
Hindustan Zinc CSR initiatives : राजसमंद जिले के काबरा गांव की कृष्णा भील के लिए कभी आत्मविश्वास की कमी स्कूल जाने में झिझक का कारण बनती थी। किसान परिवार से आने वाली कृष्णा को गणित और अंग्रेजी जैसे विषय कठिन लगते थे। लेकिन हिंदुस्तान जिंक के शिक्षा संबल कार्यक्रम से जुड़ने के बाद उनकी सोच और पढ़ाई दोनों में बड़ा बदलाव आया। संरचित वर्कशीट, नियमित शैक्षणिक सहयोग, शिक्षकों का मार्गदर्शन और इमर्सिव समर कैंप ने न केवल उनकी Hindustan Zinc CSR initiatives शैक्षणिक नींव को मजबूत किया, बल्कि पढ़ाई के प्रति लगन भी बढ़ाई। सही दिशा और निरंतर समर्थन के चलते आज कृष्णा अपनी कक्षा की टॉपर बन चुकी हैं।
यह कहानी केवल कृष्णा की नहीं, बल्कि उन हजारों ग्रामीण बेटियों की है, जिनके लिए हिंदुस्तान जिंक सशक्तिकरण का पर्याय बन चुका है। राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर कंपनी ने अपनी विभिन्न पहलों के माध्यम से बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प को और दृढ़ किया है। उदयपुर की निर्मा कुंवर की सफलता भी प्रेरणादायक है। Hindustan Zinc CSR initiatives एक साधारण किसान परिवार से आने वाली निर्मा ने अपनी मेहनत और हिंदुस्तान जिंक की ऊंची उड़ान पहल के सहयोग से जेईई परीक्षा में 96 परसेंटाइल हासिल किया। एमएनआईटी जयपुर से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद आज वह एक प्रतिष्ठित कंपनी में कार्यरत हैं। इस पहल के माध्यम से अब तक 300 से अधिक ग्रामीण छात्र-छात्राओं ने अपने करियर की राह आसान बनाई है।
जिंक कौशल से आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर कदम

Women empowerment in rural India : शिक्षा के साथ-साथ हिंदुस्तान जिंक आर्थिक आत्मनिर्भरता को भी सशक्तिकरण की बुनियाद मानता है। जिंक कौशल कार्यक्रम के जरिए ग्रामीण युवाओं को उद्योगों से जुड़े कौशलों में प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिसमें लगभग 45 प्रतिशत भागीदारी महिलाओं की है। ये युवतियां आत्मविश्वास के साथ कार्यक्षेत्र में कदम रख रही हैं, रोजगार पा रही हैं, विदेशों में अवसर तलाश रही हैं और उद्यमिता के माध्यम से विकसित भारत के निर्माण में योगदान दे रही हैं।
जिंक फुटबॉल गर्ल्स एकेडमी: खेल के जरिए आत्मविश्वास
Girl child education support program : खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए हिंदुस्तान जिंक ने जिंक फुटबॉल गर्ल्स एकेडमी की स्थापना की है। यह अपनी तरह की पहली आवासीय एकेडमी है, जो विशेष रूप से बालिकाओं के लिए बनाई गई है। यहां शिक्षा, पोषण, जीवन कौशल और विश्वस्तरीय कोचिंग के साथ सुव्यवस्थित फुटबॉल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सुरक्षित और प्रेरक वातावरण में यह एकेडमी ग्रामीण बालिकाओं को बड़े सपने देखने और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने के लिए तैयार कर रही है।
सखी परियोजना: सामाजिक बदलाव की अलख

CSR initiatives for education India : हिंदुस्तान जिंक की सखी परियोजना से वर्तमान में 27,000 से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं। ये महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं, बल्कि ‘थिएटर जागृति कलामंच’ जैसे समूहों के माध्यम से बाल विवाह और लैंगिक भेदभाव जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ गांव-गांव में जागरूकता फैला रही हैं।
2,362 गांवों में बेटियों के भविष्य को संवारने की पहल
Skill development for rural women : आज हिंदुस्तान जिंक अपने परिचालन क्षेत्रों के 2,362 गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास की पहल के जरिए बेटियों के भविष्य को संवारने में जुटा है। कंपनी का विश्वास है कि जब एक बेटी आगे बढ़ती है, तो समाज और राष्ट्र दोनों प्रगति करते हैं। विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए हिंदुस्तान जिंक हर बेटी को वह मंच दे रहा है, जहां से वह अपने सपनों को साकार करने के साथ जीवन में नई ऊंचाइयों को छू सके।
