
Early vascular ageing : आज की बदलती जीवनशैली ने स्वास्थ्य से जुड़ी कई नई चुनौतियां पैदा कर दी हैं। पहले जिन बीमारियों को 40–50 साल की उम्र के बाद देखा जाता था, अब वही समस्याएं 20 से 30 साल के युवाओं में तेजी से सामने आने लगी हैं। डॉक्टरों के अनुसार इसका एक बड़ा उदाहरण Early Vascular Ageing है, जिसमें शरीर की आर्टरीज समय से पहले बूढ़ी और सख्त होने लगती हैं।
भारत के कई कार्डियोलॉजिस्ट इन दिनों इस चिंताजनक ट्रेंड को नोटिस कर रहे हैं। कई युवाओं की वास्तविक उम्र भले 30–35 साल हो, लेकिन मेडिकल जांच में उनकी आर्टरीज 50–55 साल के व्यक्ति जैसी दिखाई दे रही हैं। यही स्थिति डॉक्टरों की भाषा में अर्ली वैस्कुलर एजिंग कहलाती है। यह समस्या धीरे-धीरे बढ़ती है और अक्सर शुरुआत में कोई स्पष्ट लक्षण भी दिखाई नहीं देते।
क्रोनोलॉजिकल एज और बायोलॉजिकल एज में फर्क
arteries stiffness in young adults : विशेषज्ञ बताते हैं कि किसी व्यक्ति की उम्र को दो अलग-अलग तरीकों से समझा जाता है। पहली होती है Chronological Age, यानी वह उम्र जो आपके जन्म के बाद से वर्षों में गिनी जाती है। दूसरी होती है Biological Age, जिसका मतलब है कि शरीर के अंदर मौजूद अंग वास्तव में कितने स्वस्थ और कार्यक्षम हैं। डॉक्टरों के अनुसार कई बार ऐसा होता है कि किसी व्यक्ति की उम्र 35 साल होती है, लेकिन उसकी आर्टरीज या दिल की स्थिति 50 साल के व्यक्ति जैसी हो जाती है। स्वस्थ आर्टरीज सामान्य रूप से लचीली होती हैं और हर धड़कन के साथ फैलती और सिकुड़ती हैं, जिससे शरीर में ब्लड फ्लो सही तरीके से बना रहता है। लेकिन जब आर्टरीज सख्त और मोटी होने लगती हैं, तो रक्त प्रवाह प्रभावित होने लगता है और धीरे-धीरे अंदरूनी स्तर पर नुकसान जमा होने लगता है।
युवाओं में आर्टरीज के समय से पहले बूढ़े होने की वजह
heart attack risk in young people : डॉक्टरों का कहना है कि आधुनिक जीवनशैली इस समस्या की सबसे बड़ी वजह बन रही है। लंबे समय तक बैठे रहना, अत्यधिक तनाव वाली नौकरी, फास्ट फूड और प्रोसेस्ड फूड का ज्यादा सेवन, नींद की कमी, धूम्रपान और अनियंत्रित ब्लड प्रेशर या शुगर जैसे कई कारण आर्टरीज को तेजी से नुकसान पहुंचाते हैं। ICMR-INDIAB अध्ययन में भी यह सामने आया है कि भारत में कम उम्र के लोगों में डायबिटीज और प्रीडायबिटीज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार हृदय रोग आज भी दुनिया में मौत का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है और अब यह खतरा केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गया है।

क्यों खतरनाक है Early Vascular Ageing
biological age vs chronological age : इस समस्या की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके शुरुआती चरण में अक्सर कोई लक्षण महसूस नहीं होते। लोग खुद को पूरी तरह स्वस्थ मानते रहते हैं, जबकि आर्टरीज में धीरे-धीरे सख्ती और प्लाक जमा होता रहता है। कई मामलों में इसका पहला संकेत अचानक हार्ट अटैक या स्ट्रोक के रूप में सामने आता है। इसी कारण डॉक्टर समय-समय पर हेल्थ चेकअप और लाइफस्टाइल सुधार की सलाह देते हैं।
क्या इस समस्या को रोका जा सकता है?
arterial stiffness causes : विशेषज्ञों के अनुसार अच्छी खबर यह है कि शरीर की Biological Age को बदला जा सकता है। इसके लिए जीवनशैली में कुछ जरूरी बदलाव करना बेहद जरूरी है। नियमित एरोबिक एक्सरसाइज जैसे तेज चलना, साइक्लिंग या जॉगिंग दिल और आर्टरीज की सेहत को बेहतर बनाती है। इसके अलावा संतुलित आहार जिसमें फल, सब्जियां, साबुत अनाज और नट्स शामिल हों, आर्टरीज की लचक बनाए रखने में मदद करता है। पर्याप्त नींद लेना, तनाव को सही तरीके से मैनेज करना और धूम्रपान से दूर रहना भी दिल की सेहत के लिए बेहद जरूरी माना जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति स्मोकिंग छोड़ देता है, तो कुछ ही महीनों में आर्टरीज की स्थिति में सकारात्मक सुधार दिखाई देने लगता है।
असली सवाल उम्र नहीं, दिल की सेहत है
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि हमें सिर्फ अपनी उम्र पर नहीं, बल्कि अपने दिल और आर्टरीज की वास्तविक स्थिति पर भी ध्यान देना चाहिए। यदि लोग अपनी लाइफस्टाइल में समय रहते सुधार कर लें, तो दिल से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
Disclaimer : यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या उपचार से पहले योग्य डॉक्टर या मेडिकल विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। यहां दी गई जानकारी पेशेवर चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है।



