
Hindustan Zinc Bhamashah Award : भारत की सबसे बड़ी और विश्व की दूसरी सबसे बड़ी एकीकृत जिंक उत्पादक कंपनी, हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड, को राजस्थान सरकार द्वारा आयोजित 29वें भामाशाह सम्मान समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए छह प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा गया। यह समारोह माहेश्वरी पब्लिक स्कूल के तक्षशिला सभागार में आयोजित किया गया, जहां मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, उपमुख्यमंत्री प्रेम चंद बैरवा, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, प्रमुख सचिव (शिक्षा) कृष्ण कुणाल, और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने पुरस्कार प्रदान किए। हिंदुस्तान जिंक की छह इकाइयों—रामपुरा आगुचा माइन, चंदेरिया लेड जिंक स्मेल्टर, जावर माइन्स, राजपुरा दरीबा कॉम्प्लेक्स, जिंक स्मेल्टर देबारी, और कायड माइन—को शिक्षा के क्षेत्र में उनके सकारात्मक और परिवर्तनकारी योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
यह लगातार दसवां वर्ष है जब हिंदुस्तान जिंक को राजस्थान सरकार द्वारा भामाशाह पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, जो उनके CSR (Corporate Social Responsibility) पहलों के तहत शिक्षा के क्षेत्र में किए गए अभूतपूर्व कार्यों का प्रमाण है। कंपनी ने वर्ष 2017 से अब तक 430 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश शिक्षा के क्षेत्र में किया है, जिससे प्रतिवर्ष 2 लाख से अधिक ग्रामीण और आदिवासी बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं।
भामाशाह पुरस्कार और हिंदुस्तान जिंक की उपलब्धियां
Hindustan Zinc CSR in Education : भामाशाह पुरस्कार राजस्थान सरकार द्वारा शिक्षा, सामाजिक विकास, और सामुदायिक उत्थान के लिए उत्कृष्ट योगदान देने वाली संस्थाओं और व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है। इस वर्ष, हिंदुस्तान जिंक की पांच इकाइयों—रामपुरा आगुचा माइन, चंदेरिया लेड जिंक स्मेल्टर, जावर माइन्स, राजपुरा दरीबा कॉम्प्लेक्स, और जिंक स्मेल्टर देबारी—को शिक्षा विभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जबकि कायड माइन को शिक्षा भूषण पुरस्कार प्राप्त हुआ। ये पुरस्कार शिक्षा के क्षेत्र में कंपनी की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता और ग्रामीण व आदिवासी समुदायों के लिए किए गए परिवर्तनकारी कार्यों की मान्यता हैं।
पुरस्कार समारोह में हिंदुस्तान जिंक की ओर से रामपुरा आगुचा माइन के IBU CEO राममुरारी, चंदेरिया लेड जिंक स्मेल्टर के यूनिट हेड अमित सुराणा, राजपुरा दरीबा कॉम्प्लेक्स के IBU CEO बलवंत सिंह राठौड़, जावर माइन्स के IBU CEO अंशुल खंडेलवाल, जिंक स्मेल्टर देबारी के हेड ऑपरेशंस मुकेश कुमार, और कायड माइन्स के माइन मैनेजर अंकुर मांडावत ने पुरस्कार प्राप्त किए। इन पुरस्कारों को स्वीकार करते हुए, कंपनी की CSR टीम ने भी समारोह में सक्रिय भागीदारी निभाई।

हिंदुस्तान जिंक की शैक्षिक पहलें
Corporate social responsibility awards : हिंदुस्तान जिंक ने अपनी CSR पहलों के तहत शिक्षा को सामाजिक विकास का आधार माना है। कंपनी ने पिछले आठ वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में 430 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है, जिसमें से 80 करोड़ रुपये स्कूलों के बुनियादी ढांचे के उन्नयन पर खर्च किए गए हैं। इनमें शामिल हैं:
- कक्षा कक्षों का निर्माण: आधुनिक और सुसज्जित कक्षा कक्ष जो बच्चों को बेहतर सीखने का माहौल प्रदान करते हैं।
- शौचालय और स्वच्छता सुविधाएं: विशेष रूप से बालिकाओं के लिए सुरक्षित और स्वच्छ शौचालयों का निर्माण, जिससे स्कूल ड्रॉपआउट दर में कमी आई है।
