
Israel Lebanon attack : लेबनान में बुधवार को इजराइल के भीषण हमलों में एक ही दिन में 254 लोगों की जान चली गई, जबकि 1,165 से अधिक लोग घायल हो गए। इस बड़ी त्रासदी के बाद लेबनान में राष्ट्रीय शोक का ऐलान किया गया है।
लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने कहा कि उनकी सरकार देश के सभी राजनीतिक और कूटनीतिक संसाधनों को सक्रिय कर इजराइली हमलों को रुकवाने की कोशिश कर रही है। वहीं, स्वास्थ्य मंत्री रकान नासेरद्दीन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की अपील की है। उन्होंने कहा कि भारी संख्या में घायलों के कारण देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर दबाव बन गया है। उधर, सीजफायर को लेकर विवाद और गहराता नजर आ रहा है। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट कहा कि लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं है। जेडी वेंस ने कहा, “हमने ऐसा कोई वादा नहीं किया था।” इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि उसे तय करना होगा कि वह वास्तव में सीजफायर लागू कराना चाहता है या फिर इजराइल के जरिए युद्ध जारी रखना चाहता है, क्योंकि दोनों बातें एक साथ संभव नहीं हैं।
रिपोर्ट: ईरान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले टैंकरों पर 1 डॉलर प्रति बैरल टोल लगाने की तैयारी में
Lebanon airstrikes : एक नई रिपोर्ट के अनुसार, ईरान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले तेल टैंकरों पर प्रति बैरल 1 डॉलर टैक्स लगाने की योजना बना रहा है। बताया जा रहा है कि यह भुगतान क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से लिया जा सकता है। यह जानकारी फाइनेंशियल टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान इस सामरिक समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की कड़ी निगरानी और नियंत्रण करेगा। किसी भी जहाज को आगे बढ़ने से पहले अपने कार्गो यानी माल की पूरी जानकारी देनी होगी, तभी उसे आगे बढ़ने की अनुमति मिलेगी। ईरान के अधिकारी हामिद होसैनी ने कहा कि यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है ताकि आने वाले दो हफ्तों में हथियारों की आवाजाही पर रोक लगाई जा सके। उन्होंने कहा कि जहाजों को गुजरने दिया जाएगा, लेकिन प्रक्रिया में समय लग सकता है, क्योंकि ईरान किसी जल्दबाजी में नहीं है। इस प्रस्तावित व्यवस्था के तहत जहाजों को ईमेल के जरिए अपने कार्गो का ब्यौरा भेजना होगा। इसके बाद ईरान टैक्स निर्धारित करेगा, जो प्रति बैरल 1 डॉलर होगा, और उसका भुगतान बिटकॉइन जैसी डिजिटल करेंसी में करने की बात कही गई है।
ईरान जंग से जुड़ी तस्वीरें और ताजा घटनाक्रम
बुधवार को ईरान के लवन आइलैंड स्थित एक तेल रिफाइनरी पर हमला किया गया। वहीं, लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी इलाके में इजराइली हमलों के बाद तबाही का मंजर देखने को मिला। एक व्यक्ति टूटी-फूटी इमारतों के सामने खड़ा नजर आया।
यरुशलम में 40 दिन बाद खुली अल-अक्सा मस्जिद
Israeli strikes in Beirut : यरुशलम स्थित अल-अक्सा मस्जिद को 40 दिनों तक बंद रखने के बाद आखिरकार इजराइली प्रशासन ने वहां से पाबंदियां हटा दीं। गुरुवार तड़के बड़ी संख्या में नमाजी मस्जिद पहुंचे और इबादत की। इजराइल की ओर से लगाए गए प्रतिबंध कई हफ्तों से लागू थे, जिनके चलते लोगों की आवाजाही और नमाज पर रोक थी। पाबंदियां हटते ही सुबह मस्जिद परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े। अल-अक्सा मस्जिद इस्लाम के सबसे पवित्र स्थलों में से एक मानी जाती है। यहां पहुंचने पर लगी रोक को लेकर लंबे समय से क्षेत्र में तनाव बना हुआ था।
