
Coronavirus Updates : देश में कोरोना वायरस के मामले एक बार फिर तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसने स्वास्थ्य विभाग को सतर्क कर दिया है। 29 मई 2025 तक देश में एक्टिव केस की संख्या 1326 तक पहुंच गई है। इस दौरान कोविड से होने वाली मौतों का आंकड़ा भी बढ़कर 14 हो गया है। सबसे ज्यादा 6 मौतें महाराष्ट्र में दर्ज की गई हैं, जो चिंता का विषय है। जम्मू में स्कूलों ने सतर्कता बरतते हुए बच्चों को मास्क पहनकर मॉर्निंग प्रेयर करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, कर्नाटक के रायचूर में रिम्स हॉस्पिटल ने बढ़ते मामलों को देखते हुए एक अलग कोविड वार्ड तैयार किया है, ताकि मरीजों को तुरंत इलाज मिल सके।
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) कानपुर के डायरेक्टर प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल ने स्थिति पर अपनी राय साझा की। उन्होंने कहा कि 2022 के बाद से कई बार नए वैरिएंट्स के कारण कोविड मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है, लेकिन किसी भी बार स्थिति बहुत गंभीर नहीं हुई। प्रोफेसर अग्रवाल ने आशा जताई कि इस बार भी ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि सतर्कता बरतते हुए सामान्य जीवन जारी रखा जा सकता है।
वहीं, बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) के प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे ने कोविड की संभावित चौथी लहर को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी। उनके अनुसार, अगर चौथी लहर आती है, तो इसका प्रभाव 21 से 28 दिनों तक रह सकता है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह दूसरी लहर की तरह जानलेवा नहीं होगी, क्योंकि देश में वैक्सीनेशन और प्राकृतिक इम्यूनिटी के कारण लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ी है।
वैक्सीन पर नए वैरिएंट का प्रभाव
Coronavirus News प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे ने एक महत्वपूर्ण बात पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने वैक्सीनेशन करवाया है, उन्हें भी सावधानी बरतने की जरूरत है। नए वैरिएंट्स पर मौजूदा वैक्सीन का प्रभाव सीमित हो सकता है, क्योंकि ये वैरिएंट्स वैक्सीन से बनी इम्यूनिटी को चकमा देने में सक्षम हैं। हालांकि, वैक्सीनेशन पूरी तरह बेकार नहीं है। यह शरीर को नए वैरिएंट्स से लड़ने में मदद कर सकती है और गंभीर बीमारी से बचाने में प्रभावी हो सकती है। प्रोफेसर चौबे ने लोगों से मास्क पहनने, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने, और भीड़भाड़ वाली जगहों से बचने की सलाह दी है।
कोविड से जुड़े ताजा अपडेट्स
- जम्मू-कश्मीर में नए मामले: जम्मू-कश्मीर में कोविड-19 के दो नए मामले सामने आए हैं। दोनों मरीज केरल के रहने वाले हैं और श्रीनगर के गवर्नमेंट डेंटल कॉलेज में पढ़ाई कर रहे हैं। इन मरीजों को आइसोलेशन में रखा गया है और इनके संपर्क में आए लोगों की जांच की जा रही है।
- महाराष्ट्र में मौतें: महाराष्ट्र के ठाणे में 67 वर्षीय एक बुजुर्ग की कोविड से मौत हो गई। उन्हें 25 मई को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। प्रेस रिलीज के अनुसार, मरीज को हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज की समस्या थी। साथ ही, उन्होंने कोविड वैक्सीन भी नहीं ली थी, जिसके कारण उनकी स्थिति गंभीर हो गई।
- चंडीगढ़ में मौत: चंडीगढ़ में उत्तर प्रदेश के रहने वाले 40 वर्षीय एक व्यक्ति की इलाज के दौरान मौत हो गई। वह पंजाब के लुधियाना में काम करता था। सांस लेने में तकलीफ की शिकायत के बाद उसे चंडीगढ़ रेफर किया गया था, जहां उसकी कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इस मौत के साथ ही देश में कोविड से मौतों का आंकड़ा 14 तक पहुंच गया है।
6 राज्यों में 14 मौतें
COVID cases today : कोविड से होने वाली मौतों का सिलसिला कई राज्यों में देखा जा रहा है।
