किया है। नई पंचायतों का गठन कर दिया, मगर वास्तव में तो इसका फायदा तभी मिलेगा, जब गांवों में ग्राम पंचायत कार्यालय बनेंगे और साथ ही चिकित्सा, कृषि, पटवार आदि कार्यायल खुलेंगे। जब तक गांव के लोगों की भावना को ध्यान में रखकर ग्राम पंचायतों का गठन नहीं होगा, तब तक समग्र विकास होना असंभव है।
प्रभुदयाल नागर, जिला उपाध्यक्ष कांग्रेस कमेटी राजसमंद
नई पंचायतों के गठन से गांवों को होगा सर्वांगीण विकास
प्रदेश व राजसमंद जिले में 74 नई ग्राम पंचायतें बनी है, जिससे गांवों के विकास का बजट स्वत: बढ़ जाएगा। विपक्ष का काम केवल अर्नगल बयानबाजी करना है, जबकि भाजपा तो विकास में विश्वास रखती है। नई पंचायतों का गठन होने से गांवों के लोगों को अब चिकित्सा, कृषि, ग्राम पंचायत आदि कार्य के लिए दूर गांवों में नहीं जाना पड़ेगा। साथ ही अधिकाधिक लोगों कां पंच, सरपंच बनने का मौका मिलेगा।
Laxman Singh Rathor को पत्रकारिता के क्षेत्र में दो दशक का लंबा अनुभव है। 2005 में Dainik Bhakar से कॅरियर की शुरुआत कर बतौर Sub Editor कार्य किया। वर्ष 2012 से 2019 तक Rajasthan Patrika में Sub Editor, Crime Reporter और Patrika TV में Reporter के रूप में कार्य किया। डिजिटल मीडिया www.patrika.com पर भी 2 वर्ष कार्य किया। वर्ष 2020 से 2 वर्ष Zee News में राजसमंद जिला संवाददाता रहा। आज ETV Bharat और Jaivardhan News वेब पोर्टल में अपने अनुभव और ज्ञान से आमजन के दिल में बसे हैं। लक्ष्मण सिंह राठौड़ सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि खबरों की दुनिया में एक ब्रांड हैं। उनकी गहरी समझ, तथ्यात्मक रिपोर्टिंग, पाठक व दर्शकों से जुड़ने की क्षमता ने उन्हें पत्रकारिता का चमकदार सितारा बना दिया है।
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