
CJI br gavai : “बेटा, तुम एक दिन चीफ जस्टिस बनोगे”—ये वो शब्द थे, जो एक पिता ने अपने बेटे से कहे थे। उस पिता ने अपने बेटे के लिए एक बड़ा सपना देखा था, एक ऐसा सपना जिसमें उसका बेटा देश के सर्वोच्च न्यायिक पद, यानी चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बनकर समाज की सेवा करे। सालों पहले देखा गया यह सपना आज हकीकत में बदल गया। हालांकि, उस पिता की आंखें इस ऐतिहासिक पल को देखने के लिए अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके बेटे ने उनकी आकांक्षा को पूरा कर दिखाया। यह प्रेरणादायक कहानी है भारत के 52वें चीफ जस्टिस, जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई (बीआर गवई) की, जिन्होंने आज अपने पिता के सपने को साकार कर दिया।
पिता का सपना, बेटे की कड़ी मेहनत का फल
chief justice of india जस्टिस बीआर गवई ने आज देश के 52वें चीफ जस्टिस बनकर अपने पिता, स्वर्गीय रामकृष्ण सूर्यभान गवई (आरएस गवई) के सपने को पूरा किया है। आरएस गवई एक प्रसिद्ध अम्बेडकरवादी नेता थे, जिन्होंने रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया की स्थापना की थी। वे बिहार, केरल और सिक्किम के राज्यपाल भी रह चुके थे। आरएस गवई ने खुद भी वकालत की राह पर कदम रखा था, लेकिन समाज सेवा में सक्रिय होने के कारण वे लॉ स्कूल के दूसरे साल के बाद अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर सके। उन्होंने अपने अधूरे सपने को बेटे के जरिए पूरा करने की उम्मीद जताई थी, और आज जस्टिस बीआर गवई ने उस सपने को हकीकत में बदल दिया।
एनडीटीवी की एक रिपोर्ट में जस्टिस बीआर गवई ने अपने पिता की बात को याद करते हुए बताया, “मेरे पिता ने मुझसे कहा था कि तुम मेरा सपना पूरा करोगे। तुम समाज में मुझसे ज्यादा योगदान दोगे और एक दिन चीफ जस्टिस बनोगे। लेकिन मैं उस दिन को देखने के लिए नहीं रहूंगा।” यह बातें उनके पिता ने तब कही थीं, जब बीआर गवई अपनी कानूनी करियर की शुरुआत कर रहे थे। आज वह दिन आ गया, जब जस्टिस गवई देश के चीफ जस्टिस बन गए, लेकिन उनके पिता इस ऐतिहासिक पल को देखने के लिए मौजूद नहीं हैं। साल 2015 में, जस्टिस गवई के सुप्रीम कोर्ट में जज बनने से चार साल पहले ही उनके पिता का निधन हो गया था।
शपथ ग्रहण समारोह: एक ऐतिहासिक पल
जस्टिस बीआर गवई को आज, 14 मई 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) के पद की शपथ दिलाई। यह समारोह राष्ट्रपति भवन में आयोजित किया गया, जिसमें कई गणमान्य व्यक्तियों ने हिस्सा लिया। शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद, पूर्व चीफ जस्टिस संजीव खन्ना, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, एस जयशंकर, पीयूष गोयल, अर्जुन राम मेघवाल, और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला मौजूद थे। शपथ लेने के बाद जस्टिस गवई ने सुप्रीम कोर्ट परिसर में डॉ. बीआर अम्बेडकर को श्रद्धांजलि दी और अपनी मां कमलताई गवई के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। उनकी मां ने कहा, “यह मेरे बेटे की कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प का नतीजा है। मुझे उम्मीद है कि वह देश और समाज के लिए न्यायपूर्ण फैसले लेगा।”
जस्टिस संजीव खन्ना का कार्यकाल 13 मई 2025 को समाप्त हुआ था, जिसके बाद जस्टिस गवई ने यह पद संभाला। जस्टिस गवई का कार्यकाल करीब 6 महीने का होगा, जो 23 नवंबर 2025 तक चलेगा। वे देश के दूसरे दलित चीफ जस्टिस हैं। उनसे पहले जस्टिस केजी बालकृष्णन ने 2007 में इस पद को संभाला था। इसके अलावा, जस्टिस गवई देश के पहले बौद्ध चीफ जस्टिस भी बन गए हैं, जो उनके लिए एक और ऐतिहासिक उपलब्धि है। हाल ही में एक अनौपचारिक बातचीत में जस्टिस गवई ने कहा था, “मैं देश का पहला बौद्ध चीफ जस्टिस बनने जा रहा हूं, और यह मेरे लिए गर्व की बात है।”
जस्टिस बीआर गवई का जीवन परिचय
