
child bride marriage cancelled : जोधपुर जिले की एक महिला के जीवन में आखिरकार वह दिन आया, जब 19 वर्षों से चला आ रहा बाल विवाह का काला साया खत्म हुआ। महज 34 दिन की उम्र में वर्ष 2005 में बालिका-वधु बना दी गई सोनिया को अब पारिवारिक न्यायालय के फैसले से कानूनी रूप से अपने बचपन और भविष्य पर दोबारा अधिकार मिल गया है। जोधपुर पारिवारिक न्यायालय संख्या-1 ने ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए सोनिया के बाल विवाह को निरस्त कर दिया। यह फैसला न सिर्फ एक महिला के लिए न्याय है, बल्कि समाज में फैली बाल विवाह जैसी अमानवीय कुप्रथा के खिलाफ एक सशक्त संदेश भी है।
Rajasthan child marriage news : सोनिया का बाल विवाह वर्ष 2005 में जोधपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्र में किया गया था, जब वह केवल 34 दिन की नवजात शिशु थीं। उस समय न तो उसकी सहमति मायने रखती थी और न ही उसके अधिकार। करीब 17 वर्षों तक यह विवाह सिर्फ कागजों में था, लेकिन वर्ष 2022 में गौना होने के बाद उसे ससुराल भेज दिया गया। वहां उसका जीवन और अधिक कठिन हो गया। कथित तौर पर अभद्र व्यवहार और मानसिक प्रताड़ना के चलते वह मजबूर होकर अपने पिता के घर लौट आई। इसी कठिन दौर में सोनिया को Sarthi Trust और उसकी Managing Trustee, Child & Women Rights Advocate तथा Rehabilitation Psychologist डॉ. कृति भारती की बाल विवाह निरस्तीकरण मुहिम के बारे में जानकारी मिली। डॉ. कृति भारती ने न सिर्फ उसे कानूनी जानकारी दी, बल्कि मानसिक संबल और counselling के जरिए सोनिया को अपने अधिकारों के लिए लड़ने की हिम्मत भी दी। उनके सहयोग से सोनिया ने पारिवारिक न्यायालय संख्या-1 में बाल विवाह निरस्तीकरण की याचिका दायर की।

काउंसलिंग से बनी सहमति, 5 महीने में आया फैसला
child marriage court verdict : मामले में दोनों पक्षों की काउंसलिंग कराई गई, जिसमें बाल विवाह को निरस्त करने पर आपसी सहमति बन गई। वर पक्ष के अधिवक्ता प्रकाश विश्नोई का भी सकारात्मक सहयोग रहा। न्यायालय के समक्ष बाल विवाह से जुड़े सभी तथ्य, दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। इसके बाद न्यायाधीश सतीश चंद्र गोदारा ने महज 5 महीने की न्यायिक प्रक्रिया में सोनिया के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बाल विवाह को निरस्त कर दिया। फैसला सुनते ही कोर्ट परिसर में भावुक क्षण देखने को मिले और सोनिया व उसके परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।
अदालत का सख्त संदेश: बाल विवाह जघन्य अपराध
Jodhpur family court decision : फैसला सुनाते समय न्यायाधीश सतीश चंद्र गोदारा ने बाल विवाह जैसी कुरीति पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि बाल विवाह केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि बच्चों के बचपन, शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान को छीनने वाला जघन्य अपराध है। उन्होंने समाज से अपील की कि ऐसी सामाजिक बुराइयों को खत्म करने के लिए हर नागरिक को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
डॉ. कृति भारती की मुहिम बनी हजारों बच्चों की ढाल
child marriage law डॉ. कृति भारती का यह प्रयास कोई पहला नहीं है। वे देश का पहला बाल विवाह निरस्तीकरण करवाने वाली सामाजिक कार्यकर्ता हैं। अब तक वे 53 बाल विवाह निरस्त करवा चुकी हैं व 2200 से अधिक बाल विवाह रुकवा चुकी हैं। उनकी इस साहसिक मुहिम को World Records India, Asia Book of Records और Limca Book of Records में स्थान मिला है। CBSE ने उनके कार्य को कक्षा 11 के पाठ्यक्रम में शामिल किया है। इसके अलावा उन्हें BBC की 100 Influential Women, TEDx मंच, और कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।
“अब पढ़ाई करूंगी और अपना भविष्य संवारूंगी” – सोनिया
फैसले के बाद सोनिया ने भावुक शब्दों में कहा, “बाल विवाह मुझे कभी स्वीकार नहीं था। डॉ. कृति दीदी ने मुझे हिम्मत दी, रास्ता दिखाया और आज मैं आज़ाद हूं। अब मैं पढ़ाई करूंगी और अपने पैरों पर खड़ी होकर अपना भविष्य संवारूंगी।” वहीं डॉ. कृति भारती ने कहा कि सोनिया को न्याय मिलना उनकी मुहिम की एक और जीत है और अब वे उसके rehabilitation और self-reliance के लिए निरंतर प्रयास करेंगी।
