
Hindustan Zinc Biodiversity Park : हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड, जो भारत की एकमात्र और विश्व की सबसे बड़ी एकीकृत जिंक उत्पादक कंपनी है, ने राजपुरा दरीबा माइंस में Biodiversity Park की स्थापना की है। इस पार्क को 10 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में विकसित किया गया है, जिसमें 42 विभिन्न प्रजातियों के 50,000 से ज्यादा पौधे लगाए गए हैं। पहले यह क्षेत्र आक्रामक प्रजातियों (Invasive Species) से भरा हुआ था, लेकिन मिट्टी को समृद्ध करने (Soil Enrichment) और कंडीशनिंग के बाद इसे एक हरे-भरे स्वर्ग में बदल दिया गया है। इस पार्क में स्थानीय और प्रवासी पक्षियों को आकर्षित करने के लिए विशेष प्रजातियों का चयन किया गया है, जो आसपास के सिंचाई तालाबों की ओर आते हैं।
इस Biodiversity Park को और भी खास बनाता है Miyawaki Afforestation Technique का उपयोग। यह तकनीक जापानी वनस्पतिशास्त्री अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित की गई है, जो छोटे भूखंडों पर विभिन्न प्रजातियों को एक साथ लगाकर घने और स्वदेशी जंगल बनाने की एक सिद्ध पद्धति है। इस तकनीक की खासियत यह है कि यह पारंपरिक वृक्षारोपण की तुलना में 10 गुना तेजी से पौधों का विकास करती है और 30 गुना अधिक घने जंगल बनाती है। यह तकनीक न केवल जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से लड़ने में मदद करती है, बल्कि जैव विविधता को बढ़ाने, हवा की गुणवत्ता (Air Quality) में सुधार करने और मिट्टी की उर्वरता को बहाल करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हिंदुस्तान जिंक ने इस तकनीक को अपनाकर पर्यावरण संरक्षण और स्थायी वनीकरण (Sustainable Afforestation) के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत किया है।
कंपनी ने अपने अन्य परिचालन स्थलों जैसे देबारी, दरीबा, और चंदेरिया में भी Miyawaki Afforestation Technique को लागू किया है। इन इकाइयों में 2.4 हेक्टेयर क्षेत्र में 65 विभिन्न प्रजातियों के 32,500 पौधे लगाए गए हैं। यह प्रक्रिया पूरी तरह से रसायन-मुक्त (Chemical-Free Approach) है, जिससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। इन घने जंगलों ने न केवल स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को पुनर्जनन किया है, बल्कि कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषण (Carbon Sequestration) को बढ़ाकर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में भी योगदान दिया है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए दीर्घकालिक प्रतिबद्धता
Rajpura Dariba Biodiversity Park : हिंदुस्तान जिंक ने पर्यावरण संरक्षण को अपनी रणनीति का मुख्य हिस्सा बनाया है। कंपनी ने Taskforce on Nature-Related Financial Disclosures (TNFD) फोरम में शामिल होकर प्रकृति से संबंधित जोखिमों और अवसरों को अपनी रणनीतिक योजना में एकीकृत करने की दिशा में कदम उठाया है। यह भारत की पहली कंपनी है, जिसने TNFD Report लॉन्च की है। इसके अलावा, कंपनी ने International Union for Conservation of Nature (IUCN) के साथ तीन साल का एक महत्वपूर्ण सहयोग समझौता किया है। इस सहयोग का उद्देश्य जैव विविधता संरक्षण (Biodiversity Conservation) को बढ़ावा देना और कंपनी के परिचालन क्षेत्रों में No Net Loss (NNL) और Net Positive Gain (NPG) के लक्ष्य को हासिल करना है।
बाघदड़ा नेचर पार्क में मगरमच्छ संरक्षण रिजर्व
Miyawaki Afforestation Technique India : हिंदुस्तान जिंक ने जैव विविधता संरक्षण के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने उदयपुर के वन विभाग के साथ एक MoU पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत बाघदड़ा नेचर पार्क में मगरमच्छ संरक्षण रिजर्व (Crocodile Conservation Reserve) को विकसित और संरक्षित किया जाएगा। इस परियोजना में 5 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा, जिसमें मगरमच्छों के लिए प्राकृतिक आवास (Natural Habitat) को बेहतर बनाने, जल संरक्षण उपायों (Water Conservation Measures) को लागू करने, और Eco-Tourism को बढ़ावा देने के लिए आगंतुकों की सुविधाओं में सुधार पर ध्यान दिया जाएगा। यह पहल न केवल मगरमच्छों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, बल्कि स्थानीय समुदायों को रोजगार के अवसर भी प्रदान करेगी।