- खेल के मैदान: बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए खेल सुविधाओं का विकास।
- पीने के पानी की सुविधाएं: स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- विद्युतीकरण: ग्रामीण स्कूलों में बिजली और सोलर लाइट्स की व्यवस्था।
इसके अलावा, 350 करोड़ रुपये दीर्घकालिक शैक्षिक पहलों पर खर्च किए गए हैं, जिनमें निम्नलिखित प्रमुख कार्यक्रम शामिल हैं:
- नंद घर: यह हिंदुस्तान जिंक की एक प्रमुख पहल है, जो आधुनिक आंगनवाड़ी केंद्रों के रूप में कार्य करती है। ये केंद्र 3-6 वर्ष की आयु के बच्चों को प्रारंभिक बचपन शिक्षा (Early Childhood Education), पोषण, और स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करते हैं। वर्तमान में, 2,500 से अधिक नंद घर राजस्थान और अन्य राज्यों में संचालित हो रहे हैं, जो 1.9 लाख से अधिक बच्चों को लाभान्वित कर रहे हैं।
- शिक्षा संबल: यह हिंदुस्तान जिंक का फ्लैगशिप शिक्षा कार्यक्रम है, जो विद्या भवन सोसाइटी के साथ साझेदारी में संचालित होता है। यह कार्यक्रम ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों में 10वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए विशेष कक्षाएं, शिक्षक प्रशिक्षण, और विज्ञान प्रयोगशालाओं का निर्माण करता है। ‘Book for Friend’ और ‘Reading Mela’ जैसी पहलें बच्चों में पढ़ने की आदत को बढ़ावा देती हैं। यह कार्यक्रम प्रतिवर्ष 2 लाख से अधिक बच्चों को लाभान्वित करता है।
- जीवन तरंग: यह कार्यक्रम विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (दिव्यांग बच्चों) के लिए समावेशी शिक्षा प्रदान करता है। यह उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा और समाज से जोड़ने में मदद करता है। जावर माइन्स की नैरुति संघवी को इस कार्यक्रम के तहत Grant Thornton SABERA 2019 Awards में Promising Social Leader पुरस्कार प्राप्त हुआ था।
- ऊंची उड़ान: यह पहल मेधावी ग्रामीण छात्रों को IIT, NIT, और अन्य शीर्ष संस्थानों में प्रवेश के लिए कोचिंग और मार्गदर्शन प्रदान करती है। यह कार्यक्रम विशेष रूप से ग्रामीण बालिकाओं को उच्च शिक्षा के अवसर प्रदान करने पर केंद्रित है।
- कंपनी-संचालित स्कूल: हिंदुस्तान जिंक हिंद जिंक स्कूल, चित्तौड़गढ़ जैसे स्कूलों का संचालन करता है, जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आधुनिक सुविधाएं प्रदान करते हैं। इस स्कूल को प्लेटिनम सर्टिफिकेशन से सम्मानित किया गया है।
शिक्षा पर प्रभाव और आंकड़े

Nand Ghar by Hindustan Zinc : हिंदुस्तान जिंक की शैक्षिक पहलों ने राजस्थान के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा के परिदृश्य को बदल दिया है। कुछ प्रमुख प्रभाव इस प्रकार हैं:
- नामांकन में वृद्धि: कंपनी की पहलों के कारण स्कूलों में नामांकन, विशेष रूप से किशोर बालिकाओं का, बढ़ा है। कक्षा 10वीं का उत्तीर्ण प्रतिशत 2007 में 47% से बढ़कर 2025 में 93.6% हो गया है, जिसमें बालिकाएं बालकों से बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं।
- शिक्षक प्रशिक्षण: शिक्षा संबल कार्यक्रम के तहत शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है, जिससे शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।
- बुनियादी ढांचे का विकास: 140 सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे को मजबूत किया गया है, जिससे सीखने का माहौल बेहतर हुआ है।
हिंदुस्तान जिंक ने हाल ही में राजस्थान सरकार के शिक्षा विभाग के साथ एक MoU (Memorandum of Understanding) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें अगले पांच वर्षों में 36 करोड़ रुपये का निवेश शिक्षा के क्षेत्र में किया जाएगा। यह निवेश 72 सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे के उन्नयन, शिक्षक प्रशिक्षण, और व्यावसायिक प्रशिक्षण पर केंद्रित होगा।
