
India retail inflation : भारत में रिटेल महंगाई के ताजा आंकड़े लोगों के लिए राहत की खबर लेकर आए हैं। अप्रैल 2025 में रिटेल महंगाई दर घटकर 3.16% पर आ गई है, जो पिछले 69 महीनों में सबसे निचला स्तर है। इससे पहले जुलाई 2019 में महंगाई दर 3.15% दर्ज की गई थी। इस कमी का मुख्य कारण खाने-पीने की चीजों की कीमतों में लगातार नरमी बताया जा रहा है।
मार्च से अप्रैल: महंगाई में लगातार गिरावट
CPI April 2025 India पिछले महीने, यानी मार्च 2025 में रिटेल महंगाई दर 3.34% थी, जो उस समय 67 महीनों का सबसे निचला स्तर था। अब अप्रैल में यह और कम होकर 3.16% पर आ गई है। मंगलवार, 13 मई 2025 को जारी किए गए इन आंकड़ों ने आम लोगों को राहत की सांस दी है। खासतौर पर खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में कमी ने इस गिरावट में अहम भूमिका निभाई है।
खाने-पीने की चीजों की कीमतों में कमी
Food inflation drops in India 2025 : महंगाई की गणना में खाने-पीने की वस्तुओं का योगदान करीब 50% होता है। मार्च में इन वस्तुओं की महंगाई दर महीने-दर-महीने आधार पर 3.75% से घटकर 2.67% हो गई थी। अप्रैल में यह और कम होकर 2.69% से 1.78% पर आ गई है। सब्जियों, अनाज और अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतों में नरमी के चलते लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों पर होने वाले खर्च में कमी आई है।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में भी महंगाई घटी
India inflation lowest in 6 years अप्रैल में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में महंगाई दर में कमी देखी गई है। ग्रामीण इलाकों में महंगाई दर 3.25% से घटकर 2.92% हो गई है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 3.43% से कम होकर 3.36% पर आ गई है। यह संतुलित कमी दर्शाती है कि महंगाई का असर पूरे देश में एकसमान रूप से कम हुआ है।
महंगाई कैसे बढ़ती और घटती है?
Vegetable and food price महंगाई का बढ़ना या घटना बाजार में मांग (डिमांड) और आपूर्ति (सप्लाई) के संतुलन पर निर्भर करता है। जब लोगों के पास अधिक पैसा होता है, तो वे ज्यादा सामान खरीदते हैं, जिससे वस्तुओं की डिमांड बढ़ती है। यदि डिमांड के हिसाब से सप्लाई न हो, तो कीमतें बढ़ जाती हैं और बाजार महंगाई की चपेट में आ जाता है। आसान शब्दों में कहें तो बाजार में पैसों की अधिकता या सामान की कमी महंगाई को जन्म देती है। इसके विपरीत, अगर डिमांड कम हो और सप्लाई ज्यादा हो, तो कीमतें कम होती हैं और महंगाई में कमी आती है।
कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) से तय होती है महंगाई
Inflation rate India latest update रिटेल महंगाई को मापने का सबसे प्रमुख तरीका है कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स यानी CPI। यह इंडेक्स उन सामानों और सेवाओं की औसत कीमतों को मापता है, जो हम रिटेल मार्केट से खरीदते हैं। CPI के जरिए ही यह तय होता है कि महंगाई किस स्तर पर है। कच्चे तेल (क्रूड ऑयल), कमोडिटी की कीमतें, मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट और कई अन्य कारक भी रिटेल महंगाई दर को प्रभावित करते हैं। करीब 300 वस्तुओं की कीमतों के आधार पर रिटेल महंगाई का आंकड़ा तैयार किया जाता है।

आम लोगों के लिए राहत
अप्रैल में रिटेल महंगाई के 3.16% तक गिरने से आम लोगों को बड़ी राहत मिली है। खासतौर पर खाने-पीने की चीजों की कीमतों में कमी ने घरेलू बजट को संतुलित करने में मदद की है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक बाजार की स्थिति और मौसम जैसे कारकों पर नजर रखना जरूरी है, क्योंकि ये भविष्य में महंगाई को प्रभावित कर सकते हैं।
सब्जियों और दालों की कीमतों में गिरावट (मार्च से अप्रैल 2025)
महंगाई में कमी का एक प्रमुख कारण खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में आई नरमी है। नीचे दी गई सारणी में मार्च और अप्रैल 2025 के बीच सब्जियों, दालों और अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतों में बदलाव को दर्शाया गया है:
| सामान | मार्च | अप्रैल |
|---|---|---|
| अनाज | 5.93% | 5.35% |
| मांस और मछली | 0.32% | -0.35% |
| दूध | 2.56% | 2.72% |
| खाने का तेल | 17.07% | 17.42% |
| फल | 16.27% | 13.80% |
| सब्जी | -7.04% | -10.98% |
| दालें | -2.73% | -5.23% |
| मसाले | -4.92% | -3.40% |
| सॉफ्ट ड्रिंक्स | 4.01% | 4.40% |
| पान, तंबाकू | 2.48% | 2.08% |
| कपड़े, फुटवियर | 2.62% | 2.67% |
वित्त वर्ष 2024-25 में रिटेल महंगाई का उतार-चढ़ाव
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत की रिटेल महंगाई दर में लगातार बदलाव देखा गया है। नीचे दी गई सारणी में अप्रैल 2024 से मार्च 2025 तक की मासिक महंगाई दर को दर्शाया गया है:
| महीना | महंगाई दर |
|---|---|
| अप्रैल | 4.83% |
| मई | 4.75% |
| जून | 5.08% |
| जुलाई | 3.54% |
| अगस्त | 3.65% |
| सितंबर | 5.49% |
| अक्टूबर | 6.21% |
| नवंबर | 5.48% |
| दिसंबर | 5.22% |
| जनवरी | 4.31% |
| फरवरी | 3.61% |
| मार्च | 3.34% |
प्रमुख बिंदु
- सबसे अधिक महंगाई: अक्टूबर 2024 में रिटेल महंगाई दर 6.21% रही, जो इस वित्त वर्ष में सबसे उच्च स्तर था।
- सबसे कम महंगाई: मार्च 2025 में महंगाई दर 3.34% दर्ज की गई, जो इस वित्त वर्ष का सबसे निचला स्तर रहा।
- उतार-चढ़ाव का रुख: जुलाई और अगस्त में महंगाई दर काफी कम (3.54% और 3.65%) रही, लेकिन सितंबर और अक्टूबर में यह तेजी से बढ़कर 5.49% और 6.21% तक पहुंच गई।
- लगातार कमी: दिसंबर 2024 से मार्च 2025 तक महंगाई दर में लगातार कमी देखी गई, जो 5.22% से घटकर 3.34% पर आ गई।