चेयरपर्सन का संदेश: जैव विविधता हमारी जिम्मेदारी
Hindustan Zinc environmental initiatives : वेदांता लिमिटेड की नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की चेयरपर्सन प्रिया अग्रवाल हेब्बर ने इस पहल पर अपने विचार साझा करते हुए कहा, “जैव विविधता हमारे ग्रह की जीवन रेखा है। एक छोटी सी तितली से लेकर विशाल बाघ तक, हर प्रजाति इस धरती की धड़कन में एक अनमोल भूमिका निभाती है। पशु कल्याण (Animal Welfare) और जैव विविधता संरक्षण हमारे लिए सिर्फ एक वैकल्पिक सोच नहीं, बल्कि एक गहरी जिम्मेदारी है। हमारी TACO (The Animal Care Organization) पहल और संरक्षण योजनाओं के माध्यम से हम पर्यावरण की रक्षा कर रहे हैं। हमारा लक्ष्य एक ऐसा भविष्य बनाना है, जहां पशु और समुदाय एक साथ फलें-फूलें। प्रसिद्ध अभयारण्यों के साथ हमारी साझेदारी प्रकृति के नाजुक संतुलन को बनाए रखने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।”

व्यापक वनीकरण और हरित पहलें
Vedanta Biodiversity Conservation : हिंदुस्तान जिंक की पर्यावरण संरक्षण की प्रतिबद्धता सिर्फ Biodiversity Park तक सीमित नहीं है। कंपनी ने वन महोत्सव सप्ताह के दौरान राजस्थान और उत्तराखंड में अपनी परिचालन इकाइयों के आसपास 20 लाख से अधिक पौधे लगाकर एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। ये पौधे कार्बन सिंक (Carbon Sink) के रूप में कार्य करते हैं, जो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (Greenhouse Gas Emissions) को कम करने में मदद करते हैं। इसके अलावा, कंपनी ने The Energy and Resources Institute (TERI) के सहयोग से चंदेरिया लेड-जिंक स्मेल्टर में 16 हेक्टेयर बंजर भूमि को हरे-भरे ग्रीनबेल्ट में बदलने के लिए एक परियोजना शुरू की है। इस परियोजना के दूसरे चरण में जारोफिक्स (Jarofix) अपशिष्ट, जो अयस्क से धातु निष्कर्षण के दौरान उत्पन्न होता है, पर पौधे लगाकर हरियाली को बढ़ावा दिया जा रहा है।
इस परियोजना में Mycorrhiza Technology का उपयोग किया गया है, जो पौधों और कवक (Fungus) के बीच एक सहजीवी संबंध (Symbiotic Relationship) पर आधारित है। इस तकनीक में पौधा कवक को भोजन प्रदान करता है, जबकि कवक मिट्टी से पोषक तत्वों को अवशोषित कर पौधे की वृद्धि को बढ़ाता है। यह तकनीक बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने और दीर्घकालिक हरियाली सुनिश्चित करने में प्रभावी है।
सस्टेनेबिलिटी में अग्रणी
हिंदुस्तान जिंक ने सस्टेनेबिलिटी (Sustainability) के क्षेत्र में कई उल्लेखनीय कदम उठाए हैं। कंपनी को जल सुरक्षा (Water Security) और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) में अपने बेहतरीन प्रयासों के लिए Carbon Disclosure Project (CDP) से प्रतिष्ठित Leadership Band (A-) रेटिंग प्राप्त हुई है। कंपनी Water Positivity को बढ़ाने, अपशिष्ट को रिसाइकिल (Recycle) करने, और जैव विविधता को संरक्षित करने के लिए नवीन तकनीकों को अपनाने में अग्रणी रही है। हिंदुस्तान जिंक का लक्ष्य अपनी सभी खनन साइटों पर जैव विविधता का शुद्ध नुकसान (Net Loss) शून्य करना है। यह लक्ष्य 2020 के आधार वर्ष के आधार पर निर्धारित किया गया है और इसमें खदान बंद होने तक की अवधि शामिल है।
कंपनी Net Zero Emissions के अपने लक्ष्य को 2050 या उससे पहले हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके तहत, हिंदुस्तान जिंक ने EcoZen नामक एशिया का पहला कम कार्बन ‘ग्रीन’ जिंक ब्रांड लॉन्च किया है, जिसका कार्बन फुटप्रिंट (Carbon Footprint) प्रति टन जिंक उत्पादन पर 1 टन से कम है, जो वैश्विक औसत से 75% कम है। यह उपलब्धि कंपनी की सस्टेनेबिलिटी के प्रति गंभीरता को दर्शाती है।