हिंदुस्तान जिंक के सीईओ का बयान
Hindustan Zinc school infrastructure development : हिंदुस्तान जिंक के सीईओ अरुण मिश्रा ने इस उपलब्धि पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, “शिक्षा समाज के सशक्तिकरण और समृद्धि का आधार है। भामाशाह पुरस्कार प्राप्त करना हमारी शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर प्रतिबद्धता और सामुदायिक विकास के प्रति हमारे दृष्टिकोण का प्रमाण है। हमने राजस्थान के स्कूलों, शिक्षकों, और परिवारों के साथ मजबूत साझेदारी विकसित की है, जिसके परिणामस्वरूप लाखों बच्चों का भविष्य उज्ज्वल हो रहा है। हिंदुस्तान जिंक अपने समुदायों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है और उनकी जरूरतों को प्राथमिकता देता रहेगा।”
अन्य सामाजिक पहलें
हिंदुस्तान जिंक की CSR पहलें केवल शिक्षा तक सीमित नहीं हैं। कंपनी ने 2,300 से अधिक गांवों में 23 लाख से अधिक लोगों के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। इन पहलों में शामिल हैं:
- महिला सशक्तिकरण (Sakhi Program): 27,000 से अधिक महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाया गया है। सखी उत्सव जैसे आयोजनों ने 7,000 से अधिक ग्रामीण महिलाओं को एक मंच प्रदान किया है।
- कौशल विकास (Zinc Kaushal Kendra): 8,000 से अधिक ग्रामीण युवाओं को आतिथ्य, माइक्रोफाइनेंस, सौर ऊर्जा, और सुरक्षा सेवाओं जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्रदान किया गया है, जिसमें 40% महिलाएं शामिल हैं।
- जल संरक्षण: कंपनी ने 18 अरब लीटर पानी का पुनर्चक्रण किया और उदयपुर में 60 MLD सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया, जो स्थानीय झीलों और नदियों को पुनर्जनन में मदद करता है।
- स्वास्थ्य सेवाएं: खुशी आंगनवाड़ी नंदघर कार्यक्रम के तहत 1.9 लाख बच्चों को पोषण और स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा रही हैं।
- खेल और संस्कृति: जिंक फुटबॉल अकादमी ने अंडर-18 श्रेणी में राष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान का नाम रोशन किया है।
हिंदुस्तान जिंक का सामाजिक प्रभाव
हिंदुस्तान जिंक भारत के शीर्ष 10 CSR खर्च करने वाले कॉर्पोरेट्स में शामिल है। कंपनी ने 184 गांवों और 66 ग्राम पंचायतों में अपनी CSR गतिविधियों को केंद्रित किया है, जो उदयपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, और अजमेर जिलों में फैले हुए हैं। कंपनी की शिक्षा संबल, नंद घर, और ऊंची उड़ान जैसी पहलें ग्रामीण और आदिवासी समुदायों में शिक्षा और सशक्तिकरण को बढ़ावा दे रही हैं।
हिंदुस्तान जिंक ने S&P Global Corporate Sustainability Assessment 2023 में 85 का CSA स्कोर प्राप्त किया, जो इसे मेटल्स एंड माइनिंग उद्योग में शीर्ष स्थान देता है। इसके अलावा, कंपनी को S&P Global Platts Metal Award 2022 में Industry Leadership Award और Corporate Social Responsibility Award से सम्मानित किया गया।
भविष्य की योजनाएं
हिंदुस्तान जिंक ने अपनी CSR रणनीति को और विस्तार देने की योजना बनाई है। राइजिंग राजस्थान 2024 पहल के तहत, कंपनी ने शिक्षा, कौशल विकास, और पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान केंद्रित करने की प्रतिबद्धता जताई है। हाल ही में हस्ताक्षरित 36 करोड़ रुपये के MoU के तहत, कंपनी अगले पांच वर्षों में 72 सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे का उन्नयन, शिक्षक प्रशिक्षण, और व्यावसायिक प्रशिक्षण पर निवेश करेगी। इसके अलावा, कंपनी Net Zero Green Building Initiative और Crocodile Conservation Reserve जैसे पर्यावरणीय प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर रही है।



