
Desuri Nal Skyway Project : मेवाड़ और मारवाड़ को जोड़ने वाला पाली – नाडोल- देसूरी- चारभुजा मार्ग अब सिर्फ फोरलेन नहीं बनेगा, बल्कि देसूरी नाल में 9 किमी लंबा स्काई-वे बनाया जाएगा। 83 किमी लंबे इस सेक्शन ( NH-162E) की डीपीआर तैयार कर केंद्रीय सड़क मंत्रालय को भेज दी गई है।
डीपीआर पर 2.58 करोड़ खर्च हुए हैं। प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 1800 से 2000 करोड़ के बीच है। प्रोजेक्ट में 9 नए बाईपास और कई री अलाइनमेंट शामिल हैं, ताकि ट्रैफिक आबादी से बाहर शिफ्ट हो और हादसों पर ब्रेक लग सके। इस मार्ग को देश का सबसे ज्यादा हादसों वाला रास्ता माना जाता है। साल 1952 से 2026 तक 1 हजार से अधिक मौतें हो चुकी हैं। हर मानसून में हादसों की वजह से कई दिनों तक रास्ता बंद रहता है। डीपीआर में बताया गया है कि मौजूदा घाट सेक्शन 30-40 किमी / घंटा की औसत रफ्तार से आगे सुरक्षित नहीं है। तीखे मोड़, सीमित विजिबिलिटी और बरसात में पानी निकासी की समस्या के कारण सड़क की ज्योमेट्री सब स्टैंडर्ड है। नई फोरलेन पर 2+7.5 मीटर कैरिज वे दोनों ओर 15 मीटर पक्का शोल्डर और 180 मीटर सेफ स्टॉपिंग डिस्टेंस जैसे मानक लागू होंगे। खास बात यह है कि देसूरी नाल में प्रस्तावित 9 किमी सिंगल पिलर एलिवेटेड बनाया जाएगा ताकि पहाड़ कम कटे, नीचे से वन्यजीव सुरक्षित गुजरें और मानसून में जाम की नौबत न आए।
देसूरी (1.193 किमी) और खारड़ा (0.664 किमी) में नया एलाइनमेंट आबादी से बाहर निकलेगा। देसूरी में 7.158 हेक्टेयर और खारड़ा में 3.984 हेक्टेयर जमीन की जरूरत बताई गई है। पूरा प्रोजेक्ट आगे के 30 साल के ट्रैफिक के हिसाब से तैयार किया गया है। सांसद पीपी चौधरी का कहना है कि जल्द ही डीपीआर को मंजूरी मिल जाएगी।

स्काई-वे क्या है और क्यों जरूरी है?
DESURI NAL ACCIDENT PRONE ROAD PROJECT : देसूरी चारभुजा की नाल में 9 किमी सड़क जमीन पर नहीं होगी। कारण साफ है घाट में तीखे मोड़, पहाड़ और वन्यजीव क्षेत्र है। स्काई-वे बनाने से पहाड़ भी कम कटेंगे। नीचे से पैंथर समेत वन्यजीव गुजर सकेंगे। वहीं, बरसात में पानी का बहाव नहीं रुकेगा, इसलिए भूस्खलन और जाम की आशंका घटेगी।
100 किमी की स्पीड कैसे मिलेगी?
PALI NADOL DESURI CHARBHUJA FOUR LANE HIGHWAY : अभी औसत स्पीड 30-40 किमी / घंटा है। नई सड़क 100 किमी / घंटा डिजाइन पर बनेगी। चौड़े मोड़ (कम से कम 250 मीटर रेडियस), 180 मीटर तक सामने देखने की सुरक्षित दूरी और दोनों तरफ 1.5 मीटर पक्का शोल्डर बनाया जाएगा। इससे औसत स्पीड लगभग दोगुनी हो सकती है।
9 बाइपास क्यों बनाए जा रहे हैं?
RAJASTHAN SKYWAY ROAD PROJECT 2026 : सोनाई मांझी, बूसी (1.16 किमी नया मार्ग), नाडोल (दो विकल्प), टेवाली, सोमेसर, देवली, खारड़ा, नारलाई और देसूरी। इन जगहों पर ट्रैफिक गांवों से बाहर निकलेगा। इससे बाजारों में भारी ट्रकों की भीड़ नहीं होगी। स्कूल अस्पताल के पास सड़क सुरक्षित रहेगी। अभी रोज जाम के हालात बनते हैं।
जमीन कितनी लगेगी? किसे असर?
PALI DESURI NAL HIGHWAY NEWS : देसूरी में 7.158 हेक्टेयर और खारड़ा में 3.984 हेक्टेयर जमीन अधिगृहीत की जाएगी। जहां नया एलाइनमेंट बनेगा, वहां जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चलेगी। प्रभावित लोगों को मुआवजा दिया जाएगा।
यात्रा के समय में कितनी बचत?
अनुमान है कि जोधपुर उदयपुर सफर करीब 13 घंटे 15 मिनट में संभव होगा। पणिहारी से गौमती तक लगभग 1 घंटे तक की कमी आ सकती है। गौमती से एनएच जुड़ जाएगा।
जेब पर क्या असर पड़ेगा?
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि स्मूद ट्रैफिक में बार-बार ब्रेक और गियर बदलना कम होगा। इससे ईंधन की बचत होगी। गाड़ी के पार्ट्स पर कम विसाव होंगे। ट्रक ऑपरेटिंग कॉस्ट घटेगी।
पर्यटन व उद्योगों को क्या फायदा होगा?
चारभुजा, नाडोल, रणकपुर में नया धार्मिक पर्यटन हब बनेगा। कुंभलगढ़, परशुराम महादेव और चारभुजा मंदिर आने वाले पर्यटकों का समय बचेगा। पाली के औद्योगिक क्षेत्र और राजसमंद के मार्बल बेल्ट के बीच लॉजिस्टिक लागत कम होगी। आसानी से पहुंच हो जाएगी। आर्थिक भार भी कम आएगा।
संघर्ष की जीत
वर्ष 2017 में मानव जीवन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हम सभी ने मिलकर एक महत्वपूर्ण जनआंदोलन शुरू किया था। इस आंदोलन का उद्देश्य देसूरी नाल के नवनिर्माण को स्वीकृति दिलाना था। इस अभियान में राजसमंद के व्यापारियों, देसूरी क्षेत्र के आसपास रहने वाले मानव-सेवी लोगों तथा पत्रकार साथियों ने सराहनीय सहयोग दिया। देसूरी की नाल नवनिर्माण संघर्ष समिति के सदस्यों ने भी कंधे से कंधा मिलाकर इस जन-जागरूकता यात्रा को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सभी साथियों के सामूहिक प्रयास, समर्पण और दृढ़ संकल्प के कारण यह संघर्ष एक मजबूत आंदोलन के रूप में आगे बढ़ सका। विशेष रूप से उन सभी भामाशाहों का हृदय से आभार, जिन्होंने इस संघर्ष में आर्थिक सहयोग देकर हमारा मनोबल बढ़ाया और आंदोलन को मजबूती प्रदान की। आज यह कहना गर्व की बात है कि आप सभी के सहयोग और प्रयासों से यह यात्रा सफल हुई है।
भंवर सिंह चौहान, अध्यक्ष देसूरी नाल नवनिर्माण संघर्ष समिति राजसमंद



