
April 2026 new rules : 1 अप्रैल से नए वित्त वर्ष की शुरुआत हो गई है और इसके साथ ही आम आदमी की जेब, सफर, नौकरी, टैक्स और बैंकिंग से जुड़े कई बड़े बदलाव लागू हो गए हैं। इस बार नए महीने की शुरुआत सबसे पहले कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ हुई है। सरकारी तेल कंपनियों ने कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दामों में 218 रुपए तक का इजाफा कर दिया है। इसके अलावा रेल टिकट रिफंड, फास्टैग, टोल टैक्स, इनकम टैक्स, बैंकिंग, ट्रेडिंग, लेबर नियम और पैन कार्ड से जुड़े बदलाव भी आज से प्रभावी हो गए हैं। कुल मिलाकर 1 अप्रैल से 15 बड़े नियम बदल गए हैं, जिनका सीधा असर आम लोगों, व्यापारियों, नौकरीपेशा कर्मचारियों और निवेशकों पर पड़ेगा।
commercial LPG cylinder price hike : सबसे पहले बात कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की करें तो इसके दाम 218 रुपए तक बढ़ा दिए गए हैं। चेन्नई में अब यह 2246.50 रुपए में मिलेगा, जबकि दिल्ली में इसकी नई कीमत 2078.50 रुपए हो गई है। इसका सीधा असर होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट, चाय-नाश्ते की दुकानों और कैटरिंग व्यवसाय पर पड़ेगा। खर्च बढ़ने के बाद व्यापारी खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ा सकते हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। रेल यात्रियों के लिए भी नियम सख्त हुए हैं। अब ट्रेन छूटने से 8 घंटे पहले तक ही टिकट रद्द कराने पर रिफंड मिल सकेगा। पहले यह सीमा 4 घंटे थी। इसके साथ ही यात्री ट्रेन रवाना होने से 30 मिनट पहले तक अपना बोर्डिंग स्टेशन बदल सकेंगे। इस बदलाव का मतलब यह है कि यदि यात्री समय पर टिकट रद्द नहीं कर पाए, तो उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। हालांकि नियमों में सख्ती से कन्फर्म टिकट पाने वाले यात्रियों को कुछ राहत मिल सकती है।
फास्टैग और टोल नियमों में भी बड़ा बदलाव
FASTag annual pass price hike : फास्टैग यूजर्स के लिए भी आज से नई दरें लागू हो गई हैं। एनुअल पास को रिन्यू कराने पर अब पहले से ज्यादा रकम चुकानी होगी। एनएचएआई ने इसकी कीमत में 2.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। यानी जहां पहले सालाना पास 3 हजार रुपए में मिलता था, अब उसके लिए 3075 रुपए देने होंगे। यह पास कार चालकों को देशभर के 200 टोल प्लाजा पर बिना रुके यात्रा की सुविधा देता है।
टोल टैक्स को लेकर भी बड़ा फैसला लागू किया गया है। आज से सभी टोल प्लाजा पर नकद भुगतान पूरी तरह बंद कर दिया गया है। अब टोल टैक्स का भुगतान सिर्फ फास्टैग या यूपीआई जैसे डिजिटल माध्यमों से ही किया जा सकेगा। ऐसे में यदि किसी वाहन चालक के पास फास्टैग नहीं है या उसमें पर्याप्त बैलेंस नहीं है, तो उसके पास केवल डिजिटल भुगतान का ही विकल्प बचेगा। कैश विकल्प खत्म होने से कई लोगों को शुरुआत में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
गाड़ियों की कीमतों में भी बढ़ोतरी
1 अप्रैल से कॉमर्शियल और पैसेंजर वाहनों की कीमतों में भी 2 से 3 प्रतिशत तक बढ़ोतरी लागू हो गई है। 31 मार्च तक शोरूम पुरानी कीमतों और पुराने स्टॉक पर बिक्री कर रहे थे, लेकिन अब नई कीमतें लागू हो चुकी हैं। इसका असर उन ग्राहकों पर भी पड़ेगा जिन्होंने वाहन बुक तो कर लिया था, लेकिन 31 मार्च तक बिल नहीं कट पाया। अब उन्हें वाहन की बढ़ी हुई कीमत के साथ रजिस्ट्रेशन और अन्य शुल्क भी नई दरों पर चुकाने होंगे।
