
BVP group song contest : भारत विकास परिषद (भाविप), राजसमंद शाखा द्वारा प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी राष्ट्रीय समूहगान प्रतियोगिता का भव्य आयोजन गायत्री शक्तिपीठ के सभागार में किया गया। इस अवसर पर शहर के विभिन्न विद्यालयों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्ण प्रस्तुतियां दीं, जिन्होंने उपस्थित दर्शकों और अतिथियों का मन मोह लिया। कांकरोली निवासी प्रख्यात चिकित्सक डॉ. आनंद श्रीवास्तव इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे। उनके साथ मंच पर भाविप के पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष कमल किशोर व्यास, शाखा संरक्षक दिनेश मित्तल, शाखा अध्यक्ष महेंद्र कोठारी, प्रकल्प प्रभारी भगवती प्रसाद व्यास, परिषद सचिव सुरेंद्र जैन, वित्त सचिव विनोद मेहता और महिला संयोजिका सुमन सामसुखा उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता और स्वामी विवेकानंद की तस्वीरों के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और ‘वंदे मातरम’ के सामूहिक गायन के साथ हुआ। शाखा अध्यक्ष महेंद्र कोठारी ने अपने स्वागत उद्बोधन में सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का हार्दिक अभिनंदन किया। उन्होंने परिषद के सदस्यों के सहयोग और सामूहिक प्रयासों की सराहना की। इसके बाद, कमल किशोर व्यास ने भारत विकास परिषद के उद्देश्यों और निरंतर चल रहे सेवा प्रकल्पों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि परिषद शिक्षा, संस्कृति, स्वास्थ्य और सामाजिक उत्थान के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रही है, और यह समूहगान प्रतियोगिता उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
प्रतियोगिता का परिचय और नियम
National group song competition प्रकल्प प्रभारी भगवती प्रसाद व्यास ने प्रतियोगिता के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष प्रतियोगिता में राजसमंद के पांच प्रतिष्ठित विद्यालयों से 40 विद्यार्थियों और वाद्य यंत्र वादकों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों ने पारंपरिक परिधानों और साज-सज्जा के साथ अपनी प्रस्तुतियों को और भी आकर्षक बनाया। कार्यक्रम का संचालन कर रहे जितेंद्र लड्ढा ने प्रतियोगिता के नियमों और मूल्यांकन के मानदंडों को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता तीन चरणों – हिंदी देशभक्ति गीत, संस्कृत भक्ति गीत और राजस्थानी लोकगीत – में आयोजित की गई। प्रत्येक चरण में प्रस्तुतियों का मूल्यांकन स्वर, ताल, उच्चारण, भाव और समग्र प्रस्तुति के आधार पर किया गया।

तीन चरणों में बिखरी देशभक्ति और संस्कृति की छटा
Rajsamand school group singing competition प्रतियोगिता का पहला चरण हिंदी भाषा में देशभक्ति गीतों को समर्पित था। विद्यार्थियों ने ‘राष्ट्र की जय चेतना’, ‘भारत मां का मान बढ़ाएं’, ‘जय जय है भगवती’, ‘गीत खुशी के गुनगुनाएं’, और ‘वंदे मातरम’ जैसे गीतों की भावपूर्ण प्रस्तुतियां दीं। इन गीतों ने उपस्थित दर्शकों में देशप्रेम की भावना को जागृत किया। दूसरा चरण संस्कृत गीतों का था, जिसमें ‘ए ही रे समर्पयामि’, ‘देवी देहिनो बलं’, और ‘जय भारत जननी’ जैसे गीतों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंतिम चरण में राजस्थानी लोकगीतों जैसे ‘केसरिया बालम’, ‘इन लहरियो रा’, और ‘रूणीचा’ की मनमोहक प्रस्तुतियों ने स्थानीय संस्कृति की समृद्धि को दर्शाया। प्रत्येक प्रस्तुति में विद्यार्थियों का उत्साह और समर्पण स्पष्ट झलक रहा था।
निष्पक्ष मूल्यांकन और परिणाम
National patriotic song competition schools प्रतियोगिता में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए तीन विशेषज्ञ निर्णायकों – मदन डिडवानिया, जितेंद्र कावड़िया और विद्या बाफना – ने प्रतिभागियों का मूल्यांकन किया। उन्होंने स्वर की शुद्धता, ताल की सटीकता, उच्चारण की स्पष्टता, भाव-प्रकटीकरण और समग्र प्रस्तुति जैसे मानदंडों पर प्रत्येक दल का आकलन किया।
परिणामों की घोषणा करते हुए भगवती प्रसाद व्यास ने बताया कि हिंदी समूहगान प्रतियोगिता में आलोक स्कूल ने प्रथम स्थान हासिल किया, जबकि सविता इंटरनेशनल स्कूल, नांदोली ने दूसरा स्थान प्राप्त किया। संस्कृत समूहगान में भी आलोक स्कूल ने प्रथम और लक्ष्मीपत सिंघानिया स्कूल ने दूसरा स्थान हासिल किया। विजेता दलों और उनके प्रत्येक प्रतिभागी को परिषद की ओर से स्मृति चिन्ह (ट्रॉफी) और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। इसके अलावा, सभी प्रतिभागियों को उनके उत्साह और सहभागिता के लिए प्रशस्ति पत्र दिए गए।
मुख्य अतिथि का प्रेरक संदेश
Alok School Rajsamand group song winner मुख्य अतिथि डॉ. आनंद श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में इस आयोजन की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह समूहगान प्रतियोगिता न केवल विद्यार्थियों में देशप्रेम और सांस्कृतिक मूल्यों को जागृत करती है, बल्कि सहकारिता और सामूहिकता का भाव भी विकसित करती है। उन्होंने कहा, “ऐसे आयोजन युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और उन्हें राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का बोध कराते हैं।”
निर्णायक विद्या बाफना ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा, “संगीत प्रकृति का अभिन्न अंग है। इसके सात सुर न केवल जीवन को सुंदर बनाते हैं, बल्कि इसे सही दिशा देने की क्षमता भी रखते हैं।” इस दौरान कमल किशोर व्यास ने माउथ ऑर्गन पर एक देशभक्ति गीत की धुन बजाकर उपस्थित लोगों का मनोरंजन किया और माहौल को और उत्साहपूर्ण बना दिया।
प्रांतीय और राष्ट्रीय स्तर की राह
Bharat Vikas Parishad national level competition प्रकल्प प्रभारी भगवती प्रसाद व्यास ने बताया कि इस प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली आलोक स्कूल की टीम अब प्रांतीय स्तर की प्रतियोगिता में भाग लेगी। प्रांतीय स्तर पर विजेता बनने वाली टीम को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर प्राप्त होगा। यह अवसर न केवल विद्यार्थियों के लिए गर्व का विषय है, बल्कि राजसमंद की सांस्कृतिक प्रतिष्ठा को भी बढ़ाएगा।
धन्यवाद और समापन
कार्यक्रम का संचालन हंसा मेहता और जितेंद्र लड्ढा ने कुशलतापूर्वक किया। अंत में, भगवती प्रसाद व्यास ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों, निर्णायकों और परिषद के सदस्यों का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस आयोजन की सफलता सामूहिक प्रयासों का परिणाम है और यह परिषद के सामाजिक व सांस्कृतिक उद्देश्यों को और मजबूत करता है। यह राष्ट्रीय समूहगान प्रतियोगिता न केवल एक संगीतमय आयोजन था, बल्कि देशप्रेम, सांस्कृतिक गौरव और सामूहिकता का एक जीवंत उत्सव भी था।
