
Charbhuja Nath Temple Jaljhulni Ekadashi : राजसमंद जिले के गढ़बोर गांव में स्थित चारभुजा नाथ मंदिर में जलझूलनी एकादशी का भव्य मेला बुधवार, 3 सितंबर 2025 को आयोजित होने जा रहा है। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व को परिवर्तिनी एकादशी, वामन एकादशी, और डोल ग्यारस के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर में एक दिन पहले से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, और अन्य राज्यों से हजारों भक्त पैदल यात्रा कर इस पवित्र धाम में पहुंच रहे हैं। लंबी यात्रा और थकान के बावजूद भक्तों का उत्साह अटूट है। मंदिर परिसर में भक्ति भजनों की स्वर लहरियां और नृत्य का उत्साह मेले के आगमन की गवाही दे रहा है।
Jaljhulni Ekadashi fair Rajsamand जलझूलनी एकादशी मेले का सबसे आकर्षक हिस्सा ठाकुरजी की शाही शोभायात्रा है, जिसका भक्तों को बेसब्री से इंतजार रहता है। बुधवार सुबह मंगला झांकी के साथ दर्शन का सिलसिला शुरू होगा। इस दौरान पुजारी भगवान चारभुजा नाथ की मूर्ति को केवड़े के पत्तों में लपेटकर सोने के बेवाण (पालकी) में विराजित करेंगे। शाही लवाजमे के साथ यह शोभायात्रा दूध तलाई तक जाएगी, जहां भक्त गुलाल और अबीर उड़ाकर उत्सव का रंग बिखेरेंगे। शोभायात्रा के दौरान सड़कें लाल और रंग-बिरंगी हो जाएंगी, जो भक्ति और उल्लास का अनूठा संगम प्रस्तुत करेगी। माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु अपनी योग निद्रा में करवट बदलते हैं, जिसके कारण इसे परिवर्तिनी एकादशी भी कहा जाता है।
लाखों श्रद्धालुओं की भागीदारी की उम्मीद
Rajsamand Charbhuja Nath Mela चारभुजा नाथ मंदिर में हर साल जलझूलनी एकादशी के अवसर पर लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इस बार भी प्रशासन को एक लाख से अधिक भक्तों के आने की उम्मीद है। इसे ध्यान में रखते हुए मंदिर और आसपास के क्षेत्र में व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। मंदिर के मुख्य द्वार को फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया है, जो रात में और भी मनमोहक दिखता है। सूरजपोल की ओर बैरिकेड्स लगाए गए हैं, जिससे श्रद्धालुओं का प्रवेश और निकास सुचारू रूप से हो सके। प्रवेश के लिए अलग गेट और निकासी के लिए मुख्य द्वार का उपयोग किया जा रहा है। मंदिर परिसर में भक्तों की सुविधा के लिए पेयजल, छाया, और अस्थायी विश्राम स्थलों की व्यवस्था भी की गई है।

सुरक्षा के लिए सात थानों का जाब्ता तैनात
Dol Gyaras festival Charbhuja Nath मेले की विशाल भीड़ और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। चारभुजा पुलिस थाना प्रभारी प्रीति रत्नू ने बताया कि मंदिर के बाहर दुकानों के ऊपर एक अस्थायी पुलिस चौकी स्थापित की गई है। इस चौकी से भीड़ प्रबंधन, दर्शन व्यवस्था, और सुरक्षा की निगरानी की जाएगी। सात पुलिस थानों का जाब्ता और उनके थाना प्रभारी मेले की सुरक्षा व्यवस्था को संभालेंगे। इसके अलावा, होमगार्ड्स और सिक्योरिटी गार्ड्स सहित कुल 1500 कर्मियों को तैनात किया गया है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। मंदिर परिसर और दूध तलाई के आसपास पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार मौजूद रहेंगे।
चारभुजा नाथ मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
Charbhuja Nath Temple history and significance चारभुजा नाथ मंदिर राजसमंद जिले के गढ़बोर गांव में गोमती नदी के किनारे स्थित है और इसे 5285 साल पुराना माना जाता है। यह मंदिर भगवान विष्णु के चतुर्भुज स्वरूप को समर्पित है, जिनकी 85 सेंटीमीटर ऊंची मूर्ति शंख, चक्र, गदा, और कमल धारण किए हुए है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण राजपूत शासक गंगदेव ने भगवान विष्णु के स्वप्न में दिए गए निर्देशों के आधार पर करवाया था। माना जाता है कि पांडवों ने भी इस मूर्ति की पूजा की थी। मंदिर की रक्षा के लिए 125 से अधिक युद्ध लड़े गए, और कई बार मूर्ति को मुगल आक्रमणों से बचाने के लिए जलमग्न किया गया। यह मंदिर मेवाड़ के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है, और यहां दर्शन करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता है।

जलझूलनी एकादशी का धार्मिक महत्व
जलझूलनी एकादशी, जिसे परिवर्तिनी एकादशी, वामन एकादशी, या डोल ग्यारस भी कहा जाता है, भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित है। स्कंद पुराण के अनुसार, इस दिन व्रत और पूजा करने से वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है। मान्यता है कि इस व्रत से जीवन के सभी कष्ट और पाप नष्ट हो जाते हैं, तथा धन-धान्य, मान-प्रतिष्ठा, और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार और श्रीकृष्ण की सूरज पूजा (जलवा पूजन) की भी विशेष पूजा की जाती है। शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति जन्माष्टमी का व्रत रखता है, उसे जलझूलनी एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए, क्योंकि इससे जन्माष्टमी व्रत पूर्ण होता है।



