
जयपुर। Gas cylinder crisis : राजस्थान में कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित होने से अब हालात चिंताजनक होते जा रहे हैं। जयपुर सहित प्रदेश के कई शहरों में कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी के बीच कालाबाजारी की शिकायतें सामने आने लगी हैं। होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, मैस और हॉस्टल संचालकों का आरोप है कि गैस एजेंसियों और सप्लायर्स की मनमानी के कारण उन्हें तय कीमत से कहीं अधिक दाम पर सिलेंडर खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि करीब 1800 से 1900 रुपए में मिलने वाला कॉमर्शियल सिलेंडर अब कई जगह 2500 रुपए तक बेचा जा रहा है।
इस संकट का असर केवल कारोबार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ने लगा है। खासकर कोटा जैसे शहरों में, जहां बड़ी संख्या में छात्र प्राइवेट हॉस्टल और मैस पर निर्भर रहते हैं, वहां खाने-पीने की व्यवस्था पर संकट गहराने लगा है। दूसरी ओर जयपुर में होटल-रेस्टोरेंट कारोबारियों का कहना है कि अगर जल्द सप्लाई सामान्य नहीं हुई और कालाबाजारी पर रोक नहीं लगी, तो कई प्रतिष्ठानों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ सकता है।
जयपुर में होटल-रेस्टोरेंट संचालकों का आरोप
Rajasthan commercial LPG cylinder shortage : जयपुर के कई होटल और रेस्टोरेंट संचालकों ने आरोप लगाया है कि कुछ गैस एजेंसियां कॉमर्शियल सिलेंडर ऊंचे दामों पर बेच रही हैं। उनका कहना है कि पहले से ही खाद्य सामग्री, बिजली, किराया और कर्मचारियों के खर्च बढ़े हुए हैं, ऊपर से गैस सिलेंडर की कमी ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। कारोबारियों के मुताबिक, बाजार में कॉमर्शियल सिलेंडर समय पर उपलब्ध नहीं हो रहा, और जहां मिल रहा है, वहां भी सप्लायर मनमाने रेट वसूल रहे हैं।
रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि किचन का पूरा सिस्टम गैस सिलेंडर पर निर्भर करता है। ऐसे में सिलेंडर की सप्लाई बाधित होने या महंगे दाम पर मिलने से रोज का संचालन प्रभावित हो रहा है। कई छोटे ढाबे और मध्यम स्तर के रेस्टोरेंट अब घाटे में चलने लगे हैं। उनका कहना है कि यदि यही स्थिति कुछ और दिन जारी रही तो कई जगहों पर ताला लगाने की नौबत आ सकती है।
त्रिवेणी नगर इलाके में खुलेआम कालाबाजारी का आरोप
Commercial LPG cylinder price Rajasthan : जयपुर के त्रिवेणी नगर इलाके के कई रेस्टोरेंट संचालकों ने बताया कि कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कालाबाजारी खुलेआम हो रही है। संचालकों का आरोप है कि सप्लायर निर्धारित कीमत से करीब 600 से 700 रुपए अधिक वसूल रहे हैं। कई जगह एक सिलेंडर 2500 रुपए तक में बेचा जा रहा है।
बताया जा रहा है कि एक गैस एजेंसी की सप्लाई वैन मौके पर पहुंची और रेस्टोरेंट मालिकों को ऊंचे दाम पर सिलेंडर दिए गए। इस दौरान कारोबारियों ने नाराजगी जताई और कहा कि एजेंसियों की इस मनमानी पर प्रशासन को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। उनका कहना है कि एक तरफ सरकार महंगाई नियंत्रित करने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर जरूरी व्यावसायिक ईंधन की ऐसी कालाबाजारी छोटे कारोबारियों की कमर तोड़ रही है।
घरेलू गैस सप्लाई पर शिकायतें कम
Restaurant LPG supply disruption : जानकारी के अनुसार, प्रदेश के अधिकतर हिस्सों में घरेलू गैस सिलेंडर की सप्लाई को लेकर शिकायतें कम सामने आई हैं। यानी घरेलू उपभोक्ताओं के स्तर पर स्थिति उतनी गंभीर नहीं दिख रही, लेकिन कॉमर्शियल सिलेंडर की उपलब्धता बड़ी समस्या बन गई है। इसका सीधा असर उन कारोबारों पर पड़ रहा है जो प्रतिदिन बड़ी मात्रा में गैस का इस्तेमाल करते हैं।
होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, कैटरिंग यूनिट, हॉस्टल मैस और छोटे फूड आउटलेट्स सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं। कारोबारियों का कहना है कि उन्हें घरेलू सिलेंडर की तरह नियमित आपूर्ति नहीं मिल पा रही, जबकि उनकी जरूरत लगातार बनी हुई है।

