
IBJA Gold Silver Price Falling : अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच सोने और चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट का दौर जारी है। सुरक्षित निवेश माने जाने वाले इन दोनों कीमती धातुओं में पिछले कुछ दिनों से लगातार कमजोरी देखी जा रही है। शुक्रवार को भी सोने और चांदी के दाम में बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिससे बाजार में हलचल बढ़ गई है।
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, शुक्रवार को 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत 2,490 रुपए गिरकर 1.44 लाख रुपए पर आ गई। इससे पहले बुधवार को यही सोना करीब 1.46 लाख रुपए पर बिक रहा था। यानी केवल दो दिन में सोने के दाम में बड़ी नरमी देखने को मिली है। वहीं, एक किलो चांदी की कीमत 9,114 रुपए घटकर 2.25 लाख रुपए पर पहुंच गई। इससे पहले 25 मार्च को चांदी का भाव 2.35 लाख रुपए प्रति किलो था। इस तरह चांदी में भी एक झटके में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जो निवेशकों और कारोबारियों दोनों के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है।
28 दिनों में सोना 15 हजार और चांदी 41 हजार रुपए सस्ती
SILVER PRICE TODAY : कीमतों में यह गिरावट केवल एक दिन की नहीं है, बल्कि पिछले कुछ सप्ताह से जारी है। अमेरिका-ईरान जंग और वैश्विक अनिश्चितता के बीच पिछले 28 दिनों में सोना 15,382 रुपए तक सस्ता हो चुका है। वहीं चांदी में करीब 41 हजार रुपए की गिरावट आई है। इतनी बड़ी गिरावट ने बाजार के रुख को पूरी तरह बदल दिया है।
आमतौर पर युद्ध या वैश्विक संकट के समय सोने-चांदी की कीमतों में तेजी देखी जाती है, लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग नजर आ रही है। निवेशक फिलहाल जोखिम से बचने और नकदी बढ़ाने की रणनीति अपनाते दिख रहे हैं।
अलग-अलग शहरों में क्यों अलग होते हैं सोने के दाम
SILVER RATE FALL : देश के अलग-अलग शहरों में सोने की कीमतें एक जैसी नहीं होतीं। इसके पीछे कई स्थानीय और व्यावहारिक कारण होते हैं। सबसे पहला कारण ट्रांसपोर्टेशन और सिक्योरिटी कॉस्ट है। सोने को एक शहर से दूसरे शहर तक सुरक्षित पहुंचाने में ईंधन, लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा पर खर्च आता है। आयात केंद्रों से दूरी बढ़ने पर यह लागत और ज्यादा हो जाती है, जिसका असर स्थानीय कीमतों पर पड़ता है।
दूसरा कारण खरीदारी की मात्रा है। दक्षिण भारत जैसे क्षेत्रों में सोने की खपत अधिक होती है। बड़े स्तर पर खरीदारी होने के कारण ज्वेलर्स को कुछ छूट मिल जाती है, जिसका फायदा कभी-कभी ग्राहकों तक भी पहुंचता है। इसी वजह से कुछ शहरों में सोने की कीमत थोड़ी कम नजर आती है। तीसरा कारण लोकल ज्वेलरी एसोसिएशन हैं। अलग-अलग राज्यों और शहरों की अपनी ज्वेलरी एसोसिएशन होती हैं, जो स्थानीय मांग, सप्लाई और कारोबार की परिस्थितियों को देखते हुए दाम तय करने में भूमिका निभाती हैं। चौथा कारण पुराना स्टॉक और खरीद मूल्य है। जिन ज्वेलर्स के पास पुराने और कम कीमत पर खरीदे गए स्टॉक मौजूद होते हैं, वे ग्राहकों को अपेक्षाकृत कम रेट पर सोना बेच सकते हैं।

ऑल टाइम हाई से 32 हजार रुपए नीचे आया सोना
IRAN WAR GOLD PRICE IMPACT : इस साल की शुरुआत में सोने में जोरदार तेजी देखने को मिली थी। 31 दिसंबर 2025 को सोने की कीमत करीब 1.33 लाख रुपए थी, जो बढ़ते-बढ़ते 29 जनवरी 2026 को अपने ऑल टाइम हाई 1.76 लाख रुपए तक पहुंच गई। हालांकि इसके बाद बाजार में मुनाफावसूली बढ़ी और अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच निवेशकों की रणनीति बदली, जिससे सोना लगातार नीचे आने लगा।
मौजूदा समय में सोना अपने उच्चतम स्तर से करीब 32 हजार रुपए तक सस्ता हो चुका है। यानी जिन्होंने ऊंचे स्तर पर खरीदारी की थी, उनके लिए यह गिरावट चिंता का कारण बन सकती है, जबकि नए खरीदारों के लिए यह अवसर के रूप में देखी जा रही है।
चांदी में सोने से भी ज्यादा तेज गिरावट
चांदी के दाम में सोने की तुलना में कहीं ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। आंकड़ों के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 को चांदी की कीमत करीब 2.30 लाख रुपए प्रति किलो थी। इसके बाद तेजी का सिलसिला जारी रहा और 29 जनवरी 2026 को यह बढ़कर 3.86 लाख रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई।
