
Girija Vyas Biography : उदयपुर/राजसमंद. मेवाड़ की राजनीति के एक युग खत्म हो गया। जी हां, मेवाड़ की वरिष्ठ कांग्रेस नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री और प्रदेश कांग्रेस कमेटी की पूर्व अध्यक्ष डॉ. गिरिजा व्यास का 1 मई 2025 शाम 7..5 बजे अहमदाबाद के जायडस चिकित्सालय में निधन हो गया। 79 वर्षीय डॉ. व्यास करीब एक माह से अस्पताल में । गणगौर पूजन के दौरान चुन्नी में आग लगने से वह 90 प्रतिशत तक झुलस गई थी। इस हादसे ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे राजनीतिक और सामाजिक जगत को स्तब्ध कर दिया। उनके निधन की खबर ने देशभर में शोक की लहर दौड़ा दी और कांग्रेस सहित विभिन्न दलों के नेताओं ने दु:ख व्यक्त किया। गिरिजा व्यास जब उदयपुर सांसद व केन्द्रीय मंत्री रही, तब राजसमंद भी उदयपुर लोकसभा का ही हिस्सा था। इसलिए गिरिजा व्यास का राजसमंद व नाथद्वारा से भी खास लगाव रहा।
Congress Leader Passes Away : डॉ. गिरिजा व्यास का जन्म 8 जुलाई 1946 को राजसमंद जिले के नाथद्वारा में हुआ था। 31 मार्च 2025 को उदयपुर में अपने देत्य मगरी स्थित आवास पर गणगौर पूजा के दौरान आरती करते समय उनकी चुन्नी में आग लग गई। इस हादसे में वे लगभग 90 प्रतिशत तक झुलस गई थीं। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें तुरंत उदयपुर से अहमदाबाद के ज़ाइडस अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां वे आईसीयू में थीं। चिकित्सकों ने उनकी स्थिति को स्थिर करने की पूरी कोशिश की, लेकिन गुरुवार, 1 मई 2025 शाम 7.15 बजे अंतिम सांस ली। उपचार के दौरान उन्हें ब्रेन हेमरेज भी हुआ था।
Girija Vyas life story : उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए शुक्रवार सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक उनके उदयपुर स्थित आवास पर रखा जाएगा। इसके बाद शाम 4 बजे उदयपुर में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। इस दौरान उनके समर्थक, सहयोगी और आमजन उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए उपस्थित रहेंगे।
एक प्रेरणादायक जीवन यात्रा
Udaipur MP Girija Vyas : डॉ. गिरिजा व्यास न केवल एक राजनेता, बल्कि एक शिक्षाविद, लेखिका और समाजसेवी थीं। उन्होंने उदयपुर की मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी से स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की और बाद में दिल्ली यूनिवर्सिटी से दर्शनशास्त्र में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के दर्शनशास्त्र विभाग में प्रोफेसर के रूप में भी कार्य किया। उनकी लेखनी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में समृद्ध थी और वे कविता लेखन में भी गहरी रुचि रखती थीं। उनकी पुस्तकें और लेखन समाज के विभिन्न मुद्दों पर गहन चिंतन को दर्शाते हैं। राजनीति में उनका योगदान अविस्मरणीय रहा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के अनुसार, डॉ. व्यास सोनिया गांधी और गांधी परिवार के बेहद करीबी लोगों में शुमार थीं। उनकी सादगी, समर्पण और बौद्धिक क्षमता ने उन्हें पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में एक विशेष स्थान दिलाया।
गिरिजा का राजनीतिक सफर
- 1777 से 1984 तक उदयपुर में जिला कांग्रेस कमेटी की जिलाध्यक्ष
- 1985 से 1990 तक उदयपुर शहर विधायक
- 1886 से 1990 तक पर्यटन राज्य मंत्री
- राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी की प्रदेशाध्यक्ष
- 1990 से अब तक अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की सदस्य
