
Acharya Mahashraman : आचार्यश्री भिक्षु जन्म त्रिशताब्दी वर्ष के पावन अवसर पर जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के प्रथम आचार्य, महामना आचार्यश्री भिक्षु की जन्मभूमि कंटालिया इन दिनों पूरी तरह भिक्षुमय वातावरण से सराबोर हो गई है। इसी क्रम में जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण सोमवार को अपनी धवल सेना के साथ कंटालिया पहुंचे। उनके आगमन के साथ ही संपूर्ण गांव मानो आस्था, भक्ति और उल्लास के सागर में डूब गया।
आचार्यश्री भिक्षु की जन्म त्रिशताब्दी वर्ष के अंतर्गत आयोजित इस महाचरण यात्रा में तेरापंथ धर्मसंघ की व्युत्पत्ति से जुड़े सभी महनीय स्थलों और नगरों का क्रमशः भ्रमण किया जा रहा है। इसी आध्यात्मिक यात्रा के तहत आचार्यश्री महाश्रमणजी का कंटालिया आगमन हुआ, जिसे लेकर क्षेत्र में लंबे समय से उत्साह और श्रद्धा का वातावरण बना हुआ था।
धर्मसंघ के सक्रिय कार्यकर्ता राजकुमार दक ने जानकारी देते हुए बताया कि महामना आचार्यश्री भिक्षु की जन्मस्थली कंटालिया में ‘Acharya Bhikshu Janm Trishatabdi Year’ के अंतर्गत विशेष महाचरण का आयोजन किया जा रहा है। इसके साथ ही आचार्यश्री महाश्रमणजी ने यहां तेरह रात्रियों के प्रवास का भी निर्धारण किया है। इस कारण देश के विभिन्न राज्यों और दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कंटालिया पहुंचे हैं। पूरे गांव में किसी बड़े Festival जैसा माहौल देखने को मिल रहा है।

Terapanth Jain community news : सोमवार प्रातःकाल की मंगल बेला में आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी धवल सेना के साथ माण्डा से विहार कर कंटालिया की ओर प्रस्थान कर गए। माण्डावासियों ने भावविभोर होकर आचार्यश्री के श्रीचरणों में कृतज्ञता और श्रद्धा अर्पित की। कंटालिया प्रवास के अवसर पर अनेक श्रद्धालु, जो वर्षों से अन्य क्षेत्रों में निवास कर रहे थे, अपने पैतृक गांव लौट आए और अपने आराध्य के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त किया। जैसे-जैसे आचार्यश्री महाश्रमण कंटालिया के समीप पहुंचे, वैसे-वैसे श्रद्धालुओं की संख्या सैकड़ों से बढ़कर हजारों में परिवर्तित हो गई। गांव के प्रवेश द्वार से पहले ही विशाल जनसमूह अपने आराध्य के स्वागत में प्रतीक्षारत दिखाई दिया।
जैसे ही महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमण कंटालिया के निकट पहुंचे, जनसमुदाय ने गगनभेदी जयघोष के साथ उनका भव्य अभिनंदन किया। विशाल स्वागत जुलूस के साथ आचार्यश्री जन-जन पर आशीषवृष्टि करते हुए तेरापंथ धर्मसंघ के प्रथम अनुशास्ता आचार्यश्री भिक्षु की जन्मस्थली में पधारे। इसके पश्चात आचार्यश्री निर्धारित प्रवास स्थल में विराजमान हुए।