लेकिन इसके बाद चांदी में बड़ी गिरावट शुरू हुई और अब यह काफी नीचे आ चुकी है। पिछले 57 दिनों में चांदी करीब 1.60 लाख रुपए तक सस्ती हो गई है। यह गिरावट बताती है कि चांदी का बाजार फिलहाल भारी दबाव में है और निवेशकों का रुझान कमजोर पड़ा है।
इस बार जंग के बावजूद क्यों टूटे सोना-चांदी के दाम
आमतौर पर युद्ध या तनावपूर्ण हालात में निवेशक सोना-चांदी जैसी सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख करते हैं, जिससे इनके दाम बढ़ते हैं। लेकिन इस बार स्थिति कुछ अलग रही है। पहला बड़ा कारण कैश पर बढ़ता भरोसा माना जा रहा है। मिडिल ईस्ट में जंग जैसे हालात के बीच निवेशक जोखिम घटाना चाहते हैं। ऐसे में वे अपने गोल्ड और सिल्वर होल्डिंग्स बेचकर नकदी इकट्ठा कर रहे हैं, ताकि अनिश्चित हालात में उनके पास तरल पैसा उपलब्ध रहे। दूसरा कारण प्रॉफिट बुकिंग है। जनवरी में सोना और चांदी रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए थे। ऐसे में बड़े निवेशकों ने ऊंचे दामों पर अपनी होल्डिंग बेचनी शुरू कर दी। इससे बाजार में सप्लाई बढ़ी और कीमतों पर दबाव बन गया। तीसरा कारण अमेरिकी ब्याज दरों का असर है। अमेरिका में फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति और ब्याज दरों को लेकर सतर्क रुख का असर भी कीमती धातुओं पर पड़ा है। जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो निवेशक गोल्ड-सिल्वर की बजाय दूसरे विकल्पों की ओर भी रुख करते हैं।
एक्सपर्ट ने दी सतर्क रहने की सलाह
कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक, सोने और चांदी की कीमतों में यह गिरावट आगे भी जारी रह सकती है। उनका मानना है कि फिलहाल निवेशकों को बहुत सोच-समझकर कदम उठाना चाहिए। जल्दबाजी में निवेश करने से नुकसान हो सकता है, खासकर तब जब बाजार लगातार दबाव में हो।
ऐसे में जिन निवेशकों का उद्देश्य केवल अल्पकालिक लाभ कमाना है, उन्हें अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। वहीं, जो लोग शादी-ब्याह या व्यक्तिगत उपयोग के लिए खरीदारी करना चाहते हैं, वे कीमतों की चाल पर नजर रखते हुए सही समय का इंतजार कर सकते हैं।

सोना खरीदते समय इन दो बातों का जरूर रखें ध्यान
सोना खरीदते समय सबसे पहली और जरूरी बात यह है कि हमेशा BIS हॉलमार्क वाला सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। हॉलमार्क यह बताता है कि सोना कितने कैरेट का है और उसकी शुद्धता कितनी है। हॉलमार्क नंबर आमतौर पर अल्फान्यूमेरिक फॉर्मेट में होता है, जैसे AZ4524।
दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि खरीदारी से पहले कीमत क्रॉस चेक जरूर करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है। इसलिए किसी भी ज्वेलर से खरीदने से पहले उस दिन का रेट विश्वसनीय स्रोतों, जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट, से मिलान कर लेना चाहिए।
असली चांदी की पहचान करने के आसान तरीके
चांदी खरीदते समय उसकी शुद्धता की जांच भी बेहद जरूरी है। इसके लिए कुछ आसान घरेलू तरीके अपनाए जा सकते हैं। पहला है मैग्नेट टेस्ट। असली चांदी चुंबक से नहीं चिपकती। अगर चिपकती है, तो उसमें मिलावट हो सकती है।
दूसरा है आइस टेस्ट। चांदी पर बर्फ रखने पर अगर वह तेजी से पिघलती है, तो यह असली चांदी होने का संकेत माना जाता है। तीसरा है स्मेल टेस्ट। असली चांदी में किसी तरह की गंध नहीं होती, जबकि नकली या मिलावटी चांदी में कॉपर जैसी गंध आ सकती है। चौथा है क्लॉथ टेस्ट। चांदी को सफेद कपड़े से रगड़ने पर काला निशान आता है, तो यह असली चांदी की पहचान हो सकती है।
बाजार में आगे भी रह सकती है हलचल
कुल मिलाकर, सोने और चांदी की कीमतों में आई यह बड़ी गिरावट बाजार के लिए बड़ा संकेत मानी जा रही है। जहां एक ओर खरीदारों को राहत मिली है, वहीं निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ गई है। ईरान जंग, अमेरिकी नीतियां, वैश्विक बाजार का रुख और निवेशकों की रणनीति आने वाले दिनों में भी सोना-चांदी की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
फिलहाल की स्थिति यह बताती है कि कीमती धातुओं का बाजार अस्थिर बना हुआ है। ऐसे में निवेश करने या खरीदारी करने से पहले बाजार की चाल, शुद्धता और सही कीमत की जानकारी लेना बेहद जरूरी होगा।



