
donald trump वॉशिंगटन, 31 जुलाई 2025: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत और रूस की अर्थव्यवस्थाओं को ‘डेड इकोनॉमी’ करार देते हुए तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि दोनों देश अपनी अर्थव्यवस्थाओं को डुबो रहे हैं और इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। ट्रम्प ने 1 अगस्त 2025 से भारतीय सामानों पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की है, जिसके बाद भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्तों में तनाव बढ़ गया है। यह निर्णय ट्रम्प के 20 जनवरी 2025 को सत्ता संभालने के बाद टैरिफ से जुड़े एग्जीक्यूटिव ऑर्डर का हिस्सा है।
ट्रम्प की ट्रूथ सोशल पोस्ट: भारत पर टैरिफ और पेनल्टी का ऐलान
tariff meaning ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रूथ सोशल’ पर 29 जुलाई को एक पोस्ट में भारत पर टैरिफ और पेनल्टी लगाने की बात कही। उनकी इस पोस्ट का हिंदी अनुवाद इस प्रकार है:
भारत हमारा मित्र है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में हमारा उनके साथ व्यापार सीमित रहा है। इसका कारण भारत के ऊंचे टैरिफ और कठिन गैर-आर्थिक व्यापारिक बाधाएं हैं। इसके अलावा, भारत अपनी अधिकांश सैन्य खरीद रूस से करता है और रूस का तेल खरीदने में चीन के बाद सबसे बड़ा खरीदार है। यह सब तब हो रहा है, जब विश्व समुदाय रूस से यूक्रेन युद्ध समाप्त करने की मांग कर रहा है। यह स्वीकार्य नहीं है! इसलिए, 1 अगस्त 2025 से भारत पर 25% टैरिफ लागू होगा और उपरोक्त कारणों से पेनल्टी भी लगाई जाएगी। ध्यान देने के लिए धन्यवाद। मेक अमेरिका ग्रेट अगेन!
ट्रम्प ने 30 जुलाई को एक और पोस्ट में भारत और रूस की अर्थव्यवस्थाओं को ‘डेड इकोनॉमी’ बताते हुए कहा कि दोनों देश अपनी आर्थिक नीतियों से खुद को तबाह कर रहे हैं।
‘डेड इकोनॉमी’ का मतलब और संदर्भ
us tariff on india ‘डेड इकोनॉमी’ कोई औपचारिक आर्थिक शब्द नहीं है, बल्कि यह एक बोलचाल का तंज है, जिसका इस्तेमाल किसी देश की अर्थव्यवस्था के ठप होने या अत्यधिक सुस्त पड़ने की स्थिति को दर्शाने के लिए किया जाता है। ऐसी स्थिति में व्यापार, उत्पादन, रोजगार और लोगों की आय लगभग रुक सी जाती है। आर्थिक विकास थम जाता है और लोग गंभीर आर्थिक संकट का सामना करते हैं।
हालांकि, इसकी माप के लिए कोई निश्चित पैमाना नहीं है, लेकिन कुछ आर्थिक संकेतक जैसे जीडीपी ग्रोथ, बेरोजगारी दर, महंगाई और व्यापार घाटा इसे समझने में मदद करते हैं। ट्रम्प का यह बयान भारत और रूस के रणनीतिक और व्यापारिक रिश्तों पर उनकी नाराजगी को दर्शाता है, खासकर भारत के रूस से तेल और हथियार खरीदने के फैसले पर।
भारत पर 25% टैरिफ: कारण और संभावित असर
tariff news ट्रम्प ने भारत पर टैरिफ बढ़ाने का फैसला कई कारणों से लिया है। उनका कहना है कि भारत अमेरिकी सामानों पर 100% तक टैरिफ लगाता है, जो ‘अनुचित’ है। इसके जवाब में वे अपनी ‘पारस्परिक टैरिफ’ नीति के तहत भारत पर 25% टैरिफ लागू कर रहे हैं। साथ ही, भारत का रूस से तेल और सैन्य उपकरण खरीदना भी उनकी नाराजगी का बड़ा कारण है।
वर्तमान में, भारतीय सामानों पर अमेरिका का औसत टैरिफ 10% के आसपास है। 25% टैरिफ लागू होने से भारत से निर्यात होने वाले सामान, जैसे फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्मार्टफोन और ज्वेलरी, अमेरिकी बाजार में महंगे हो जाएंगे। इससे उनकी मांग कम हो सकती है और भारत का अमेरिका के साथ ट्रेड सरप्लस प्रभावित हो सकता है।
india us trade deal : भारत के प्रमुख निर्यात सेक्टर पर असर
- फार्मास्यूटिकल्स: भारत अमेरिका को 7.5 अरब डॉलर से अधिक की जेनेरिक दवाइयां, वैक्सीन और एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रेडिएंट्स निर्यात करता है, जो इसके कुल फार्मा निर्यात का 30% से ज्यादा है। यदि इस सेक्टर पर टैरिफ लागू होता है, तो भारत के लिए यह बड़ा झटका होगा।
- स्मार्टफोन: 2025 की दूसरी तिमाही में भारत अमेरिका को स्मार्टफोन निर्यात करने वाला सबसे बड़ा देश बन गया, जिसने चीन को पीछे छोड़ दिया। भारतीय स्मार्टफोन का अमेरिकी बाजार में 44% हिस्सा है। 25% टैरिफ से इनकी कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता कमजोर हो सकती है।
- ज्वेलरी और हीरे: भारत से अमेरिका को 9 अरब डॉलर से अधिक की ज्वेलरी निर्यात होती है, जिसमें प्राकृतिक और लैब-निर्मित हीरे, सोने-चांदी के आभूषण और रंगीन रत्न शामिल हैं। टैरिफ से इनके दाम बढ़ सकते हैं, जिससे मांग और रोजगार पर असर पड़ सकता है।