ईरान और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों की फोन पर बातचीत
Israel Hezbollah conflict : ईरान और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों के बीच फोन पर बातचीत हुई है। तेहरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान से क्षेत्रीय हालात और द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की। हालांकि, तेहरान ने यह साफ नहीं किया कि यह बातचीत कब हुई। दूसरी ओर, सऊदी सरकारी मीडिया के मुताबिक, प्रिंस फैसल बिन फरहान को बुधवार शाम कतर, संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन और तुर्किये के विदेश मंत्रियों के फोन आए, लेकिन इस बयान में ईरान का उल्लेख नहीं किया गया। ईरान और सऊदी अरब लंबे समय से क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी रहे हैं। इस प्रतिस्पर्धा के पीछे सुन्नी और शिया मतभेद भी बड़ी वजह माने जाते हैं। सऊदी अरब में सुन्नी बहुसंख्यक हैं, जबकि ईरान में शिया आबादी प्रमुख है। दोनों देशों के बीच 2023 में सात साल बाद कूटनीतिक संबंध बहाल हुए थे। इससे पहले रियाद द्वारा प्रमुख शिया धर्मगुरु शेख निमर अल-निमर को फांसी दिए जाने के बाद दोनों देशों के रिश्ते टूट गए थे।

सैटेलाइट तस्वीरों में सऊदी की तेल पाइपलाइन में आग दिखाई दी
Middle East war latest update : अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर के ऐलान के कुछ ही घंटों बाद बुधवार को सऊदी अरब की एक अहम तेल पाइपलाइन पर हमला हुआ। अब यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने हमले के बाद की सैटेलाइट तस्वीरें जारी की हैं। इन तस्वीरों में सऊदी अरामको की अबकैक प्रोसेसिंग फैसिलिटी से घना काला धुआं और आग की ऊंची लपटें उठती दिखाई दे रही हैं। अबकैक प्रोसेसिंग फैसिलिटी को दुनिया का सबसे बड़ा क्रूड स्टेबलाइजेशन प्लांट माना जाता है। सऊदी अरामको के मुताबिक, यह वैश्विक तेल सप्लाई का करीब 5% हिस्सा संभालता है। यहां सॉर क्रूड ऑयल को प्रोसेस कर स्वीट क्रूड में बदला जाता है, जिसे बाद में ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए देश के पूर्वी और पश्चिमी तटों तक पहुंचाया जाता है। यह पाइपलाइन उन दो प्रमुख लाइनों में शामिल है जो होर्मुज स्ट्रेट को बायपास करती हैं। मौजूदा युद्ध के कारण वहां व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ऐसे में अबकैक से रेड सी के यनबू पोर्ट तक तेल पहुंचाने वाली यह लाइन सऊदी निर्यात के लिए बेहद महत्वपूर्ण बन गई है।
इराक में फ्रांसीसी सैनिक की मौत के आरोपी गिरफ्तार
इराक ने एरबिल में हुए ड्रोन हमले के आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इस हमले में एक फ्रांसीसी सैनिक की मौत हो गई थी, जबकि छह अन्य घायल हुए थे। इराक के प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी ने इस संबंध में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को जानकारी दी। प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान में कहा गया कि हमले के जिम्मेदार लोगों को हिरासत में ले लिया गया है। मार्च में उत्तरी इराक के एरबिल में यह ड्रोन हमला हुआ था। उस समय फ्रांसीसी सैनिक वहां काउंटर-टेररिज्म ट्रेनिंग मिशन के तहत तैनात थे।
सीजफायर के बाद ईरान में 24 घंटे के भीतर कोई नई मौत नहीं
अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर लागू होने के बाद पहले 24 घंटों में ईरान में किसी नई मौत की खबर सामने नहीं आई है। यह जानकारी अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (HRANA) ने दी है। HRANA के अनुसार, इस दौरान कम से कम 20 हमले दर्ज किए गए, जिनमें कई हमले सीजफायर लागू होने से पहले या उसके तुरंत बाद हुए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, 28 फरवरी से शुरू हुई जंग में अब तक ईरान में 1,701 नागरिकों की मौत हो चुकी है, जिनमें 254 बच्चे शामिल हैं।
ईरान के निर्वासित प्रिंस बोले- कोई सत्ता परिवर्तन नहीं हुआ
ईरान के निर्वासित प्रिंस रजा पहलवी ने अमेरिका के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें ‘सत्ता परिवर्तन’ की बात कही गई थी। फ्रांसीसी मीडिया को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “कौन सा सत्ता परिवर्तन? वही लोग हैं, बस शायद कमजोर हुए हैं।” उन्होंने दावा किया कि ईरान में सत्ता का कोई वास्तविक परिवर्तन नहीं हुआ है। रजा पहलवी ने मौजूदा शासन को “जख्मी जानवर” बताया और कहा कि इसे समाप्त किया जाना चाहिए। रजा पहलवी फिलहाल अमेरिका में रह रहे हैं और वहां राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं। इससे पहले वे “मेक ईरान ग्रेट अगेन” जैसा नारा भी दे चुके हैं। गौरतलब है कि उनके पिता मोहम्मद रजा पहलवी को 1979 की इस्लामिक क्रांति के दौरान सत्ता से हटा दिया गया था। इसके बाद ईरान में मौजूदा इस्लामी शासन स्थापित हुआ।
NATO प्रमुख बोले- ट्रम्प सहयोगियों से नाराज
NATO प्रमुख मार्क रुट ने कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ईरान मुद्दे पर सहयोगियों से पर्याप्त समर्थन न मिलने के कारण निराश हैं। रुट ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच हुई बैठक दो अच्छे दोस्तों के बीच खुली बातचीत जैसी थी। उन्होंने ट्रम्प को बताया कि कई यूरोपीय देशों ने लॉजिस्टिक्स, ओवरफ्लाइट और बेसिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग दिया, हालांकि वे सीधे सैन्य कार्रवाई में शामिल नहीं हुए। इसके बावजूद ट्रम्प ने NATO सहयोगियों पर निशाना साधते हुए कहा कि, “जब हमें जरूरत थी, तब NATO हमारे साथ नहीं था और भविष्य में भी नहीं होगा।” व्हाइट हाउस की ओर से संकेत दिए गए थे कि ट्रम्प NATO से बाहर निकलने जैसे मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं, लेकिन इस पर कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। रुट ने कहा कि यूरोप के कई देश ईरान की अराजक गतिविधियों को रोकने के अमेरिकी प्रयासों का समर्थन करते हैं। साथ ही, यूरोपीय देशों ने अमेरिका-ईरान सीजफायर का स्वागत किया और होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री आवाजाही सुनिश्चित करने में सहयोग देने की बात कही।
युद्ध में अमेरिका और ईरान को हुए नुकसान पर नजर
इस जंग में अमेरिका और ईरान दोनों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
अमेरिका का नुकसान:
- 15 सैनिकों की मौत
- 300 सैनिक घायल
- कई महंगे सैन्य विमान और ड्रोन नष्ट
- F-15E स्ट्राइक ईगल: लगभग 750 से 915 करोड़ रुपए
- F-35: लगभग 660 से 910 करोड़ रुपए
- A-10 थंडरबोल्ट II: करीब 150 से 210 करोड़ रुपए
- E-3 अवाक्स: 2,200 से 2,500 करोड़ रुपए
- MQ-9 रीपर (17 से अधिक ड्रोन): 4,250 से 5,000 करोड़ रुपए
पेंटागन के मुताबिक, युद्ध के शुरुआती दिनों में अमेरिका रोजाना लगभग 15,666 करोड़ रुपए खर्च कर रहा था। कुल खर्च पांच लाख करोड़ रुपए से ज्यादा आंका गया है।
ईरान का नुकसान:
- एक महीने में करीब 13 लाख करोड़ रुपए का अनुमानित नुकसान
- तेल निर्यात रुकने से करीब 33,000 करोड़ रुपए का झटका
