
friend dies shock death : पाली जिले से एक बेहद भावुक कर देने वाली खबर सामने आई है, जहां गहरी दोस्ती का ऐसा उदाहरण देखने को मिला जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। यहां एक दोस्त की मौत की खबर सुनने के बाद दूसरे दोस्त ने भी महज 12 घंटे के भीतर दम तोड़ दिया। दोनों की जिंदगी का सफर बचपन से लेकर अंतिम संस्कार (Funeral) तक साथ रहा और अब उनकी कहानी पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।
जानकारी के अनुसार, बीजापुर क्षेत्र के भन्दर गांव निवासी 68 वर्षीय धनराज त्रिवेदी का रविवार सुबह करीब 4 बजे हार्ट अटैक (Heart Attack) के चलते निधन हो गया। उनके अचानक हुए निधन से गांव में शोक की लहर दौड़ गई। जैसे ही यह दुखद समाचार उनके करीबी मित्र 74 वर्षीय देवराज दवे तक पहुंचा, वे गहरे सदमे में आ गए और उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। बताया जा रहा है कि रविवार शाम करीब 4 बजे देवराज दवे सुमेरपुर के पास नोवी गांव से अपने गांव भन्दर लौट रहे थे, तभी रास्ते में उनकी तबीयत खराब हो गई। घर पहुंचने पर परिजनों ने बिना देरी किए उन्हें अस्पताल (Hospital) पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों के प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। इस तरह अपने दोस्त के गम में उन्होंने भी दुनिया को अलविदा कह दिया।
स्कूल से शुरू हुई दोस्ती, मुंबई तक साथ निभाया
emotional friendship story : धनराज त्रिवेदी और देवराज दवे की दोस्ती बचपन से ही बेहद मजबूत और मिसाल देने वाली थी। दोनों ने एक ही स्कूल में साथ-साथ पढ़ाई की और युवावस्था में रोजगार की तलाश में मुंबई (Mumbai) चले गए। वहां दोनों ने मिलकर लंबे समय तक कपड़ों का व्यापार (Clothing Business) किया और आर्थिक रूप से खुद को मजबूत बनाया।

कोरोना काल के बाद गांव लौटे, खेती को बनाया सहारा
Pali Rajasthan news : कोरोना काल (Corona Period) के बाद दोनों मित्र अपने पैतृक गांव भन्दर लौट आए और खेती-किसानी (Farming) में जुट गए। गांव में भी दोनों का साथ पहले जैसा ही बना रहा। उनके घर भी एक ही गली में स्थित हैं, जिससे उनका रोजाना मिलना-जुलना जारी रहता था। यही नहीं, दोनों परिवारों के बीच भी गहरा पारिवारिक संबंध और अपनापन था।
परिवार में भी गहरा जुड़ाव, एक जैसी पारिवारिक जिम्मेदारियां
two friends died same day : दोनों मित्रों के परिवारों में भी समानता देखने को मिलती है। धनराज और देवराज, दोनों के दो-दो बेटे और एक-एक बेटी हैं। धनराज का एक बेटा अभी भी मुंबई में कार्यरत है। परिवारों के बीच वर्षों से चला आ रहा यह अपनापन उनके रिश्ते को और भी खास बनाता था। एडवोकेट मुकेश बोहरा के अनुसार, परिजन दोनों दोस्तों का अंतिम संस्कार एक साथ करना चाहते थे। हालांकि, कुछ पारिवारिक कारणों से समय में थोड़ा अंतर रहा। तेज गर्मी को देखते हुए शवों को सुरक्षित रखने के लिए डी-फ्रीजर (Deep Freezer) की व्यवस्था की गई। सोमवार सुबह 7:30 बजे धनराज त्रिवेदी का अंतिम संस्कार किया गया, जबकि देवराज दवे के परिजनों के आने में देरी के चलते उनका अंतिम संस्कार सुबह 11:30 बजे किया गया।
दोस्ती की कहानी बनी चर्चा का विषय
grief shock death case : इस घटना के बाद पूरे भन्दर गांव सहित आसपास के क्षेत्रों में शोक का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि दोनों की दोस्ती आज के समय में एक मिसाल थी, जो जीवन के हर पड़ाव पर साथ रही और अंत तक भी एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ा। यह घटना न सिर्फ एक भावुक कहानी है, बल्कि सच्ची दोस्ती, अपनापन और रिश्तों की गहराई को भी दर्शाती है—जहां एक दोस्त के जाने का गम दूसरे के लिए असहनीय साबित हुआ।