- जयपुर: 26 मई को जयपुर में दो मरीजों की मौत हुई। एक मरीज रेलवे स्टेशन पर मृत पाया गया, जिसकी कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आई। दूसरा मरीज 26 वर्षीय युवक था, जो एक प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती था। उसे पहले से टीबी की बीमारी थी, जिसके कारण उसकी स्थिति बिगड़ गई।
- महाराष्ट्र: ठाणे में एक कोविड पॉजिटिव महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके अलावा, 25 मई को ठाणे में ही 21 वर्षीय एक युवक की मौत हुई, जिसका इलाज 22 मई से चल रहा था।
- कर्नाटक: 17 मई को बेंगलुरु में 84 वर्षीय एक बुजुर्ग की मौत हुई। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, उनकी मौत मल्टी ऑर्गन फेल्योर के कारण हुई। उनकी कोविड रिपोर्ट 24 मई को पॉजिटिव आई थी।
- केरल: केरल में भी कोविड से दो लोगों की मौत हुई है, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है।
भारत में चार नए वैरिएंट की पहचान
How bad is COVID right now कोविड-19 के बढ़ते मामलों के बीच भारत में चार नए वैरिएंट्स की पहचान की गई है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के डायरेक्टर डॉ. राजीव बहल ने बताया कि दक्षिण और पश्चिम भारत से लिए गए सैंपल्स की जीनोम सीक्वेंसिंग में LF.7, XFG, JN.1, और NB.1.8.1 सीरीज के वैरिएंट्स पाए गए हैं। इन वैरिएंट्स की जांच के लिए देश के अन्य हिस्सों से भी नमूने लिए जा रहे हैं। डॉ. बहल ने कहा कि ये मामले अभी गंभीर नहीं हैं, लेकिन सतर्कता जरूरी है।
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने इन वैरिएंट्स को चिंताजनक नहीं माना है, लेकिन इन्हें निगरानी में रखे गए वैरिएंट्स की श्रेणी में रखा है। चीन सहित एशिया के कई देशों में कोविड के बढ़ते मामलों में यही वैरिएंट्स देखे गए हैं। NB.1.8.1 वैरिएंट में A435S, V445H, और T478I जैसे स्पाइक प्रोटीन म्यूटेशन्स पाए गए हैं, जो अन्य वैरिएंट्स की तुलना में तेजी से फैलते हैं और इम्यूनिटी को चकमा दे सकते हैं।

भारत में सबसे ज्यादा JN.1 वैरिएंट
Covid-19 in India भारत में कोविड का JN.1 वैरिएंट सबसे आम है। टेस्टिंग में आधे से ज्यादा सैंपल्स में यह वैरिएंट पाया गया है। इसके बाद BA.2 वैरिएंट 26% और ओमिक्रॉन सबलाइनेज 20% मामलों में देखा गया है। JN.1 वैरिएंट ओमिक्रॉन के BA2.86 का एक स्ट्रेन है, जिसे पहली बार अगस्त 2023 में देखा गया था। दिसंबर 2023 में WHO ने इसे ‘वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट’ घोषित किया था।
JN.1 वैरिएंट की खासियत
JN.1 वैरिएंट में करीब 30 म्यूटेशन्स हैं, जो इम्यूनिटी को कमजोर करने की क्षमता रखते हैं। अमेरिका के जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के अनुसार, यह वैरिएंट अन्य वैरिएंट्स की तुलना में तेजी से फैलता है, लेकिन यह बहुत गंभीर बीमारी का कारण नहीं बनता। दुनिया के कई हिस्सों में यह सबसे आम वैरिएंट बना हुआ है। JN.1 वैरिएंट के लक्षण कुछ दिनों से लेकर हफ्तों तक रह सकते हैं। अगर लक्षण लंबे समय तक बने रहते हैं, तो यह लॉन्ग कोविड का संकेत हो सकता है। लॉन्ग कोविड एक ऐसी स्थिति है, जिसमें कोविड-19 के कुछ लक्षण ठीक होने के बाद भी लंबे समय तक बने रहते हैं, जैसे थकान, सांस लेने में तकलीफ, और जोड़ों में दर्द।
सावधानी और सलाह
विशेषज्ञों ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। मास्क का उपयोग, हाथों की नियमित सफाई, और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे बुनियादी नियमों का पालन करना जरूरी है। साथ ही, जिन लोगों ने अभी तक वैक्सीन नहीं ली है, उन्हें जल्द से जल्द वैक्सीनेशन करवाने की सलाह दी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को कोविड वार्ड तैयार करने और टेस्टिंग बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे लक्षण दिखने पर तुरंत टेस्ट कराएं और आइसोलेशन में रहें।
कोविड-19 के बढ़ते मामले और नए वैरिएंट्स की पहचान ने एक बार फिर सतर्कता की जरूरत को रेखांकित किया है। हालांकि स्थिति अभी नियंत्रण में है, लेकिन विशेषज्ञों की सलाह और सावधानी ही हमें इस महामारी से बचा सकती है। नए वैरिएंट्स पर वैक्सीन का प्रभाव कम होने के बावजूद, वैक्सीनेशन और सावधानी हमें गंभीर बीमारी से बचाने में मदद कर सकती है।