टैक्स, बैंकिंग और बाजार से जुड़े नियम भी बदले
इनकम टैक्स, HRA, ATM लिमिट, ट्रेडिंग और गोल्ड बॉन्ड पर नए प्रावधान लागू
income tax new rules : नए वित्त वर्ष के साथ टैक्स व्यवस्था में भी कई बदलाव किए गए हैं। अब ‘असेसमेंट ईयर’ शब्द का इस्तेमाल खत्म कर दिया गया है और उसकी जगह सिर्फ ‘टैक्स ईयर’ शब्द लागू किया गया है। नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 के लागू होने के बाद यह बदलाव किया गया है। इसका मकसद टैक्सपेयर्स के बीच सालों की गणना को लेकर होने वाली उलझन को कम करना है। पहले कमाई एक वर्ष में होती थी, जबकि टैक्स रिटर्न अगले वर्ष के असेसमेंट ईयर के नाम से भरा जाता था, जिससे भ्रम की स्थिति बनती थी।
नई टैक्स रिजीम में पहले किए गए बदलावों का फायदा अब इस साल की फाइलिंग में दिखाई देगा। सरकार ने 2025 में टैक्स स्लैब में जो संशोधन किए थे, वे अब पूरी तरह लागू हो चुके हैं। इसके तहत वेतनभोगी वर्ग को सेक्शन 87A के तहत 12.75 लाख रुपए तक की आय पर टैक्स छूट मिल सकती है, जबकि अन्य करदाताओं को 12 लाख रुपए तक की आय पर राहत मिलने की बात कही गई है।
फॉर्म 16 की जगह नए फॉर्म, HRA नियम भी सख्त
अब TDS से जुड़े पुराने फॉर्म 16 और 16A की जगह नए फॉर्म 130 और 131 का इस्तेमाल किया जाएगा। इन फॉर्म्स में टैक्स कैलकुलेशन, कटौती और छूट से जुड़ी जानकारी पहले की तुलना में अधिक विस्तार से दर्ज होगी। इससे जून-जुलाई में आयकर रिटर्न भरते समय गलती की संभावना कम हो सकती है।
HRA टैक्स छूट लेने वाले कर्मचारियों के लिए भी नियम बदल गए हैं। अब कर्मचारियों को किराए की रसीद जमा करनी होगी। यदि सालाना किराया 1 लाख रुपए से अधिक है, तो मकान मालिक का पैन नंबर देना अनिवार्य होगा। इसके अलावा दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई के साथ अब बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को भी 50 प्रतिशत टैक्स छूट वाली श्रेणी में शामिल किया गया है। इससे इन आठ शहरों में रहने वाले कर्मचारियों को बेसिक सैलरी के 50 प्रतिशत हिस्से तक टैक्स छूट का लाभ मिल सकेगा। साथ ही टैक्स विभाग अब रसीदों और मकान मालिक के रिकॉर्ड का मिलान भी करेगा, जिससे गलत दावे करने वालों पर कार्रवाई हो सकती है।
PNB ATM लिमिट और F&O ट्रेडिंग पर असर
PNB ATM cash withdrawal limit : पंजाब नेशनल बैंक ने भी एटीएम कैश निकासी की सीमा में बदलाव किया है। अब क्लासिक डेबिट कार्ड धारक एक दिन में अधिकतम 25 हजार रुपए ही निकाल सकेंगे, जबकि प्लेटिनम कार्ड धारकों के लिए यह सीमा 50 हजार रुपए तय की गई है। जिन ग्राहकों को इससे अधिक राशि की जरूरत होगी, उन्हें बैंक शाखा जाकर चेकबुक या विड्रॉल फॉर्म की मदद लेनी होगी। बैंक का कहना है कि यह कदम धोखाधड़ी को रोकने के लिए उठाया गया है।
शेयर बाजार में F&O ट्रेडिंग करने वालों के लिए भी लागत बढ़ गई है। सरकार ने बजट में सट्टेबाजी को नियंत्रित करने के लिए सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स यानी STT बढ़ाने का फैसला किया था, जो अब लागू हो गया है। फ्यूचर्स की बिक्री पर टैक्स दर 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत कर दी गई है। वहीं ऑप्शंस प्रीमियम पर टैक्स 0.1 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे इंट्राडे और हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स की प्रति ट्रेड लागत बढ़ जाएगी और उनकी शुद्ध कमाई पर असर पड़ेगा।
