
Beawar Shaheed Yuvraj Singh : राजस्थान के ब्यावर जिले में शुक्रवार का दिन भावुक कर देने वाला रहा। जम्मू-कश्मीर में आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए अग्निवीर युवराज सिंह चौहान की अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा। हर आंख नम थी, लेकिन हर हाथ तिरंगा थामे गर्व से ऊंचा उठा हुआ था। गांव-गांव से लोग अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई देने पहुंचे। पूरे क्षेत्र में “भारत माता की जय” और “शहीद युवराज अमर रहें” के नारों की गूंज सुनाई देती रही।
शहीद युवराज सिंह चौहान का शुक्रवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनकी पार्थिव देह जैसे ही ब्यावर पहुंची, लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। तिरंगा यात्रा के दौरान जगह-जगह पुष्प वर्षा कर शहीद को श्रद्धांजलि दी गई। कई स्थानों पर लोगों ने जेसीबी मशीनों पर चढ़कर फूल बरसाए और अपने वीर जवान को अंतिम सलाम किया।
आतंकियों से मुकाबले में शहीद हुए थे युवराज
Agniveer Martyr News : ब्यावर जिला मुख्यालय से करीब 22 किलोमीटर दूर स्थित लगेतखेड़ा गांव के रहने वाले 26 वर्षीय अग्निवीर युवराज सिंह चौहान जम्मू-कश्मीर के अखनूर सेक्टर में तैनात थे। ड्यूटी के दौरान आतंकियों के साथ मुठभेड़ में उन्होंने बहादुरी से मुकाबला किया और मातृभूमि की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए। उनकी शहादत की खबर जैसे ही गांव पहुंची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। गांव के लोग स्तब्ध रह गए। हर कोई अपने लाल की बहादुरी पर गर्व कर रहा था, लेकिन परिवार का दर्द देखकर हर आंख भर आई।
सैनिक विश्राम गृह से निकली भव्य तिरंगा यात्रा
Rajasthan Shaheed News : शुक्रवार सुबह करीब 10:30 बजे शहीद युवराज की पार्थिव देह ब्यावर स्थित एसडीएम कार्यालय परिसर के सैनिक विश्राम गृह पहुंची। यहां सेना के अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और हजारों लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके बाद तिरंगा यात्रा शुरू हुई। सेना की जिस गाड़ी में युवराज की पार्थिव देह रखी गई थी, उसे फूलों और तिरंगों से सजाया गया था। यात्रा के दौरान सेना के जवान भी पूरे सम्मान के साथ शामिल रहे। देशभक्ति गीतों की धुन, हाथों में तिरंगा और “वंदे मातरम्” के नारों के बीच यह यात्रा आगे बढ़ती रही। रास्ते भर लोग अपने घरों, दुकानों और छतों से फूल बरसाते रहे।

जेसीबी पर चढ़कर बरसाए फूल
Indian Army Agniveer News : तिरंगा यात्रा जब नरपत खेड़ा और आसपास के गांवों से गुजरी तो लोगों ने अनोखे अंदाज में श्रद्धांजलि दी। ग्रामीणों ने पहले से जेसीबी मशीनें मंगवाई थीं। लोग जेसीबी पर चढ़े और ऊपर से शहीद की अंतिम यात्रा पर फूलों की बारिश की। यह दृश्य इतना भावुक था कि वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई “भारत माता की जय” के नारे लगा रहा था।

गांव-गांव उमड़ा जनसैलाब
Beawar Latest News : तिरंगा यात्रा में केवल ब्यावर ही नहीं, बल्कि आसपास के कई गांवों के लोग भी शामिल हुए। राजियावास, शाहपुरा चौराहा, पीपली का बढ़िया और सावन चौराहे सहित कई स्थानों पर लोगों ने रुककर श्रद्धांजलि दी। ब्यावर टोल प्लाजा पर भी बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। यहां विधायक शंकर सिंह रावत, पूर्व विधायक देवीशंकर भूतड़ा सहित कई जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने शहीद को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
