
Indian Rupee jumps against Dollar : भारतीय मुद्रा ने मंगलवार (3 फरवरी) को विदेशी मुद्रा बाजार में उल्लेखनीय मजबूती दर्ज करते हुए अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.20 के स्तर को छू लिया। यह उछाल बीते तीन वर्षों में एक दिन में आई सबसे बड़ी तेजी मानी जा रही है। पिछले क्लोज़ 91.49 की तुलना में रुपया 130 पैसे मजबूत हुआ, जिसने बाजार विश्लेषकों को भी चौंका दिया। इस तेज़ी के पीछे भारत और अमेरिका के बीच हुई नई Trade Deal को प्रमुख कारण बताया जा रहा है, जिसने निवेशकों के भरोसे को फिर से जीवंत कर दिया है।
याद दिला दें कि वर्ष 2025 में यही रुपया करीब 5% तक टूटकर एशिया की सबसे कमजोर करेंसी बन गया था। लगातार गिरावट, FII outflow (विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की निकासी) और वैश्विक अनिश्चितताओं ने रुपये पर भारी दबाव बनाया हुआ था। जनवरी 2026 में भी रुपया करीब 2% तक फिसला था। ऐसे माहौल में अचानक आई यह मजबूती बाजार के लिए राहत भरी खबर बनकर सामने आई है।
ट्रेड डील ने बदला माहौल
USD INR today rate 90.20 : रुपए में इस अप्रत्याशित उछाल की जड़ भारत-अमेरिका के बीच हुआ ‘Give and Take’ समझौता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर घोषणा करते हुए कहा कि भारत पर लगाए गए कुछ टैरिफ (Tariff) में बड़ी कटौती की गई है। भारतीय उत्पादों पर लगने वाला टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया गया है। इससे भारतीय निर्यात (Export) को बड़ी राहत मिलेगी और विदेशी बाजारों में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। साथ ही, इस समझौते के तहत भारत ने आने वाले वर्षों में अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर (करीब 45 लाख करोड़ रुपए) की Energy, Technology और Agriculture Products खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है। इस घोषणा ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत में एक सकारात्मक संदेश दिया है कि भारत और अमेरिका के संबंध मजबूत हो रहे हैं और व्यापारिक गतिविधियों को नया आयाम मिलेगा।
रूस से तेल खरीद बंद करने का संकेत
Trump tariff cut India news : इस समझौते का एक अहम पहलू यह भी है कि भारत ने रूस से तेल खरीद कम करने और अमेरिका व वेनेजुएला से तेल आयात बढ़ाने का संकेत दिया है। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारत की भूमिका और रणनीति पर नया फोकस आया है। यह कदम भू-राजनीतिक (Geopolitical) दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है।

FIIs की निकासी से बना था दबाव
Impact of trade deal on rupee : पिछले कई महीनों से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से पूंजी निकाल रहे थे, जिससे रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ था। विदेशी निवेश घटने से डॉलर की मांग बढ़ी और रुपया कमजोर होता चला गया। हालांकि, इस नई Trade Deal के बाद विदेशी निवेशकों का रुख बदलने की संभावना जताई जा रही है, जिससे रुपये को और मजबूती मिल सकती है।
विशेषज्ञों की राय: 89 तक जा सकता है रुपया
Dollar vs Rupee latest news : मार्केट एक्सपर्ट अनुज गुप्ता का कहना है कि निर्यात बढ़ने की उम्मीद और विदेशी निवेश में संभावित वृद्धि से रुपये की मांग बढ़ेगी। उनका अनुमान है कि शॉर्ट टर्म में रुपया 89.50 से 89.00 के स्तर तक जा सकता है।
वहीं, कोटक सिक्योरिटीज के करेंसी रिसर्च हेड अनिंद्य बनर्जी का मानना है कि टैरिफ में कटौती ने रुपये के लिए मजबूती के रास्ते खोल दिए हैं। हालांकि, यह भी महत्वपूर्ण होगा कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) किस स्तर पर बाजार में हस्तक्षेप करता है। यदि RBI ज्यादा हस्तक्षेप नहीं करता, तो रुपये में यह तेजी कुछ समय तक जारी रह सकती है।
2025 की गिरावट से अब उबरता रुपया
2025 में रुपया एशिया की सबसे कमजोर करेंसी बन गया था। डॉलर के मुकाबले लगातार गिरावट ने आयात महंगा कर दिया था और महंगाई (Inflation) पर भी असर पड़ा था। अब इस मजबूती से आयात लागत कम होने की उम्मीद है, जिससे महंगाई दर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
करेंसी की कीमत कैसे तय होती है?
किसी भी देश की मुद्रा की कीमत मुख्य रूप से मांग और आपूर्ति (Demand & Supply) पर निर्भर करती है। जब डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये की मांग घटती है, तो रुपया कमजोर होता है। इसे अंग्रेजी में Currency Depreciation कहा जाता है। वहीं, जब रुपये की मांग बढ़ती है, तो वह मजबूत होता है।
हर देश के पास एक Foreign Exchange Reserve होता है, जिससे वह अंतरराष्ट्रीय लेन-देन करता है। भारत के फॉरेन रिजर्व में डॉलर की मात्रा बढ़े तो रुपया मजबूत होता है, और घटे तो कमजोर।
निवेशकों के लिए संकेत
रुपए की मजबूती का असर शेयर बाजार, आयात-निर्यात, महंगाई और विदेशी निवेश पर सीधा पड़ता है। मजबूत रुपया विदेशी निवेशकों के लिए भरोसे का संकेत देता है और आयातकों के लिए राहत भरा होता है। वहीं, निर्यातकों के लिए थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि मजबूत रुपया भारतीय उत्पादों को विदेशी बाजार में महंगा बना देता है।
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