
Hinusthan Zinc सस्टेनेबिलिटी गोल 2030 और नेट जीरो कार्बन एमिशन के उद्देश्य की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने अपनी राजपुरा दरीबा माइंस में भारत की पहली डीजल-इलेक्ट्रिक लोड हॉल डंप मशीन, कैटरपिलर कंपनी के आरटी2900 एक्सई मॉडल का भव्य लॉन्च किया। यह मशीन पारंपरिक मशीनों की तुलना में लगभग 30% कम कार्बन उत्सर्जन करती है, जो भूमिगत खनन में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इस आधुनिक तकनीक का शुभारंभ हिंदुस्तान जिंक के सीईओ अरुण मिश्रा ने किया, जिन्होंने इस पहल को पर्यावरण के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया। इस अवसर पर कल्याण सिंह शक्तावत, महासचिव मजदूर संघ दरीबा, और सुनील कुमार चतुर्वेदी, चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक गेनवेल ग्रुप, भी मौजूद रहे, जिन्होंने इस नवाचार की सराहना की। कार्यक्रम में हिंदुस्तान जिंक के सीएफओ संदीप मोदी, सीएचआरओ मुनीश वासुदेवा, सीओओ किशोर एस, राजपुरा दरीबा कॉम्प्लेक्स के आईबीयू सीईओ बलवंत सिंह राठौड़, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट मजदूर संघ नरहरि देव सिंह राठौड़, एवीपी कमर्शियल मुबारक खान, हेड सिक्योरिटी केशव कुमार, यूनिट हेड राजपुरा दरीबा माइन देबांशु चटर्जी, यूनिट हेड एसके माइन सचिन देशमुख, साथ ही कैटरपिलर और गेनवेल ग्रुप के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने शिरकत की। इस भव्य समारोह ने उद्योग और समुदाय के बीच सामंजस्य को दर्शाया।
अपने संबोधन में अरुण मिश्रा ने कहा, “हिंदुस्तान जिंक भविष्य में खनन और स्मेल्टर विस्तार के लिए कई नई परियोजनाओं की शुरुआत करने जा रहा है। इससे स्थानीय समुदाय को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर मिलेंगे, साथ ही भारत की बढ़ती धातु मांग को पूरा करने में कंपनी अहम योगदान देगी।” उनके शब्दों ने कंपनी के विकास और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति संकल्प को रेखांकित किया।

कौशल विकास की नई पहल
गेनवेल ग्रुप के चेयरमैन सुनील कुमार चतुर्वेदी ने कर्मचारियों के लिए कौशल विकास और प्रशिक्षण के लिए एक विशेष पहल की घोषणा की, जो कार्यबल को आधुनिक तकनीकों से जोड़ेगी। यह कदम न केवल उत्पादकता बढ़ाएगा, बल्कि क्षेत्र के युवाओं को भी लाभान्वित करेगा। कल्याण सिंह शक्तावत ने जोर देकर कहा, “यूनियन और समुदाय का सहयोग बेहतर कार्य परिस्थितियों का आधार है, और यही भावना आने वाले समय में दरीबा क्षेत्र में निवेश को नई गति प्रदान करेगी।” उनके इस बयान ने श्रमिकों और प्रबंधन के बीच सकारात्मक संबंधों को मजबूत किया।
पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता
कार्यक्रम के दौरान मशीन की चाबी एक प्रशिक्षित ऑपरेटर को सौंपी गई, जो इस तकनीक के व्यावहारिक उपयोग की शुरुआत का प्रतीक है। यह मशीन हिंदुस्तान जिंक की सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण के प्रति निष्ठा को दर्शाती है। कंपनी के “नेट जीरो कार्बन एमिशन” लक्ष्य की ओर यह एक मील का पत्थर साबित होगी, जो खनन उद्योग में हरित क्रांति लाने में सहायक होगी।