- 1991 में पहली बार उदयपुर से सांसद बन लोकसभा पहुंची
- 1991 से 1993 तक सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री
- 1993 में अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष
- 1996 में 11वीं और 1999 में 13वीं लोकसभा की सदस्य निर्वाचित हुई
- 2005 से 2011 तक दो कार्यकाल राष्ट्रीय महिला आयोग अध्यक्ष
- अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के मुखपत्र कांग्रेस संदेश पत्रिका की मुख्य सम्पादक

राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर
Congress Leader : डॉ. गिरिजा व्यास के निधन पर कांग्रेस और भाजपा सहित विभिन्न दलों के नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. गिरिजा व्यास के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को सद्गति प्रदान करें और शोकाकुल परिजनों को यह दुख सहन करने की शक्ति दें।”
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा, “डॉ. गिरिजा व्यास का निधन हम सबके लिए एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने शिक्षा, राजनीति और समाज सेवा के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया। उनका इस तरह असमय चले जाना हम सभी के लिए एक बड़ा आघात है।”

भाजपा नेता गजेंद्र सिंह खींवसर ने लिखा, “उनका निधन प्रदेश की राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।” नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी उनके योगदान को याद करते हुए कहा, “उनका निधन हम सभी के लिए अपूरणीय है।” नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने उन्हें प्रखर वक्ता और कुशल प्रशासक बताते हुए उनके सामाजिक न्याय के कार्यों को अविस्मरणीय बताया।
पंजाब के राज्यपाल का भावुक संदेश
पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ प्रशासक गुलाबचंद कटारिया ने डॉ. व्यास के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि वे और डॉ. व्यास विद्यार्थी जीवन से मित्र थे। कटारिया ने कहा, “हम राजनीतिक प्रतिद्वंदी जरूर थे, लेकिन उदयपुर के विकास के लिए हमेशा एक-दूसरे का साथ देते थे। उनकी माताजी मेरे गांव में अध्यापिका थीं, और तब से मैं उनके परिवार को जानता हूं। यह मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है। मैं उनकी आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।”
अंतिम विदाई
डॉ. गिरिजा व्यास का निधन न केवल कांग्रेस पार्टी के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक बड़ी क्षति है। उनकी सादगी, बौद्धिकता और समाज सेवा की भावना हमेशा याद की जाएगी। उदयपुर में शुक्रवार को राजकीय सम्मान के साथ होने वाला उनका अंतिम संस्कार उनके प्रति लोगों के प्रेम और सम्मान का प्रतीक होगा।
डॉ. गिरिजा व्यास का बायोडेटा
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| नाम | डॉ. गिरिजा व्यास |
| पिता का नाम | कृष्णा शर्मा |
| माता का नाम | यमुना देवी व्यास |
| भाई-बहन का नाम | गोपाल शर्मा (भाई); अन्य भाई-बहनों की जानकारी उपलब्ध नहीं |
| पति का नाम | अविवाहित |
| बच्चे | कोई नहीं (अविवाहित होने के कारण) |
| परिवार के बारे में | डॉ. व्यास का परिवार उदयपुर, राजस्थान से था। उनके पिता का निधन उनके बचपन में ही हो गया था, जिसके बाद उन्होंने परिवार की जिम्मेदारी संभाली। वे अपने भाई गोपाल शर्मा के साथ निकटता से जुड़ी थीं। |
