
Hanuman Beniwal controversial statement : राजस्थान की राजनीति में उस वक्त तूफान खड़ा हो गया, जब राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के अध्यक्ष और नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल ने राजस्थान के इतिहास और शूरवीरों पर एक आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी। जयपुर में चल रहे एक धरने में SI भर्ती रद्द करने की मांग के दौरान बेनीवाल ने कहा, “राजस्थान के लोगों ने कभी मुगलों से लड़ाई नहीं लड़ी। महाराजा सूरजमल और एक-दो वीरों को छोड़ दें, तो यहाँ किसी ने भी मुगलों का सामना नहीं किया। यहाँ के राजा-महाराजा अपनी बेटियाँ मुगलों को सौंप देते थे और समझौता कर लेते थे। जब मुगल सेना आक्रमण के लिए निकलती थी, तो 70 किलोमीटर पहले ही ये लोग अपनी बेटियाँ लेकर समझौता करने पहुँच जाते थे और कहते थे कि यहाँ मत आना।” इस बयान ने राजपूत समाज को गहरे तक आहत किया है, और उनके गुस्से की आग अब सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक फैल गई है।
शीला शेखावत का तीखा हमला: “जाति मानसिक कीड़े ही ऐसी बातें करते हैं”
Rajput community protests against Hanuman Beniwal इस बयान के बाद करणी सेना की नेता और सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की पत्नी शीला शेखावत ने हनुमान बेनीवाल पर जमकर हमला बोला। शीला ने बेनीवाल की मानसिकता पर सवाल उठाते हुए कहा, “जो लोग जाति मानसिक कीड़े होते हैं, वही ऐसी घटिया और ओछी बातें करते हैं। हम तमीज से बात करना जानते हैं, लेकिन जब बात हमारे सम्मान पर आती है, तो हम किसी को नहीं बख्शते।” उन्होंने बेनीवाल पर बहन-बेटियों के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने का आरोप लगाया और कहा, “हर समाज में बहन-बेटियाँ होती हैं, लेकिन बेनीवाल जैसे बेशर्म को अपनी इस हरकत पर शर्म तक नहीं आती। क्या वह अपनी बहन-बेटी को 70 किलोमीटर दूर मुगलों को सौंपकर समझौता कर सकते हैं? अगर नहीं, तो दूसरों की बेटियों के लिए ऐसी बातें कैसे बोल सकते हैं?” शीला की यह बातें राजपूत समाज की भावनाओं को व्यक्त करती हैं, जो इस बयान से आहत है।
“सस्ता नशा करके भाषण देता है बेनीवाल”
Rajput outrage Beniwal शीला शेखावत ने हनुमान बेनीवाल की भाषण शैली और व्यवहार पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “बेनीवाल सस्ता नशा करके बैठता है। गांजा और अफीम का नशा करके यह भाषण देता है, यह बात सभी जानते हैं।” इसके साथ ही, शीला ने नागौर में अपनी करणी सेना की टीम से अपील की कि वे बेनीवाल को तब तक घर से बाहर न निकलने दें, जब तक वह सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांग लेते। शीला ने सोशल मीडिया पर भी “#माफी_मांगो_बेनीवाल” हैशटैग के साथ एक मुहिम शुरू की, जिसके जरिए उन्होंने अपने समर्थकों से बेनीवाल के खिलाफ एकजुट होने की अपील की।
बेनीवाल को चेतावनी: “सांसद की कुर्सी भी छिन जाएगी”
Hanuman Beniwal controversy अपने बयान को और सख्त करते हुए शीला शेखावत ने हनुमान बेनीवाल को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “आज बेनीवाल सांसद हैं, लेकिन भविष्य में वह किसी भी पार्टी के साधारण सदस्य तक नहीं रह पाएंगे। नागौर की जनता ने पहले भी उन्हें विधायक चुनाव में हराकर सबक सिखाया था। अब देखना, सांसद की कुर्सी भी उनके हाथ से छिन जाएगी।” शीला की इस चेतावनी ने साफ कर दिया कि करणी सेना और राजपूत समाज इस मामले को हल्के में नहीं लेने वाला। उनका यह बयान राजस्थान की सियासत में एक नई जंग की शुरुआत का संकेत देता है।
रविंद्र सिंह भाटी ने भी साधा निशाना
इस विवाद में शिव (बाड़मेर) से विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने भी हनुमान बेनीवाल पर निशाना साधा। भाटी ने कहा, “राजनीति में इस तरह की ओछी बातें करना गलत है। जनता पहले भी ऐसी बयानबाजी पर चमत्कार दिखा चुकी है, और भविष्य में भी दिखाएगी।” उन्होंने राजस्थान की शौर्य गाथा को याद करते हुए कहा, “यह वही राजस्थान है, जिसके बारे में रामधारी सिंह दिनकर ने कहा था कि जब मैं इस धन्य धरा पर पैर रखता हूँ, तो मेरा पैर कांपने लगता है कि कहीं मेरे पैर के नीचे किसी समाधि या सती का थान न आ जाए। ऐसे शूरवीरों की धरती पर इस तरह की टिप्पणी करना बेनीवाल को शोभा नहीं देता।” भाटी ने बेनीवाल को सलाह दी कि वह अपनी राजनीति करें, लेकिन इस तरह की ओछी बातों से बचें, क्योंकि राजस्थान हमेशा से सभी को साथ लेकर चलने वाला राज्य रहा है।

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष का पलटवार: “बेनीवाल की सोच कुंठित”
इस विवाद में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने भी हनुमान बेनीवाल पर तीखा हमला बोला। जोधपुर दौरे पर आए राठौड़ ने कहा, “बेनीवाल का यह बयान उनकी कुंठित सोच को दर्शाता है। उन्हें राजस्थान का गौरवशाली इतिहास पढ़ना चाहिए। राणा सांगा, राणा कुम्भा, पृथ्वीराज चौहान, अमर सिंह राठौड़, और दुर्गादास राठौड़ जैसे वीरों की शौर्य गाथाएँ पढ़कर ही उनका ज्ञान बढ़ेगा। लेकिन बेनीवाल को मेरी-तेरी की सियासत से फुर्सत नहीं है।” राठौड़ ने इस मौके पर कांग्रेस पर भी तंज कसा और कहा, “कांग्रेस हमेशा से टूटती रही है और अब भी बिखरने की कगार पर है। व्यक्तिवादी पार्टियों में स्वार्थ चलता है, नीतियाँ नहीं। जरा सा स्वार्थ टकराए, तो पार्टी टूट जाती है। लेकिन नीतियों पर चलने वाली पार्टी हमेशा मजबूत रहती है।”
बेनीवाल का बयान: क्या थी पूरी बात?
