
CRPF Soldier Death : देश की सुरक्षा में तैनात राजसमंद जिले के सीआरपीएफ जवान की कहानी दिल को झकझोर देने वाली है। दरअसल मध्यप्रदेश के नीमच के CRPF कैंपस से छुट्टी के बाद रहस्यमयी तरीके से गायब जवान का 44 दिन बाद कंकाल उसी कैंपस परिसर में मिला। फिर सीआरपीएफ व एमपी पुलिस उनके कंकाल रूपी पार्थिव को लेकर राजसमंद के भीम कस्बे में पहुंची, जहां तिरंगे के साथ शवयात्रा निकाली। फिर सीआरपीएफ जवानों ने बंदूको से सलामी देकर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। आखिरी बार जवान की उसकी पत्नी से मोबाइल पर बात हुई थी, जिसमें 50 दिन की छुट्टी लेकर घर लौटने की बात कही, लेकिन घर की दहलीज तक पहुंचने से पहले ही उनकी जिंदगी रहस्यमयी मोड़ पर थम गई।
Neemuch CRPF campus skeleton found : सीआरपीएफ अधिकारी एपी टिर्की ने बताया कि राजसमंद जिले में भीम के कुम्हार मोहल्ला निवासी नन्दकिशोर प्रजापति (42) पुत्र अमरचंद प्रजापति वर्ष 2004 में CRPF में भर्ती हुए थे। 8 फरवरी को नीचम में सीआरपीएफ छावनी में सफाई के दौरान कर्मचारियों को झाड़ियों में कंकाल दिखाई दिया। सूचना पर CRPF अधिकारी मौके पर पहुंचे और बाद में परिजनों के आने पर 9 फरवरी सुबह वह कंकाल नंदकिशोर प्रजापति का होने के रूप में पहचान हुई। पोस्टमॉर्टम के बाद पार्थिव देह परिजनों को सौंप दी गई। जब उनका पार्थिव शरीर भीम पहुंचा, तो पूरे कस्बे ने तिरंगे के साथ अंतिम यात्रा निकाली गई। फिर जैसे ही शवयात्रा श्मशान घाट पर पहुंची, तो सीआरपीएफ जवानों ने आसमान में हवाई फायर कर सलामी दी। उसके बाद उनके पुत्र द्वारा पार्थिव देह को अग्नि के हवाले किया गया। इस तरह नम आंखों से अंतिम संस्कार किया गया, लेकिन वहां मौजूद हर शख्स के जेहन में एक ही सवाल था कि आखिर हमारे जांबाज नन्दकिशोर प्रजापति की मौत कैसे हुई है। एक तरफ देश के लिए वर्दी पहनकर कर्तव्य निभाने वाला जवान, दूसरी तरफ उसके परिवार की प्रतीक्षा की यह कहानी सिर्फ एक जवान की नहीं, बल्कि उस भरोसे की है जो हर परिवार अपने जवान बेटे पर करता है। नंदकिशोर भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका बलिदान, उनकी वर्दी और तिरंगे के साथ दी गई विदाई हमेशा याद दिलाती रहेगी कि देश सेवा का रास्ता कितना कठिन और अनिश्चित होता है।

पत्नी से हुई थी आखिरी बात

CRPF jawan mysterious death : सीआरपीएफ व नीमच के कैंट थाना पुलिस की जांच में प्रथम दृष्टया यही बात सामने आई कि 26 दिसंबर 2025 को आखिरी बार नन्दकिशोर की बात उनकी पत्नी गंगादेवी से हुई थी। तब उनके द्वारा यह बताया गया था कि 27 दिसंबर को छुट्टी लेकर घर के लिए रवाना होंगे और 28 दिसंबर तक घर लौट आएंगे। फिर नन्दकिशोर जब घर नहीं पहुंचे, तो परिजनों ने दोबारा मोबाइल पर कॉल किया, मगर संपर्क नहीं हो पाया। इस पर परिजनों द्वारा नन्दकिशोर के साथी सीआरपीएफ जवान मांगीलाल को कॉल लगाया, तो बताया कि वह घर के लिए निकलने की बात कही, मगर उनका एक बैग कमरे में ही पड़ा है। साथ ही एक मोबाइल कमरे में पड़ा है, जबकि दूसरा मोबाइल यहां नहीं है। इस अजीब स्थिति ने परिजनों की चिंता को और गहरा कर दिया।
नीमच में तीन दिन तलाश, फिर गुमशुदगी दर्ज

Nandkishor Prajapati CRPF : 28 दिसंबर को भीम से परिवार के सदस्य नीमच में CRPF कैंपस पहुंच गए, जहां सीआरपीएफ अधिकारियों से जानकारी ली, तो बताया कि नन्दकिशोर छुट्टी लेकर जा चुके हैं। इस पर परिजनों ने पुलिस के साथ क्षेत्रीय गांवों में तीन दिन तक तलाश की गई। फिर 1 जनवरी 2026 को नीमच थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। इसके बाद परिवार भारी मन से गांव लौट आया, उम्मीद थी कि कोई खबर जरूर मिलेगी, लेकिन 8 फरवरी शाम कंकाल मिलने की सूचना मिली। इस पर परिजनों ने नीमच सीआरपीएफ कैंपस पहुंचकर कंकाल की पहचान नन्दकिशोर के रूप में की। फिलहाल मौत की असली वजह फॉरेंसिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी। परिजन हत्या की आशंका जता रहे हैं और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। CRPF soldier funeral salute