| रुचि | कविता लेखन, साहित्य, नृत्य (बचपन में नृत्यांगना बनने की इच्छा), सामाजिक कार्य, और महिला सशक्तिकरण। उन्होंने हिंदी, उर्दू, और अंग्रेजी में कविताएँ लिखीं। |
| पढ़ाई | – मीरा कॉलेज, उदयपुर से स्नातक – एमबी कॉलेज (मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी), उदयपुर से दर्शनशास्त्र में स्नातकोत्तर (गोल्ड मेडलिस्ट) – मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी, उदयपुर से दर्शनशास्त्र में पीएचडी (थीसिस: गीता और बाइबिल का तुलनात्मक अध्ययन) – दिल्ली यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा – यूनिवर्सिटी ऑफ डेलावेयर, अमेरिका में अध्यापन |
| राजनीतिक सफर | – 1977-1984: जिला कांग्रेस कमेटी, उदयपुर की अध्यक्ष – 1985-1990: राजस्थान विधानसभा सदस्य (उदयपुर से); पर्यटन, शिक्षा, और वित्त मंत्रालयों में राज्य मंत्री – 1991: पहली बार उदयपुर से लोकसभा सदस्य निर्वाचित; सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री (1991-1993) – 1993: अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष – 1996: ग्यारहवीं लोकसभा सदस्य – 1999: तेरहवीं लोकसभा सदस्य – 2001-2004: राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष – 2005-2011: राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष (दो कार्यकाल) – 2009: चित्तौड़गढ़ से पंद्रहवीं लोकसभा सदस्य – 1990-2025: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की सदस्य – 2018: अंतिम लोकसभा चुनाव हारने के बाद सक्रिय चुनावी राजनीति से दूरी |
| अनुभव | – उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ डेलावेयर, अमेरिका में दर्शनशास्त्र की प्रोफेसर – कांग्रेस संदेश पत्रिका की मुख्य संपादक – केंद्र और राज्य सरकार में विभिन्न मंत्रालयों (पर्यटन, सूचना及प्रसारण, शिक्षा, वित्त) में मंत्री – राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष के रूप में महिलाओं के अधिकारों और सशक्तिकरण के लिए नीतिगत कार्य – महिला सशक्तिकरण कमेटी, गृह मंत्रालय सलाहकार समिति, राजभाषा समिति, और पेट्रोलियम मंत्रालय सलाहकार समिति की सदस्य |
| उपलब्धियां | – दर्शनशास्त्र में स्नातकोत्तर में गोल्ड मेडल – आठ पुस्तकों की लेखिका, जिनमें ‘एहसास के पार’ (उर्दू कविताएँ), ‘सीप, समुद्र और मोती’ (हिंदी-उर्दू कविताएँ), और ‘नॉस्टैल्जिया’ (अंग्रेजी कविताएँ) शामिल हैं – चार बार लोकसभा सदस्य (उदयपुर और चित्तौड़गढ़ से) – दो बार राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष; महिलाओं के अधिकारों और सम्मान के लिए प्रभावशाली कार्य – राजस्थान और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस संगठन को मजबूती प्रदान की – उदयपुर और चित्तौड़गढ़ में विकास कार्यों में योगदान, विशेष रूप से शिक्षा और महिला कल्याण के क्षेत्र में – भाजपा के दिग्गज नेता गुलाबचंद कटारिया को चुनाव में हराया |
राजसमंद- नाथद्वारा से रहा खास लगाव
गिरिजा व्यास न सिर्फ उदयपुर व मेवाड़ की राजनीति में बड़ा नाम था, बल्कि राजस्थान और देश की राजनीति में भी खास धाक रही। गिरिजा का राजसमंद और नाथद्वारा शहर से खास लगाव रहा। उनके पिता श्रीनाथजी मंदिर में सेवादार थे। इसीलिए बचपन में वे राजसमंद व नाथद्वारा की गलियों में रही। नाथद्वारा में तो उनका जन्म हुआ। इसलिए राजसमंद में ब्रॉडगेज लाने के लिए प्रयास गिरिजा व्यास द्वारा ही पहली बार किए गए। तत्कालीन रेल मंत्री लालूप्रसाद यादव जब मेवाड़ यात्रा पर आए, तो गिरिजा व्यास के आवास पर ही ठहरे थे और उसी वक्त ब्रॉडगेज लाइन का ऐलान भी कर दिया था।