- इलेक्ट्रॉनिक्स: भारत से अमेरिका को 14 अरब डॉलर के लैपटॉप, सर्वर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट्स निर्यात होते हैं। यदि भविष्य में इन पर टैरिफ लागू होता है, तो भारत की लागत-प्रतिस्पर्धा प्रभावित होगी।
- टेक्सटाइल और कपड़े: भारत से 2.5 अरब डॉलर से अधिक के हस्तनिर्मित सिल्क और कॉटन कपड़े अमेरिका को निर्यात होते हैं। टैरिफ से इनकी कीमतें बढ़ेंगी, जिससे यह सेक्टर कमजोर हो सकता है।

विशेषज्ञों की राय
एलारा कैपिटल की इकॉनॉमिस्ट गरिमा कपूर के अनुसार, 25% टैरिफ भारत की अर्थव्यवस्था के लिए नकारात्मक है। यदि सितंबर-अक्टूबर तक कोई व्यापार समझौता नहीं होता, तो वित्त वर्ष 2026 की जीडीपी ग्रोथ में 20 बेसिस पॉइंट की कमी आ सकती है। कपूर ने कहा कि फार्मा जैसे छूट वाले सेक्टर पर टैरिफ लागू होने से भारत के निर्यात को बड़ा नुकसान होगा।
ट्रम्प की टैरिफ नीति: केवल भारत ही नहीं, कई देश निशाने पर
us india trade deal ट्रम्प की टैरिफ नीति केवल भारत तक सीमित नहीं है। उन्होंने कई अन्य देशों पर भी भारी टैरिफ की घोषणा की है, जैसे:
- चीन: 34% टैरिफ
- वियतनाम: 46% टैरिफ
- ताइवान: 32% टैरिफ
- कंबोडिया: 49% टैरिफ
कनाडा और मेक्सिको को कुछ छूट दी गई है, लेकिन ऑटो और स्टील जैसे सेक्टर्स में उन पर भी टैरिफ लागू है। ट्रम्प की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत वे उन देशों पर भारी टैक्स लगा रहे हैं, जो अमेरिका पर ज्यादा टैरिफ वसूलते हैं।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: कहां तक पहुंची बात?
25 tariff on india भारत और अमेरिका लंबे समय से एक व्यापार समझौते पर काम कर रहे हैं। ट्रम्प ने 1 अगस्त 2025 की डेडलाइन दी थी, लेकिन भारत ने इसे बढ़ाने की अपील की है। 25 अगस्त को अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भारत आएगा और छठे दौर की वार्ता होगी। भारतीय अधिकारी सितंबर या अक्टूबर तक एक व्यापार डील को अंतिम रूप देने की उम्मीद कर रहे हैं।
हालांकि, कुछ मुद्दों पर अभी सहमति नहीं बनी है, जैसे भारत का जेनेटिकली मॉडिफाइड फसलों और डेयरी मार्केट को खोलने से इनकार। यदि समझौता नहीं होता, तो टैरिफ लागू होने से दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों पर गहरा असर पड़ सकता है।
भारत की प्रतिक्रिया और भावी रणनीति
भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने ट्रम्प के बयान पर संयमित प्रतिक्रिया दी है। मंत्रालय ने कहा:
हमने अमेरिकी राष्ट्रपति के व्यापारिक बयान को गंभीरता से लिया है और इसके प्रभावों का विश्लेषण कर रहे हैं। भारत और अमेरिका एक पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे।
भारत के सामने दो विकल्प हैं:
- डिप्लोमेसी: भारत अमेरिका के साथ जल्द से जल्द व्यापार समझौता करने की कोशिश करेगा, ताकि टैरिफ से बचा जा सके।
- जवाबी टैरिफ: यदि बातचीत विफल होती है, तो भारत अमेरिकी सामानों, जैसे एपल के स्मार्टफोन, व्हिस्की और अन्य इम्पोर्टेड प्रोडक्ट्स पर जवाबी टैरिफ लगा सकता है।
भारत की कोशिश होगी कि कूटनीति के जरिए मामला सुलझ जाए, क्योंकि अमेरिका उसका सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। 2024 में भारत ने अमेरिका को 87.4 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया, जबकि 41.8 अरब डॉलर का आयात किया।
ट्रम्प की धमकी: रणनीति या गंभीर कदम?
ट्रम्प ने अप्रैल 2025 में भी भारत पर 26% टैरिफ की बात कही थी, लेकिन बाद में इसे दो बार टाल दिया गया। भारतीय अधिकारी मानते हैं कि यह टैरिफ की धमकी व्यापार वार्ताओं में दबाव बनाने की रणनीति हो सकती है। ट्रम्प पहले भी कई बार टैरिफ की घोषणा कर पीछे हट चुके हैं। फिर भी, इस बार उनकी पोस्ट में साफ तारीख और पेनल्टी का जिक्र है, जिससे टैरिफ लागू होने की संभावना बढ़ गई है।
आम आदमी पर असर
25% टैरिफ का सीधा असर आम आदमी पर कम दिखेगा, लेकिन लंबे समय में इसका प्रभाव महसूस हो सकता है। भारतीय निर्यात कम होने से फार्मा, टेक्सटाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की कंपनियों को नुकसान हो सकता है, जिससे रोजगार के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।
यदि भारत जवाबी टैरिफ लगाता है, तो अमेरिकी प्रोडक्ट्स, जैसे स्मार्टफोन, लग्जरी सामान और खाद्य पदार्थ, भारत में महंगे हो सकते हैं। इससे मध्यम वर्ग के लिए आयातित सामानों की कीमतें बढ़ सकती हैं।



