
Go Samman Aavahan Abhiyan : भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर का प्रतीक गोमाता को सेवा, सुरक्षा और सम्मान दिलाने के लिए एक अभूतपूर्व पहल शुरू की गई है। केंद्र और राज्य सरकारों से संवैधानिक दायरे में रहकर अहिंसक तरीके से गोमाता को मौलिक अधिकार प्रदान कराने के उद्देश्य से गो सम्मान आव्हान अभियान की शुरुआत हो चुकी है। यह अभियान अगले दो वर्षों तक संतों और गोभक्तों के मार्गदर्शन में संचालित होगा।
राजस्थान गो सेवा समिति, जयपुर की राजसमंद जिला शाखा के अध्यक्ष जेठू सिंह राजपुरोहित ने बताया कि यह अभियान किसी संस्था या संगठन के बैनर तले नहीं, बल्कि ईश्वर, गोमाता और नंदी बाबा के आशीर्वाद के साथ संचालित होगा। इसका एकमात्र लक्ष्य गोमाता को सेवा, सुरक्षा और सम्मान दिलाना है। इस अभियान में न तो मंचीय भाषण होंगे, न ही माइक्रोफोन का उपयोग होगा। गोप्रेमी अपनी भावनाओं को संकीर्तन, रैली और प्रार्थना पत्रों के माध्यम से व्यक्त करेंगे। अभियान को गति देने के लिए जिले में गोभक्तों की बैठकों का सिलसिला दीपावली से शुरू हो चुका है। इस अभियान को देशव्यापी बनाने के लिए एक सुनियोजित रणनीति तैयार की गई है। देश के 700 जिलों में प्रत्येक जिला स्तर पर तीन संत और तीन गोप्रेमी कार्यकर्ताओं को सेवा का दायित्व सौंपा जाएगा। ये कार्यकर्ता जिले के अन्य गोभक्तों और संतों को अभियान से जोड़ेंगे। इसी तरह, देश की 5000 तहसीलों में प्रत्येक तहसील स्तर पर एक संत और एक गोप्रेमी कार्यकर्ता नियुक्त होंगे, जो तहसील के अन्य गोप्रेमियों को इस पुनीत कार्य से जोड़ने का कार्य करेंगे।

गो सम्मान आव्हान अभियान की कार्ययोजना

Cow protection campaign India : अभियान को व्यवस्थित और प्रभावी बनाने के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है:
- जिला और तहसील स्तर पर संगठन: प्रत्येक जिला मुख्यालय पर कम से कम तीन गोभक्तों और संतों को जोड़ा जाएगा, जिनमें दो प्रमुख कार्यकर्ता और चार सहयोगी होंगे। ये कार्यकर्ता अभियान को गति देने और स्थानीय स्तर पर जागरूकता फैलाने का कार्य करेंगे।
- प्रचार-प्रसार (जनवरी-मार्च 2026): इस अवधि में गहन जनसंपर्क और प्रचार-प्रसार किया जाएगा। गोभक्तों और संतों के साथ मिलकर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
- प्रथम चरण (27 अप्रैल 2026): इस दिन सभी जिला और तहसील स्तर के गोभक्त और संत अपने-अपने क्षेत्र के तहसील मुख्यालयों पर पहुंचकर तहसीलदार या एसडीएम को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम प्रार्थना पत्र सौंपेंगे।
- प्रतीक्षा अवधि (मई-जून 2026): प्रार्थना पत्र सौंपने के बाद दो महीने तक केंद्र और राज्य सरकारों से सकारात्मक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा की जाएगी। यदि इस दौरान अपेक्षित परिणाम नहीं मिले, तो अगला कदम उठाया जाएगा।
- द्वितीय चरण (27 जुलाई 2026): यदि प्रथम चरण में कोई ठोस परिणाम नहीं मिलता, तो सभी जिला और तहसील स्तर के गोभक्त और संत अपने-अपने जिला मुख्यालय पर एकत्र होंगे और जिला कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम प्रार्थना पत्र सौंपेंगे।

- दूसरी प्रतीक्षा अवधि (अगस्त-सितंबर 2026): इस दौरान पुनः दो महीने तक सरकारों से जवाब और परिणाम की प्रतीक्षा की जाएगी। यदि इस बार भी कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया, तो अभियान अगले चरण में प्रवेश करेगा।
- Go Seva Samiti Rajsamand राजधानी में प्रदर्शन (27 अक्टूबर 2026): इस दिन सभी जिला और तहसील स्तर के संत और गोभक्त अपने-अपने राज्य की राजधानी में एकत्र होंगे। यहां मुख्यमंत्री और राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम प्रार्थना पत्र सौंपे जाएंगे।
- अंतिम चरण (27 फरवरी 2027): यदि दो महीने की प्रतीक्षा के बाद भी केंद्र और राज्य सरकारों से कोई सकारात्मक परिणाम नहीं मिलता, तो देश के सभी 700 जिलों और 5000 तहसीलों के गोभक्त और संत दिल्ली में एकत्र होंगे। यहां शांतिपूर्ण तरीके से संकीर्तन के माध्यम से गोमाता की सेवा, सुरक्षा और सम्मान के लिए केंद्र सरकार से आग्रह किया जाएगा। यह संकीर्तन 15 अगस्त 2027 तक चलेगा।
- Cow protection awareness संकीर्तन का स्वरूप: इस दौरान प्रत्येक जिले से गोभक्त और संत सात-सात दिन के लिए दिल्ली पहुंचेंगे। अलग-अलग तिथियों पर विभिन्न जिलों के प्रतिनिधि इस संकीर्तन में शामिल होंगे।
- आमरण अनशन (यदि आवश्यक हो): यदि 15 अगस्त 2027 तक भी केंद्र सरकार से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिलता, तो पांच-पांच गोभक्त आमरण अनशन शुरू करेंगे। यदि किसी गोसेवक के प्राण संकट में पड़ते हैं, तो उनकी जगह अन्य गोप्रेमी या संत अनशन में शामिल होंगे। यह प्रक्रिया तब तक जारी रहेगी, जब तक गोमाता को सेवा, सुरक्षा और सम्मान का अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता।

अभियान का उद्देश्य और महत्व
Go Mata rights movement : गो सम्मान आव्हान अभियान का उद्देश्य केवल गोमाता को सम्मान और सुरक्षा प्रदान करना है। यह अभियान भारतीय संस्कृति और परंपराओं के प्रति गहरी आस्था का प्रतीक है। गोमाता को भारतीय समाज में माता का दर्जा प्राप्त है, और यह अभियान इस दर्जे को संवैधानिक रूप से मान्यता दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
