
FD investment mistakes : Fixed Deposit (FD) को भारत में दशकों से सबसे सुरक्षित निवेश विकल्प माना जाता रहा है। आम निवेशक से लेकर वरिष्ठ नागरिक तक, हर कोई बैंक FD को “Safe Investment” समझकर इसमें पैसा लगाता है। वजह साफ है—ब्याज दर पहले से तय होती है, बाजार के उतार-चढ़ाव का असर नहीं पड़ता और तय समय के बाद निश्चित रिटर्न मिल जाता है।
लेकिन सच्चाई यह है कि FD जितनी सुरक्षित दिखाई देती है, उतनी सरल नहीं है। अक्सर लोग कुछ ऐसी छोटी-छोटी गलतियां कर बैठते हैं, जिनका असर भविष्य में उनकी कमाई पर पड़ता है। कई बार तो रिटर्न इतना कम हो जाता है कि निवेश का असली फायदा ही खत्म हो जाता है। आइए विस्तार से जानते हैं FD निवेश से जुड़ी 5 ऐसी छुपी हुई गलतियां, जिन्हें अनदेखा करना आपके लिए महंगा साबित हो सकता है।
1) महंगाई (Inflation) को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
Fixed Deposit common mistakes to avoid : FD में ब्याज दर पहले से तय रहती है, लेकिन महंगाई कभी तय नहीं रहती। यही सबसे बड़ा जोखिम है, जिसे ज्यादातर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। मान लीजिए आपकी FD पर 6.5% ब्याज मिल रहा है, लेकिन बाजार में महंगाई दर 7% या उससे अधिक है। ऐसे में आपकी वास्तविक कमाई (Real Return) लगभग शून्य हो जाती है। यानी कागज पर आप ब्याज कमा रहे हैं, लेकिन असल में आपकी क्रय शक्ति (Purchasing Power) घट रही होती है। कई बार ऐसा भी होता है कि महंगाई ब्याज दर से आगे निकल जाती है और निवेशक को वास्तविक नुकसान होने लगता है। इसलिए FD में निवेश करते समय Inflation Rate को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है।

2) बैंक की वित्तीय स्थिति खराब हुई तो पैसा फंस सकता है
FD real return vs inflation : अधिकांश लोग मानते हैं कि बैंक में पैसा रखा है तो पूरी तरह सुरक्षित है। यह बात काफी हद तक सही है, क्योंकि बैंक RBI के नियमों के तहत काम करते हैं। लेकिन अगर किसी बैंक की वित्तीय स्थिति खराब हो जाए और RBI उस पर पाबंदी लगा दे, तो ग्राहकों का पैसा तुरंत निकाल पाना मुश्किल हो सकता है। ऐसी परिस्थितियों में आपकी FD मैच्योर हो जाने के बाद भी रकम निकालने में देरी हो सकती है। इसलिए FD खोलते समय बैंक की विश्वसनीयता, रेटिंग और उसकी वित्तीय स्थिति की जांच करना समझदारी है।
3) केवल ‘1 दिन’ का अंतर बदल सकता है आपकी कमाई
DICGC 5 lakh insurance limit FD : यह एक बेहद अहम और अक्सर अनदेखी की जाने वाली गलती है। बैंक FD की ब्याज दरें आमतौर पर 6 महीने, 1 साल, 2 साल या 3 साल जैसे Round Figure Tenure पर तय करते हैं। लेकिन कई बार ऐसा देखा गया है कि 1 साल की FD पर मिलने वाली ब्याज दर, 1 साल 1 दिन या 11 महीने 29 दिन की FD से कम होती है। यानी सिर्फ एक दिन का अंतर आपको बेहतर रिटर्न दिला सकता है। इसलिए FD कराने से पहले अलग-अलग Tenure की ब्याज दरों की तुलना जरूर करें। केवल ‘1 साल’ या ‘3 साल’ देखकर निवेश करना नुकसानदेह हो सकता है।
4) FD में रखा पूरा पैसा 100% सुरक्षित नहीं होता
Best FD tenure interest rate comparison : अधिकतर लोग सोचते हैं कि FD में जमा पूरी रकम सुरक्षित है। लेकिन सच्चाई यह है कि FD पर भी सुरक्षा की एक सीमा होती है। DICGC (Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation) के नियमों के तहत किसी बैंक के डिफॉल्ट होने पर केवल ₹5 लाख तक की रकम की गारंटी मिलती है। इसमें आपकी FD, सेविंग अकाउंट और करंट अकाउंट—तीनों शामिल होते हैं। यदि आपने एक ही बैंक में ₹5 लाख से अधिक की FD कर रखी है, तो अतिरिक्त रकम पर कोई बीमा कवर नहीं मिलता। इसलिए बड़ी राशि निवेश करते समय इसे अलग-अलग बैंकों में बांटना एक समझदारी भरा कदम हो सकता है।
5) जरूरत के समय Liquidity की समस्या
FD को समय से पहले तोड़ा जा सकता है, लेकिन इसके साथ जुड़ी होती है Premature Withdrawal Penalty। हर बैंक इस पर अलग नियम लागू करता है। अगर आप FD समय से पहले तोड़ते हैं, तो आपको कम ब्याज मिलता है और पेनल्टी भी देनी पड़ सकती है। खासतौर पर Tax Saving FD, जिसे 5 साल से पहले नहीं तोड़ा जा सकता, उसमें समय से पहले रकम निकालने पर टैक्स छूट भी खत्म हो जाती है। इसलिए FD कराने से पहले अपने फंड की जरूरत और बैंक के नियमों को अच्छे से समझ लें।
(डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी प्रकार का निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।)