हनुमान बेनीवाल ने जयपुर में SI भर्ती रद्द करने की मांग को लेकर चल रहे एक धरने में यह विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था, “राजस्थान में कभी किसी ने मुगलों से लड़ाई नहीं लड़ी। महाराजा सूरजमल और एक-दो वीरों को छोड़ दें, तो यहाँ किसी ने भी मुगलों का डटकर सामना नहीं किया। यहाँ जिन्होंने राज किया, उन्होंने अपनी बेटियाँ मुगलों को सौंप दीं और समझौता कर लिया। जब मुगल सेना आक्रमण के लिए निकलती थी, तो 70 किलोमीटर पहले ही ये लोग अपनी बेटियाँ लेकर समझौता करने पहुँच जाते थे और कहते थे कि यहाँ मत आना।” इस बयान ने राजपूत समाज को गहरे तक आहत किया, क्योंकि राजस्थान का इतिहास शौर्य और बलिदान की कहानियों से भरा हुआ है।
राजपूत समाज और करणी सेना का गुस्सा
हनुमान बेनीवाल का यह बयान राजपूत समाज के लिए अपमानजनक माना गया, और करणी सेना ने इसे लेकर कड़ा रुख अपना लिया। सोशल मीडिया पर भी इस बयान के खिलाफ गुस्सा देखा जा रहा है। कई लोगों ने बेनीवाल की टिप्पणी को “इतिहास का अपमान” करार दिया है। कुछ लोगों का कहना है कि बेनीवाल ने यह बयान सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए दिया, लेकिन यह उनकी राजनीति के लिए भारी पड़ सकता है। सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने बेनीवाल का समर्थन करते हुए कहा कि उन्होंने इतिहास की सच्चाई को सामने रखा, लेकिन ज्यादातर लोगों ने इसे राजस्थान की शूरवीर परंपरा का अपमान बताया।
बेनीवाल की सियासी मुश्किलें बढ़ीं
इस विवाद ने हनुमान बेनीवाल की सियासी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राजपूत समाज और करणी सेना का गुस्सा उनके लिए भारी पड़ सकता है। नागौर, जहाँ से बेनीवाल सांसद हैं, में राजपूत समुदाय की अच्छी-खासी आबादी है, और यह विवाद उनके वोट बैंक को प्रभावित कर सकता है। शीला शेखावत की चेतावनी और करणी सेना का विरोध इस बात का संकेत है कि बेनीवाल को इस मामले में माफी मांगनी पड़ सकती है, वरना उनकी सांसद की कुर्सी भी खतरे में पड़ सकती है। इसके अलावा, बीजेपी और अन्य विपक्षी दलों ने भी इस बयान को भुनाने की कोशिश शुरू कर दी है, जिससे बेनीवाल की सियासी जमीन और कमजोर हो सकती है।
राजस्थान का शौर्यपूर्ण इतिहास
राजस्थान का इतिहास शौर्य, बलिदान और स्वाभिमान की कहानियों से भरा हुआ है। यहाँ के राजा-महाराजाओं ने मुगलों और अन्य आक्रमणकारियों के खिलाफ कई बार डटकर मुकाबला किया। मेवाड़ के राणा सांगा ने मुगल बादशाह बाबर के खिलाफ खानवा की लड़ाई लड़ी, जिसमें वह घायल हो गए, लेकिन हार नहीं मानी। राणा कुम्भा ने अपनी वीरता से मेवाड़ को एक शक्तिशाली राज्य बनाया। चित्तौड़ के पृथ्वीराज चौहान ने अपनी शौर्य गाथा से इतिहास में नाम दर्ज कराया। इसके अलावा, अमर सिंह राठौड़ और दुर्गादास राठौड़ जैसे वीरों ने भी अपने बलिदान से राजस्थान की धरती को गौरवान्वित किया। ऐसे में हनुमान बेनीवाल का बयान राजस्थान के इस गौरवशाली इतिहास को नजरअंदाज करने वाला माना जा रहा है।



