
EPFO higher pension scheme : नौकरी करने वाले अधिकतर कर्मचारियों की सैलरी से हर महीने Provident Fund (PF) कटता है ताकि रिटायरमेंट के बाद नियमित आय का सहारा मिल सके। लेकिन लंबे समय से कई कर्मचारियों की शिकायत रही कि नौकरी के दौरान अच्छी सैलरी होने के बावजूद रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन अपेक्षा से काफी कम बनती है। अब Employees’ Provident Fund Organisation यानी EPFO से जुड़ी एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आई है, जिससे कुछ कर्मचारियों की पेंशन पहले की तुलना में ज्यादा हो सकती है। यह बदलाव Higher EPS Pension Option से संबंधित है।
सरल शब्दों में कहें तो अब पात्र कर्मचारी अपनी पूरी Basic Salary के आधार पर पेंशन बनवा सकते हैं, जिससे भविष्य में मिलने वाली मासिक पेंशन में बड़ा इजाफा संभव है।
पहले क्यों कम बनती थी पेंशन?
साल 2014 में सरकार ने पेंशन नियमों में संशोधन किया था। उस समय यह तय किया गया कि पेंशन की गणना अधिकतम 15,000 रुपये की सैलरी तक ही की जाएगी। इसका मतलब यह हुआ कि यदि किसी कर्मचारी की वास्तविक बेसिक सैलरी 30,000, 50,000 या 80,000 रुपये भी हो, तब भी पेंशन कैलकुलेशन 15,000 रुपये के आधार पर ही किया जाता था। इस सीमा के कारण अधिकांश कर्मचारियों की अधिकतम पेंशन लगभग 7,000–7,500 रुपये प्रति माह के आसपास ही सीमित रह जाती थी। यही वजह रही कि उच्च वेतन पाने वाले कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद अपेक्षित आर्थिक सुरक्षा नहीं मिल पाती थी।
अब क्या बदल गया है?
EPS higher pension eligibility rules : अब कर्मचारियों को एक बार फिर विकल्प दिया जा रहा है कि वे अपनी वास्तविक Basic Salary पर EPS (Employees Pension Scheme) का योगदान कर सकें। यदि कर्मचारी और नियोक्ता दोनों सहमत हों, तो पेंशन फंड में अधिक राशि जमा होगी और उसी अनुपात में रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली मासिक पेंशन भी बढ़ जाएगी। यानी — ज्यादा योगदान = ज्यादा पेंशन यह विकल्प खास तौर पर उन कर्मचारियों के लिए राहत भरा है जो लंबे समय से बेहतर रिटायरमेंट इनकम चाहते थे।
किन कर्मचारियों को मिलेगा फायदा?
EPFO pension on full basic salary : यह सुविधा सभी कर्मचारियों के लिए नहीं है। इसके लिए कुछ शर्तें लागू हैं:
- कर्मचारी ने 1 सितंबर 2014 से पहले नौकरी जॉइन की हो
- उस समय Higher Pension का विकल्प उपलब्ध था
- कर्मचारी और कंपनी दोनों संयुक्त रूप से आवेदन करें
- नियोक्ता पूरी बेसिक सैलरी पर योगदान देने के लिए सहमत हो
जिन कर्मचारियों ने उस समय यह विकल्प नहीं चुना था, उन्हें यह लाभ स्वतः नहीं मिलेगा। निजी क्षेत्र के कई कर्मचारियों में अभी भी PF योगदान 15,000 सीमा पर आधारित है, इसलिए उन पर इसका असर सीमित रह सकता है।

कंपनी की सहमति क्यों जरूरी है?
EPS 95 higher pension calculation formula : Higher EPS Pension के लिए सिर्फ कर्मचारी की इच्छा पर्याप्त नहीं होती।
क्योंकि PF योगदान दो हिस्सों में जमा होता है:
- कर्मचारी: 12% सैलरी PF में
- नियोक्ता: 12% में से 8.33% EPS (Pension Fund) में
पहले यह 8.33% अधिकतम 15,000 रुपये पर लागू होता था।
अब यदि पूरी सैलरी आधार बनेगी तो नियोक्ता का योगदान भी बढ़ेगा, इसलिए कंपनी की मंजूरी आवश्यक है।
प्रक्रिया को आसान भाषा में समझें
pension increase after retirement : मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 50,000 रुपये है।
पुराने नियम में
8.33% केवल 15,000 पर = लगभग 1,250 रुपये पेंशन फंड में
नए विकल्प में
8.33% पूरे 50,000 पर = लगभग 4,165 रुपये पेंशन फंड में
यानी हर महीने पेंशन फंड में तीन गुना से ज्यादा पैसा जमा होगा, जिससे भविष्य की पेंशन भी काफी बढ़ सकती है।
कर्मचारियों के लिए कितना महत्वपूर्ण है यह विकल्प?
यह बदलाव खास तौर पर उन लोगों के लिए अहम है जो:
- लंबी सेवा अवधि पूरी करेंगे
- रिटायरमेंट के बाद नियमित आय चाहते हैं
- निजी क्षेत्र में काम कर रहे हैं
- कम पेंशन से परेशान थे
हालांकि यह सभी पर लागू नहीं होगा, लेकिन जो पात्र हैं उनके लिए यह Long Term Financial Security का मजबूत साधन बन सकता है।
क्या करना चाहिए कर्मचारियों को?
- पहले अपना EPFO रिकॉर्ड चेक करें
- जॉइनिंग डेट सत्यापित करें
- HR या Employer से बात करें
- Higher Pension Option के लिए संयुक्त आवेदन करें
- भविष्य की रिटायरमेंट प्लानिंग का आकलन करें