- जीडीपी में करीब 20% तक गिरावट की आशंका
- लगभग 4 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे जा सकते हैं
- देश के पुनर्निर्माण में करीब 10 साल लग सकते हैं
होर्मुज स्ट्रेट में लापता तीन थाई नाविकों की मौत की पुष्टि
होर्मुज स्ट्रेट में पिछले महीने हुए हमले में लापता तीन थाई नाविकों की मौत की पुष्टि हो गई है। यह जानकारी थाईलैंड के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री सिहासक फुआंगकेतकेओ ने बुधवार को दी। 11 मार्च को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते समय थाई झंडे वाले 180 मीटर लंबे बल्क कैरियर ‘मयूरी नारी’ पर हमला हुआ था। जहाज पर कुल 23 क्रू मेंबर सवार थे। हमले के बाद ओमान की अथॉरिटीज ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर 20 लोगों को सुरक्षित बचा लिया था, जबकि तीन लोग लापता थे। अब उनकी मौत की पुष्टि कर दी गई है। विदेश मंत्री ने कहा कि वह इस महीने के अंत में ओमान का दौरा करेंगे। वहां वे बचाव अभियान के लिए अधिकारियों का धन्यवाद करेंगे और होर्मुज में फंसे 9 थाई जहाजों के लिए सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित करने में मदद मांगेंगे।
बेरूत में इजराइली हमले के बाद पूरी इमारत ढही
लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी इलाके में इजराइल के ताजा हवाई हमले में एक इमारत पूरी तरह ढह गई। चियाह इलाके में हुए इस हमले के बाद तबाही का भयावह दृश्य सामने आया। वीडियो फुटेज में इमारत पूरी तरह मलबे में तब्दील नजर आई। स्थानीय लोग और राहतकर्मी टॉर्च की रोशनी में मलबे में फंसे लोगों को निकालने में जुटे रहे। आशंका जताई जा रही है कि कई लोग अब भी मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं। फिलहाल, किसी आधिकारिक मौत या घायल का अंतिम आंकड़ा जारी नहीं किया गया है। अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर लागू होने के बावजूद लेबनान को इस समझौते में शामिल नहीं किया गया, जिसके चलते वहां इजराइली हमले लगातार जारी हैं।
अमेरिका और ब्रिटेन में युद्ध विरोधी प्रदर्शन
अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर के बावजूद युद्ध को पूरी तरह समाप्त करने की मांग को लेकर अमेरिका और ब्रिटेन में प्रदर्शन हुए। न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर में सैकड़ों लोग इकट्ठा हुए और अमेरिका-इजराइल तथा ईरान युद्ध को स्थायी रूप से खत्म करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने “स्टॉप द वॉर ऑन ईरान” और “स्टॉप बॉम्बिंग लेबनान नाउ” जैसे पोस्टर लहराए। वहीं, लंदन में इजराइल के दूतावास के बाहर भी लोगों ने प्रदर्शन किया और लेबनान पर जारी हमलों को तुरंत रोकने की मांग उठाई।
इजराइल ने लेबनान से दागे गए रॉकेट को हवा में ही मार गिराया
लेबनान से उत्तरी इजराइल की ओर दागे गए एक रॉकेट को इजराइली सेना ने हवा में ही इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया। सेना के अनुसार, यह प्रोजेक्टाइल लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही मार गिराया गया। हमले के बाद उत्तरी इजराइल के गैलीली क्षेत्र में एयर रेड सायरन बज उठे और लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी गई। इजराइल ने लेबनान में अब तक के सबसे भीषण हमलों में से एक को अंजाम दिया है, जिसमें 254 लोगों की मौत हुई और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए। सीजफायर के बावजूद क्षेत्र में तनाव कम होने के बजाय बना हुआ है, और दोनों ओर से हमले जारी हैं।