SGB निवेशकों के लिए भी नया टैक्स नियम
reduced new labour code : सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड यानी SGB में निवेश करने वालों के लिए भी महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब मैच्योरिटी पर टैक्स छूट केवल उन्हीं निवेशकों को मिलेगी जिन्होंने यह बॉन्ड सीधे रिजर्व बैंक से खरीदा है। यदि किसी निवेशक ने यह बॉन्ड शेयर बाजार से किसी दूसरे निवेशक से खरीदा है, तो मैच्योरिटी पर होने वाले मुनाफे पर टैक्स देना होगा। ऐसे मामलों में लाभ को कैपिटल गेन माना जाएगा। इसका असर उन निवेशकों पर पड़ेगा जो बाजार से बॉन्ड खरीदकर टैक्स बचत का लाभ लेना चाहते थे।

नौकरीपेशा लोगों के लिए भी अहम बदलाव
बेसिक पे, इनहैंड सैलरी, फुल एंड फाइनल सेटलमेंट और पैन कार्ड नियम बदले
नए लेबर कोड के तहत अब कर्मचारियों की बेसिक सैलरी उनके कुल CTC का कम से कम 50 प्रतिशत होना जरूरी होगा। कंपनियां अब भत्तों को कुल वेतन का 50 प्रतिशत से अधिक नहीं रख सकेंगी। इस बदलाव का सीधा असर कर्मचारियों की इनहैंड सैलरी पर पड़ सकता है, क्योंकि बेसिक पे बढ़ने पर भविष्य निधि यानी PF और ग्रेच्युटी में अधिक रकम कटेगी। हालांकि इसका सकारात्मक पक्ष यह है कि कर्मचारियों का रिटायरमेंट फंड पहले की तुलना में मजबूत होगा और नौकरी छोड़ने पर मिलने वाली ग्रेच्युटी भी अधिक हो सकती है।
नौकरी बदलने वालों के लिए एक राहतभरी खबर भी है। अब फुल एंड फाइनल सेटलमेंट यानी नौकरी छोड़ने के बाद बकाया भुगतान के लिए महीनों इंतजार नहीं करना पड़ेगा। पहले यह प्रक्रिया 90 दिनों तक खिंच जाती थी, लेकिन अब कंपनी को कर्मचारी के आखिरी कार्यदिवस के दो कार्यदिवस के भीतर सारा भुगतान करना होगा। यदि कोई कंपनी ऐसा नहीं करती, तो कर्मचारी लेबर विभाग में शिकायत कर ब्याज सहित बकाया राशि की मांग कर सकता है।
पैन कार्ड अपडेट के नियम भी सख्त
पैन कार्ड से जुड़े नियमों में भी अहम बदलाव किया गया है। अब पैन कार्ड बनवाने या उसमें जन्मतिथि संशोधन कराने के लिए आधार कार्ड को जन्मतिथि के वैध दस्तावेजों की सूची से हटा दिया गया है। आधार अब केवल एड्रेस प्रूफ के तौर पर मान्य होगा। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति नया पैन कार्ड बनवाना चाहता है या पुराने कार्ड में जन्मतिथि बदलवाना चाहता है, तो उसे आधार के साथ जन्म प्रमाण पत्र, 10वीं की मार्कशीट या अन्य वैध दस्तावेज जमा करने होंगे।
आम आदमी पर सीधा असर
कुल मिलाकर 1 अप्रैल से लागू हुए ये 15 बदलाव आम आदमी के जीवन के लगभग हर हिस्से को प्रभावित करने वाले हैं। रसोई से लेकर सफर तक, बैंकिंग से लेकर टैक्स तक और नौकरी से लेकर निवेश तक हर क्षेत्र में नए नियम लागू हो गए हैं। कुछ बदलाव सुविधा देने वाले हैं, लेकिन अधिकतर बदलाव ऐसे हैं जो लोगों के खर्च, योजना और वित्तीय प्रबंधन पर असर डालेंगे। नए वित्त वर्ष की शुरुआत इस बार राहत से ज्यादा नियमों और जिम्मेदारियों के साथ हुई है। आने वाले दिनों में इन बदलावों का असर बाजार, कारोबार, वेतनभोगी वर्ग और आम उपभोक्ताओं की जेब पर साफ दिखाई दे सकता है।



