
Dummy Candidates in Constable Exam : राजस्थान के उदयपुर जिले में कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा के दौरान पुलिस ने एक सनसनीखेज कार्रवाई करते हुए दो संदिग्ध डमी अभ्यर्थियों को हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई प्रतापनगर और सुखेर थाना क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले दो परीक्षा केंद्रों पर की गई। पकड़े गए अभ्यर्थियों की पहचान धौलपुर निवासी सुनील गुर्जर और पवन शर्मा के रूप में हुई है। दोनों की बायोमेट्रिक जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए, जिसके बाद इन्हें परीक्षा देने से रोक दिया गया और पुलिस को सौंप दिया गया। वर्तमान में पुलिस इन संदिग्धों से गहन पूछताछ कर रही है ताकि इस मामले की तह तक पहुंचा जा सके(
जानकारी के अनुसार, यह घटना न्यू भूपालपुरा स्थित ग्रिगोरियस सीनियर सेकेंडरी स्कूल और देबारी के अरावली कॉलेज में हुई। सुनील गुर्जर को ग्रिगोरियस स्कूल में और पवन शर्मा को अरावली कॉलेज में पकड़ा गया। दोनों अभ्यर्थी जब परीक्षा देने के लिए केंद्र पर पहुंचे, तो प्रारंभिक तौर पर उनकी पहचान मूल अभ्यर्थियों के रूप में हुई। हालांकि, जब बायोमेट्रिक सत्यापन की प्रक्रिया शुरू हुई, तो उनके पिछले रिकॉर्ड में दर्ज नाम और विवरण किसी और व्यक्ति के मिले। इस खुलासे के बाद परीक्षा केंद्र प्रभारियों ने तत्काल पुलिस को सूचित किया, और दोनों संदिग्धों को हिरासत में ले लिया गया। सुखेर थानाधिकारी रविंद्र सिंह चारण ने बताया कि मामले की जांच गहनता से की जा रही है और जल्द ही पूरे प्रकरण का खुलासा किया जाएगा।
एआई तकनीक का कमाल: नकल गिरोहों पर नकेल
AI Biometric Verification Rajasthan : यह पहला अवसर है जब राजस्थान पुलिस भर्ती परीक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित बायोमेट्रिक सॉफ्टवेयर का उपयोग किया गया है। यह अत्याधुनिक तकनीक नकल माफियाओं और डमी अभ्यर्थियों पर कड़ी नजर रखने में सक्षम है। इस सॉफ्टवेयर की खासियत यह है कि यह किसी भी अभ्यर्थी के पिछले परीक्षा रिकॉर्ड, जैसे कि उसने कब, कहां और कौन सी परीक्षा दी, साथ ही उसमें दर्ज नाम और अन्य विवरणों को तुरंत सामने ला देता है। उदयपुर में पकड़े गए दोनों संदिग्ध इसी तकनीक की मदद से पकड़े गए। इस सॉफ्टवेयर ने न केवल इनके फर्जीवाड़े को उजागर किया, बल्कि यह भी संकेत दिया कि ये अभ्यर्थी पहले भी ऐसी गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं। पुलिस अब इनके पुराने रिकॉर्ड्स की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या ये किसी बड़े नकल गिरोह का हिस्सा हैं।
डमी अभ्यर्थियों का पुराना इतिहास
Udaipur Constable Exam Fraud पुलिस सूत्रों के अनुसार, सुनील गुर्जर और पवन शर्मा के बायोमेट्रिक डेटा की जांच में यह सामने आया कि दोनों ने पहले भी विभिन्न परीक्षाओं में डमी अभ्यर्थी के रूप में हिस्सा लिया था। इनके द्वारा दी गई पिछली परीक्षाओं में अन्य व्यक्तियों के नाम दर्ज थे, जो इस बात का संकेत है कि ये लोग संगठित नकल गिरोह का हिस्सा हो सकते हैं। ऐसे में पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इनके पीछे कौन-कौन से लोग शामिल हैं और यह रैकेट कितना बड़ा है। यह भी जांच का विषय है कि क्या ये अभ्यर्थी किसी बड़े नेटवर्क के लिए काम कर रहे थे, जो पैसे लेकर डमी अभ्यर्थियों को परीक्षा में बैठाने का काम करता हो।
परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर
Rajasthan Exam Cheating News कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा राजस्थान में सबसे प्रतिष्ठित और बड़े पैमाने पर आयोजित होने वाली परीक्षाओं में से एक है। इसकी निष्पक्षता और पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए प्रशासन ने इस बार कई नए कदम उठाए हैं, जिनमें AI आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली का उपयोग प्रमुख है। इस तकनीक ने न केवल डमी अभ्यर्थियों को पकड़ने में मदद की है, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया है कि परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी को तुरंत रोका जाए। परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे, जैमर और सख्त सुरक्षा व्यवस्था भी लागू की गई थी ताकि नकल की किसी भी संभावना को खत्म किया जा सके।

आगे की कार्रवाई और समाज पर प्रभाव
Police Recruitment AI System पुलिस ने दोनों संदिग्धों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इनसे पूछताछ जारी है। सुखेर थानाधिकारी रविंद्र सिंह चारण ने बताया कि जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या ये दोनों किसी बड़े नकल रैकेट का हिस्सा हैं। साथ ही, उनके पिछले रिकॉर्ड्स की भी गहन पड़ताल की जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर डमी अभ्यर्थियों की समस्या को उजागर किया है, जो न केवल परीक्षा की निष्पक्षता को प्रभावित करती है, बल्कि मेहनती और योग्य अभ्यर्थियों के अवसरों को भी छीनती है।