बचपन से था सेना में जाने का सपना
युवराज सिंह चौहान बचपन से ही देश सेवा का सपना देखते थे। उनके दादा भी भारतीय सेना में थे। जब युवराज अपने दादा को सेना की वर्दी में देखते थे तो अक्सर कहते थे- “मैं भी एक दिन आर्मी में जाऊंगा।” परिवार के लोगों के अनुसार युवराज अपने दादा से बेहद प्रेरित थे। दादा को 1999 में ड्यूटी के दौरान गोली लगी थी। लंबे इलाज के बाद वे रिटायर हुए थे। युवराज हमेशा उनकी बहादुरी की कहानियां सुनते थे और खुद भी देश के लिए कुछ बड़ा करना चाहते थे।
2022 में बने थे अग्निवीर
युवराज 17 फरवरी 2022 को भारतीय सेना में बतौर अग्निवीर भर्ती हुए थे। उन्होंने जबलपुर, गोवा और पठानकोट सहित कई सैन्य ठिकानों पर सेवाएं दीं। वर्तमान में उनकी पोस्टिंग जम्मू-कश्मीर के अखनूर सेक्टर में थी।
परिवार ने बताया कि उनकी सर्विस पूरी होने में अब केवल कुछ ही महीने बचे थे। इसके बाद वे गांव लौटकर RAS की तैयारी करना चाहते थे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
5 मई को किया था अंतिम फोन
शहीद युवराज ने 5 मई की रात ड्यूटी पर जाने से पहले परिवार से आखिरी बार बात की थी। पिता प्रताप सिंह ने बताया कि उस रात युवराज ने पूरे परिवार का हालचाल पूछा था। उन्होंने कहा था कि अब केवल चार महीने की सर्विस बाकी है और फिर वे घर लौट आएंगे। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि यह उनकी आखिरी बातचीत होगी।
मां और दादी का रो-रोकर बुरा हाल
युवराज की शहादत की खबर सुनने के बाद परिवार पूरी तरह टूट गया। मां संतोषी देवी बार-बार बेहोश हो रही हैं। गांव की महिलाएं उन्हें संभालने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन उनका दर्द कम नहीं हो रहा। मां लगातार यही कहती रहीं- “मेरा बेटा जैसे गया था, वैसे ही लौट आता… कुछ महीने ही तो बाकी थे।” दादी सीतादेवी का भी रो-रोकर बुरा हाल है। वे बार-बार अपने पोते को याद कर कहती रहीं- “तेरे दादा भी गोली लगने के बाद घर लौट आए थे… तू क्यों नहीं आया बेटा?” युवराज परिवार का सबसे छोटा पोता था और दादा-दादी के सबसे करीब माना जाता था।
पूरा गांव शोक में डूबा
शहीद की खबर के बाद लगेतखेड़ा गांव में मातम पसरा हुआ है। गांव के हर घर में शोक का माहौल है। लोग लगातार शहीद के घर पहुंचकर परिवार को सांत्वना दे रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि युवराज बेहद सरल और मिलनसार स्वभाव के थे। गांव में सभी उनसे बेहद प्यार करते थे। उनकी शहादत ने पूरे क्षेत्र को गर्व और दुख दोनों से भर दिया है।
देशभक्ति गीतों के बीच दी अंतिम विदाई
तिरंगा यात्रा के दौरान डीजे पर देशभक्ति गीत बजते रहे। युवाओं के हाथों में तिरंगा था और हर तरफ “शहीद अमर रहें” के नारे गूंज रहे थे।सेना के जवानों ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ अपने साथी को अंतिम सलामी दी। हजारों लोगों की मौजूदगी में युवराज सिंह चौहान पंचतत्व में विलीन हो गए, लेकिन उनकी बहादुरी और बलिदान हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगा।