कोटा में हॉस्टल और मैस संचालकों की बढ़ी चिंता
Rajasthan gas cylinder black market : कोटा में यह संकट ज्यादा गंभीर रूप लेता दिख रहा है। यहां बड़ी संख्या में कोचिंग स्टूडेंट्स प्राइवेट हॉस्टल और मैस पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित होने से हजारों छात्रों के भोजन की व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। हॉस्टल और मैस संचालकों का कहना है कि अगर जल्द सप्लाई सामान्य नहीं हुई तो बच्चों को नियमित खाना उपलब्ध कराना मुश्किल हो जाएगा।
बताया जा रहा है कि कोटा में दो हजार से ज्यादा मैस और प्राइवेट हॉस्टल इस परेशानी से प्रभावित हैं। कई संचालकों ने अपने यहां किचन संचालन सीमित कर दिया है, जबकि कुछ ने अस्थायी रूप से किचन बंद तक कर दिए हैं। यह स्थिति छात्रों और अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है।
कोयले की भट्टी और इलेक्ट्रिक उपकरणों से चल रहा काम
सिलेंडर की कमी के कारण कई हॉस्टल और मैस अब वैकल्पिक साधनों का सहारा लेने लगे हैं। कहीं इलेक्ट्रिक उपकरणों पर खाना बनाया जा रहा है, तो कहीं कोयले की भट्टी का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, संचालकों का कहना है कि यह व्यवस्था न तो स्थायी है और न ही किफायती। इससे समय ज्यादा लगता है, श्रम बढ़ता है और लागत भी बढ़ जाती है।
कोयले की भट्टी पर बड़े स्तर पर खाना बनाना कठिन होता है, जबकि इलेक्ट्रिक उपकरणों से एक साथ बड़ी संख्या में छात्रों का भोजन तैयार करना आसान नहीं है। ऐसे में संचालकों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ संचालन संबंधी परेशानियों का भी सामना करना पड़ रहा है।
शादी-समारोह और कैटरिंग कारोबार पर भी असर
कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी का असर अब शादी-समारोह और कैटरिंग कारोबार पर भी दिखाई देने लगा है। आने वाले दिनों में शादियों और अन्य मांगलिक कार्यक्रमों की संख्या अधिक है। ऐसे में कैटरर्स को बड़ी मात्रा में गैस सिलेंडर की जरूरत होती है। लेकिन सप्लाई बाधित होने और ऊंचे दाम वसूले जाने से उनकी चिंता बढ़ गई है। कैटरिंग कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि कार्यक्रम पहले से तय होते हैं और उनमें भोजन व्यवस्था की जिम्मेदारी समय पर निभानी पड़ती है। ऐसे में सिलेंडर की कमी या कालाबाजारी के कारण काम प्रभावित हुआ तो आर्थिक नुकसान के साथ प्रतिष्ठा पर भी असर पड़ सकता है।
कारोबारियों ने प्रशासन से की कार्रवाई की मांग
होटल, रेस्टोरेंट, हॉस्टल और कैटरिंग कारोबार से जुड़े लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई जल्द सामान्य कराई जाए और कालाबाजारी पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो इसका असर बड़े स्तर पर खाद्य सेवा क्षेत्र पर पड़ेगा। कारोबारियों का कहना है कि गैस जैसी जरूरी वस्तु की मनमानी कीमत वसूली न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह उपभोक्ताओं और छोटे व्यवसायों दोनों के हितों के खिलाफ है। उन्होंने मांग की है कि संबंधित एजेंसियों की जांच हो, दोषियों पर कार्रवाई की जाए और निर्धारित दर पर नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
संकट गहराया तो आम लोगों पर भी पड़ेगा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कॉमर्शियल गैस सिलेंडर संकट लंबा खिंचता है, तो इसका असर केवल कारोबारियों तक सीमित नहीं रहेगा। होटल-रेस्टोरेंट महंगा खाना परोसने को मजबूर हो सकते हैं, हॉस्टल में छात्रों की भोजन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है और कैटरिंग सेवाओं की लागत भी बढ़ सकती है। यानी आने वाले दिनों में यह संकट आम लोगों की जेब और दिनचर्या दोनों पर असर डाल सकता है।
फिलहाल राजस्थान में कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की किल्लत और कालाबाजारी ने व्यापारिक गतिविधियों को झटका दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन और संबंधित विभाग इस समस्या से निपटने के लिए कितनी जल्दी और कितनी प्रभावी कार्रवाई करते हैं।



