
Rajasthan Panchayat elections : राजस्थान में पंचायतीराज संस्थाओं के बहुप्रतीक्षित चुनावों को लेकर हलचल तेज हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission) ने ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों के चुनावों की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंचा दी हैं। सूत्रों के अनुसार आयोग 25 फरवरी के बाद कभी भी चुनाव कार्यक्रम (Election Schedule) घोषित कर सकता है। जैसे ही कार्यक्रम की घोषणा होगी, पूरे प्रदेश में आचार संहिता (Model Code of Conduct) प्रभावी हो जाएगी। बताया जा रहा है कि 25 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची (Final Voter List) का प्रकाशन किया जाना है। इसके बाद 28 फरवरी या मार्च के पहले सप्ताह में चुनावों की औपचारिक घोषणा होने की प्रबल संभावना है। इसी के साथ चुनावी प्रक्रिया का पहिया तेज गति से घूमने लगेगा।
1 लाख से अधिक वार्ड पंच और 14,635 सरपंच पदों पर होगा चुनाव
Rajasthan Sarpanch election date : राज्य में हाल ही में 3,441 नई ग्राम पंचायतों का गठन किया गया है। इसके बाद कुल ग्राम पंचायतों की संख्या बढ़कर 14,635 हो गई है। पंचायत परिसीमन (Delimitation) के बाद 45,000 से अधिक नए वार्ड बनाए गए हैं, जिससे वार्ड पंचों के पदों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अब प्रदेश में वार्ड पंचों की कुल संख्या एक लाख से अधिक हो चुकी है।
इन चुनावों में:
- 1 लाख से ज्यादा वार्ड पंच
- 14,635 सरपंच चुने जाएंगे। विशेष बात यह है कि इस बार लगभग 45 हजार नए वार्ड पंच पहली बार निर्वाचित होंगे, जिससे पंचायत स्तर पर नेतृत्व का नया चेहरा देखने को मिलेगा।
पंचायत समितियां और जिला परिषदें भी चुनावी प्रक्रिया में शामिल
Rajasthan Gram Panchayat election schedule : पंचायतीराज ढांचे में हुए विस्तार के बाद 85 नई पंचायत समितियां और 8 नई जिला परिषदों का गठन किया गया है। इसके साथ ही अब प्रदेश में कुल:
- 450 पंचायत समितियां
- 41 जिला परिषदें हो गई हैं।
मार्च में होने वाले चुनावों के दौरान:
- 29 जिला परिषदों में जिला परिषद सदस्य और जिला प्रमुख चुने जाएंगे।
- लगभग 400 पंचायत समितियों में सदस्य और प्रधान पदों पर मतदान होगा।
कुछ जिला परिषदों का कार्यकाल बाद में पूर्ण होने के कारण वहां चुनाव फिलहाल स्थगित रहेंगे।
पंच और सरपंच चुनाव बैलेट से, अन्य पदों पर EVM
Rajasthan Panchayat elections ballot paper : इस बार चुनावी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। वार्ड पंच और सरपंच के चुनाव EVM (Electronic Voting Machine) के बजाय पारंपरिक बैलेट पेपर (Ballot Paper) से करवाए जाएंगे। हालांकि जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव EVM से ही होंगे। राज्य निर्वाचन आयोग पहले ही जिला कलेक्टरों को भेजी गई गाइडलाइन में इस संबंध में स्पष्ट निर्देश दे चुका है, जिससे चुनावी तैयारियां उसी अनुरूप की जा रही हैं।
एक साल पहले पूरा हो चुका है कई पंचायतों का कार्यकाल
Rajasthan Panchayat election latest news : राज्य की अधिकांश पंचायतों का कार्यकाल लगभग एक वर्ष पूर्व समाप्त हो चुका है। चुनाव समय पर नहीं होने के कारण पूर्व सरपंचों और वार्ड पंचों की समितियां बनाकर उन्हें ही प्रशासक (Administrator) की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं पंचायत समितियों और जिला परिषदों में प्रशासनिक अधिकारियों को प्रशासक नियुक्त किया गया है।

चुनाव में देरी से अटका 3000 करोड़ का फंड
पंचायतीराज चुनाव समय पर नहीं होने का आर्थिक प्रभाव भी सामने आया है। केंद्रीय वित्त आयोग (Central Finance Commission) द्वारा राजस्थान को मिलने वाला लगभग 3000 करोड़ रुपये का फंड चुनाव लंबित होने के कारण रोक दिया गया है। अब चुनाव सम्पन्न होने के बाद इस रुके हुए फंड के जारी होने की संभावना बढ़ गई है, जिससे ग्रामीण विकास कार्यों को गति मिल सकेगी।
विपक्ष का सरकार पर हमला, ‘हार के डर’ के आरोप
चुनाव में देरी को लेकर विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस, राज्य सरकार पर लगातार हमलावर रही है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ‘हार के डर’ से निकाय और पंचायतीराज चुनाव टालती रही। पहले सरकार ने ‘One State, One Election’ का प्रस्ताव रखकर सभी चुनाव एक साथ कराने की बात कही थी। इसी कारण जिन संस्थाओं का कार्यकाल पूरा हो चुका था, वहां प्रशासक नियुक्त किए गए। हालांकि संवैधानिक प्रावधानों और न्यायालय के निर्देशों के बाद अब चुनाव करवाना अनिवार्य हो गया है।
संवैधानिक बाध्यता और सुप्रीम कोर्ट के आदेश
संविधान के अनुसार पंचायतीराज और निकाय चुनाव हर पांच वर्ष में करवाना अनिवार्य है। आपात स्थिति में भी अधिकतम छह माह तक ही चुनाव टाले जा सकते हैं। इस मामले में पहले हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई थीं। सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल तक चुनाव करवाने के स्पष्ट आदेश दिए हैं, जिसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनावी तैयारियों को गति दी है।
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