BR Gavai Biography : जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई का जन्म 24 नवंबर 1960 को महाराष्ट्र के अमरावती में हुआ था। वे अपने माता-पिता की तीन संतानों में सबसे बड़े हैं। अमरावती के फ्रेजरपुरा इलाके में जन्मे जस्टिस गवई की शुरुआती जिंदगी बेहद साधारण रही। यह इलाका मजदूरों और झुग्गी-झोपड़ियों से भरा हुआ था, जहां उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा एक स्थानीय मराठी मीडियम स्कूल, नगरपालिका प्राथमिक विद्यालय, अमरावती से हासिल की। बाद में, जब उनके पिता महाराष्ट्र विधान परिषद के डिप्टी चेयरमैन बने, तो परिवार मुंबई शिफ्ट हो गया। वहां उनकी मां कमलताई ने उन्हें अंग्रेजी मीडियम स्कूल में दाखिला दिलाया, क्योंकि उन्हें लगता था कि मराठी मीडियम में पढ़ाई उनके बेटे के भविष्य के लिए बाधा बन सकती है। इसके बाद जस्टिस गवई ने कोलाबा के होली नेम हाई स्कूल में पढ़ाई की।
उन्होंने अमरावती विश्वविद्यालय से बीकॉम की डिग्री हासिल की और फिर कानून की पढ़ाई शुरू की। एक रोचक बात यह है कि जस्टिस गवई शुरू में आर्किटेक्ट बनना चाहते थे, लेकिन अपने पिता की इच्छा को पूरा करने के लिए उन्होंने वकालत का रास्ता चुना। 16 मार्च 1985 को उन्होंने बार में रजिस्ट्रेशन कराया और अपनी वकालत की शुरुआत की। शुरुआती दिनों में उन्होंने दिवंगत राजा एस भोंसले, जो बॉम्बे हाईकोर्ट के जज और पूर्व महाधिवक्ता थे, के साथ काम किया। 1987 से 1990 तक उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट में स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस की और बाद में मुख्य रूप से नागपुर बेंच में विभिन्न मामलों की पैरवी की। संवैधानिक और प्रशासनिक कानून उनके विशेषज्ञता के क्षेत्र रहे हैं।

जस्टिस गवई ने नागपुर नगर निगम, अमरावती नगर निगम और अमरावती विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों के स्थायी वकील के रूप में भी काम किया। 14 नवंबर 2003 को वे बॉम्बे हाईकोर्ट के अतिरिक्त जज बने और 12 नवंबर 2005 को स्थायी जज बनाए गए। उन्होंने मुंबई की मुख्य बेंच के साथ-साथ नागपुर, औरंगाबाद और पणजी में विभिन्न मामलों की सुनवाई की। 24 मई 2019 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया, और अब वे देश के चीफ जस्टिस बन गए हैं। BR Gavai Caste
पारिवारिक और सामाजिक पृष्ठभूमि
bhushan gavai जस्टिस गवई का परिवार सामाजिक और राजनीतिक रूप से सक्रिय रहा है। उनके पिता आरएस गवई डॉ. बीआर अम्बेडकर के करीबी सहयोगी थे और 1956 में अम्बेडकर के नेतृत्व में शुरू हुए बौद्ध धर्म अपनाने के आंदोलन में शामिल हुए थे। उस समय करीब 5 लाख दलितों ने बौद्ध धर्म अपनाया था, और गवई परिवार ने भी इसे स्वीकार किया। जस्टिस गवई भी बौद्ध धर्म का पालन करते हैं, और इसी वजह से वे भारत के पहले बौद्ध चीफ जस्टिस बन गए हैं। उनके पिता ने हमेशा सामाजिक न्याय और समानता के लिए काम किया, और जस्टिस गवई ने भी इस विरासत को आगे बढ़ाया है।
जस्टिस गवई की प्राथमिकताएं और चुनौतियां
जस्टिस गवई ने हाल ही में एक इंटरव्यू में अपनी प्राथमिकताओं के बारे में बात की थी। उन्होंने कहा कि उनका मुख्य फोकस देश भर की अदालतों में लंबित मामलों की संख्या को कम करना होगा। इसके अलावा, वे न्यायिक नियुक्तियों में पारदर्शिता, न्यायपालिका में भ्रष्टाचार को खत्म करना, और अधिक महिला जजों की नियुक्ति को बढ़ावा देना चाहते हैं। जस्टिस गवई ने यह भी कहा कि वे डॉ. बीआर अम्बेडकर के सिद्धांतों—स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व—को भारत की एकता और लोकतंत्र के लिए जरूरी मानते हैं। वे गरीबों को मुफ्त कानूनी सहायता दिलाने के लिए भी प्रतिबद्ध हैं, ताकि न्याय हर व्यक्ति तक पहुंच सके।
एक प्रेरणादायक यात्रा का प्रतीक
Justice BR Gavai retirement जस्टिस बीआर गवई का चीफ जस्टिस बनना न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक क्षण है। अमरावती की साधारण गलियों से निकलकर देश के सर्वोच्च न्यायिक पद तक पहुंचने की उनकी यात्रा मेहनत, लगन और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतीक है। उनकी मां कमलताई गवई ने कहा, “मुझे गर्व है कि मेरा बेटा समाज की सेवा कर रहा है। मुझे उम्मीद है कि वह अपने फैसलों से देश और जनता की भलाई करेगा।”
जस्टिस गवई की यह उपलब्धि उन लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो कठिन परिस्थितियों में भी बड़े सपने देखते हैं। उनके कार्यकाल में देश को उनसे निष्पक्ष और समावेशी न्याय की उम्मीद है। यह नई शुरुआत न केवल उनके पिता के सपने को पूरा करती है, बल्कि भारत की न्यायिक प्रणाली में एक नया अध्याय भी जोड़ती है।