भिक्षु समवसरण में आचार्यश्री का पावन प्रतिबोध
Jain Terapanth Acharya Mahashraman : भिक्षु समवसरण में उपस्थित श्रद्धालुओं को पावन प्रतिबोध प्रदान करते हुए आचार्यश्री महाश्रमणजी ने कहा कि शास्त्रों में मंगल के तीन स्वरूप बताए गए हैं—जघन्य, सामान्य और उत्कृष्ट। धर्म को इन सबमें उत्कृष्ट मंगल कहा गया है। मानव जीवन में धर्म का स्थान सर्वोच्च है। इसके आगे धन, शरीर और जनबल का महत्व गौण हो जाता है।
आचार्यश्री ने कहा कि धन और यह शरीर यहीं रह जाने वाले हैं, लेकिन धर्म की कमाई आत्मा के साथ आगे भी चलती है। चारित्र भले ही शरीर के साथ समाप्त हो जाए, पर आत्मा की निर्मलता बनी रह सकती है। अहिंसा, संयम और तप—इन तीनों को ही धर्म कहा गया है। जहां आत्मा में धर्म का वास होता है, वहीं जीवन में सच्चा मंगल प्रकट होता है। उन्होंने आगे कहा कि जिस व्यक्ति का मन धर्म में रमा रहता है, उसे देवता भी नमन करते हैं। आज हम सभी आचार्यश्री भिक्षु की जन्मभूमि कंटालिया में उपस्थित हैं। जब कोई शिशु आगे चलकर महान महापुरुष बनता है, तो उसके जन्मस्थान का गौरव भी स्वतः बढ़ जाता है।

Terapanth Dhaval Sena : आचार्यश्री महाश्रमणजी ने कहा कि वर्तमान में आचार्यश्री भिक्षु जन्म त्रिशताब्दी वर्ष चल रहा है और इसके मध्य मंगल के रूप में कंटालिया आगमन हुआ है। यह क्षेत्र के लिए भी सौभाग्य का विषय है। ऐसे माता-पिता धन्य होते हैं, जिनकी संतान समाज और धर्म को नई दिशा प्रदान करती है। कंटालिया को आचार्यश्री भिक्षु की जन्मस्थली होने का विशेष गौरव प्राप्त है।
उन्होंने आचार्यश्री भिक्षु की माता दीपांजी का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने सिंह का स्वप्न देखा था, जो एक महान और विख्यात पुत्र के जन्म का संकेत था। यहां के लोगों ने इस गौरव को बनाए रखने का सराहनीय प्रयास किया है। इस अवसर पर आचार्यश्री ने ‘भिक्षु म्हारै प्रकट्या जी भरत खेतर में’ गीत का आंशिक संगान कर वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया। उन्होंने कहा कि इस समय पूरा कंटालिया गांव भिक्षुमय हो गया है। यहां आयोजित महाचरण से लोगों में धर्मभाव और अधिक प्रबल हो।

स्वागत समारोह में भावपूर्ण अभिव्यक्ति
Acharya Bhikshu Janm Trishatabdi : आचार्यश्री के स्वागत में आचार्य भिक्षु जन्मस्थली कंटालिया के अध्यक्ष गौतम एम. सेठिया, संयोजक गौतम जे. सेठिया, गणपत डागा तथा कंटालिया के ठाकुर नरपत सिंह ने अपनी भावपूर्ण अभिव्यक्तियां प्रस्तुत कीं। तेरापंथ महिला मंडल, कंटालिया द्वारा स्वागत गीत का मधुर संगान किया गया।
अखिल तेरापंथ युवक परिषद की ओर से अनंत बागरेचा ने ‘Om Bhikshu, Jai Tulsi’ मंत्र-जप क्रम की जानकारी देते हुए आचार्यश्री से पांच बोल सुनाने का आग्रह किया। आचार्यश्री महाश्रमणजी ने इस आग्रह को स्वीकार करते हुए कुछ समय तक मंत्र जप का प्रयोग भी कराया, जिससे समूचा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।
कंटालिया में आचार्यश्री महाश्रमणजी का यह ऐतिहासिक प्रवास न केवल तेरापंथ धर्मसंघ के लिए, बल्कि संपूर्ण क्षेत्र के लिए भी आध्यात्मिक चेतना और गौरव का अनुपम अवसर बन गया है।
